24 घंटे पहले हुआ 'खेल', भिवंडी में पुलिस की रेड और परीक्षा स्थगित
मामला महाराष्ट्र का है, जहां रविवार को राज्य भर में TET (Teacher Eligibility Test) का एग्जाम होना था। लेकिन शनिवार को ही पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि परीक्षा का पेपर बाजार में घूम रहा है। पुलिस ने बिना देर किए ठाणे के भिवंडी इलाके में कई जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। छापेमारी के दौरान पुलिस के हाथ कुछ दस्तावेज और प्रश्नपत्र लगे।
इसके बाद महाराष्ट्र स्टेट एग्जामिनेशन काउंसिल (MSEC) के अधिकारियों को रात में ही बुलाकर जब्त किए गए पेपर का मिलान कराया गया। मिलान होते ही अफसरों के होश उड़ गए, क्योंकि जब्त पेपर असली प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खा रहा था। इसके बाद एग्जामिनेशन काउंसिल ने तुरंत परीक्षा स्थगित करने का फैसला लिया। राज्य सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में कई संदिग्धों को हिरासत में भी लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है।
AI कैमरे से लेकर बायोमेट्रिक तक, सारे इंतजाम धरे के धरे रह गए
इस परीक्षा के लिए प्रशासन की तरफ से किए गए दावों की लिस्ट इतनी लंबी थी कि लग रहा था परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा। लेकिन सेंध लगाने वालों ने सिस्टम की नाक के नीचे से पेपर उड़ा दिया।
जरा देखिए परीक्षा को फुलप्रूफ बनाने के लिए क्या-क्या तैयारी की गई थी:
- 1,729 परीक्षा केंद्र: पूरे महाराष्ट्र में बनाए गए थे ताकि छात्र आसानी से एग्जाम दे सकें।
- 18,000 AI आधारित CCTV कैमरे: हर सेंटर और हर कमरे की हरकत पर पैनी नजर रखने के लिए लगाए गए थे।
- बायोमेट्रिक और फेस रिकग्निशन: मुन्नाभाइयों को रोकने के लिए कैंडीडेट्स का बायोमेट्रिक और चेहरा स्कैन करने की व्यवस्था थी।
- कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग: हर केंद्र की सीधे राज्य और जिला कंट्रोल रूम से लाइव मॉनिटरिंग की जा रही थी।
- नो गैजेट पॉलिसी: मोबाइल, स्मार्ट वॉच और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान पूरी तरह बैन थे, साथ ही मेटल डिटेक्टर से चेकिंग होनी थी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जब एग्जाम सेंटर की सुरक्षा इतनी चाक-चौबंद थी, तो पेपर लीक करने वाले गिरोह ने परीक्षा केंद्र तक पहुंचने से पहले ही पेपर कैसे निकाल लिया? इस परीक्षा में करीब 4.28 लाख से ज्यादा उम्मीदवार शामिल होने वाले थे, जो अब ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
टीचर्स की नौकरी पर क्यों लटकी है तलवार? समझिए TET का पूरा गणित
अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि सिर्फ नए युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि जो पहले से सरकारी टीचर हैं, उनके लिए भी ये परीक्षा इतनी जरूरी क्यों है? असल में, इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट का एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक आदेश है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बच्चों के बेहतर भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों का खुद योग्य होना जरूरी है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक:
- शिक्षकों को अपनी नौकरी सुरक्षित रखने या आगे प्रमोशन पाने के लिए TET पास करना ही होगा।
- यह नियम उन सभी शिक्षकों पर लागू होता है जिनकी नौकरी के 5 साल से ज्यादा बचे हैं।
- कोर्ट ने पहले इसके लिए 31 अगस्त 2027 की डेडलाइन दी थी, जिसे बढ़ाकर अब 31 अगस्त 2028 कर दिया गया है।
- अगर इस समय सीमा तक कोई शिक्षक परीक्षा पास नहीं कर पाता है, तो उसे या तो खुद इस्तीफा देना होगा या फिर उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दे दी जाएगी।
यानी जो गुरुजी सालों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, उनके लिए भी यह परीक्षा नौकरी बचाने की आखिरी उम्मीद जैसी है। यही वजह है कि इस एग्जाम को लेकर राज्य में जबरदस्त होड़ और तनाव था।
राहुल गांधी भड़के: बोले- "यह सिर्फ पेपर लीक नहीं, भविष्य की चोरी है"
महाराष्ट्र में हुए इस ताजा पेपर लीक के बाद देश की सियासत का पारा भी चढ़ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए लिखा:
"एक और पेपर लीक हुआ, परीक्षा रद्द हो गई। इस बार महाराष्ट्र की TET परीक्षा। देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था अब केवल एक 'वसूली का सिस्टम' बनकर रह गई है। इससे देश का हर युवा खुद को असुरक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रहा है। यह महज एक पेपर लीक की घटना नहीं है, बल्कि हमारे युवाओं के भविष्य की खुली चोरी है।"
पेपर लीक का ये 'क्रोनोलॉजी' थमने का नाम क्यों नहीं ले रहा?
देश के युवाओं के लिए पेपर लीक अब कोई नई बात नहीं रह गई है। पिछले 5 सालों का रिकॉर्ड देखें तो देश में एक के बाद एक कई बड़े पेपर लीक मामले सामने आए हैं। चाहे राजस्थान की REET (रीट) परीक्षा हो, यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का महा-घोटाला हो या फिर हाल ही में देश को हिलाकर रख देने वाला NEET-UG विवाद हो - हर बार लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाता है।
अब देखना यह है कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित की गई SIT इस लीक के मास्टरमाइंड तक कब पहुंच पाती है और 4 लाख से ज्यादा परेशान उम्मीदवारों को परीक्षा की नई तारीख कब मिलती है। इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? क्या वाकई सख्त कानूनों के बाद भी हमारा सिस्टम पेपर लीक रोकने में नाकाम साबित हो रहा है? हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

