दिल्ली: आजकल टेक्नोलॉजी के मामले में अक्सर ये माना जाता है कि जो नई पीढ़ी है, यानी Gen Z, वो हमसे कहीं आगे है। भई, फोन चलाना हो, इंटरनेट की नई-नई चीजें समझनी हों या कोई भी गैजेट इस्तेमाल करना हो, नए ज़माने के बच्चे तो पलक झपकते ही सब सीख लेते हैं। लेकिन अगर मैं आपसे कहूँ कि एक मामले में आपके दादा-दादी या मम्मी-पापा आपसे ज़्यादा स्मार्ट और सचेत हैं, तो शायद आप चौंक जाएँगे। जी हाँ, बात हो रही है आपके ऑनलाइन पासवर्ड की! एक नई स्टडी ने कुछ ऐसे खुलासे किए हैं, जो आपकी सोच को पलट सकते हैं।
मोटा-मोटी कहानी ये है कि पासवर्ड की सुरक्षा और उसे बदलने के मामले में 'बेबी बूमर्स' (पुरानी पीढ़ी) 'जेन Z' (आज की युवा पीढ़ी) से कहीं आगे निकल गए हैं। आप सोच रहे होंगे, ऐसा कैसे? जिन्हें हम ‘टेक-सैवी’ मानते हैं, वो पासवर्ड जैसे बुनियादी सिक्योरिटी नियम में कैसे पीछे रह गए? ये अपने आप में एक बड़ा सवाल है जिस पर गौर करना जरूरी है।
पासवर्ड..
. ये एक ऐसा शब्द है जो हमारी ऑनलाइन जिंदगी की चाबी है।
बैंक अकाउंट से लेकर सोशल मीडिया प्रोफाइल तक, हर जगह इसकी जरूरत पड़ती है। अक्सर लोग सालों तक एक ही पासवर्ड इस्तेमाल करते रहते हैं, बस उसमें थोड़े-बहुत बदलाव कर देते हैं – कभी कोई स्पेशल कैरेक्टर, कभी कोई नंबर या कैपिटल लेटर जोड़ दिया।
लेकिन ये आदत कितनी खतरनाक हो सकती है, इस पर शायद ही कोई ध्यान देता है। अगर आपका मूल पासवर्ड कई सालों, या कहें तो दशकों से वही है, तो ये एक बड़ा रिस्क फैक्टर है।
तो क्या वाकई पुरानी पीढ़ी है ज्यादा स्मार्ट?
NordPass नाम की एक कंपनी ने इसी पासवर्ड हाइजीन को लेकर एक बड़ी स्टडी करवाई है। इस स्टडी में 7,861 लोगों से बात की गई, जिनकी उम्र 18 से 74 साल के बीच थी।
और इसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले हैं। स्टडी बताती है कि पासवर्ड बदलने के मामले में जेन Z सबसे पीछे है! मतलब, ये वो पीढ़ी है जो अपने पासवर्ड को सबसे कम अपडेट करती है।
वहीं, अगर बात करें बेबी बूमर्स की, जिनकी उम्र 55 से 64 साल के बीच थी, तो वो सबसे ज़्यादा सिक्योरिटी-कॉन्शियस निकले। ये लोग अपने पासवर्ड्स को लगातार और नियमित रूप से बदलते रहते हैं।
आंकड़ों को देखें तो और भी बातें साफ होती हैं। स्टडी में शामिल कुल लोगों में से सिर्फ 54% लोगों ने ही पिछले 12 महीनों में अपना सबसे पुराना पासवर्ड बदला था।
यानी, आधे से भी कम लोग अपने पासवर्ड को अपडेट करने की जहमत उठाते हैं। अब इसमें भी अगर उम्र के हिसाब से देखें, तो 18 से 24 साल की उम्र वाले लोग (जो जेन Z में आते हैं) अपने पासवर्ड को सबसे कम बार बदलते हैं।
और 55 से 64 साल की उम्र वाले लोग सबसे ज़्यादा बार। है न कमाल की बात?
पासवर्ड बचाने का तरीका, किसका बेहतर?
अब बात आती है पासवर्ड को याद रखने या उसे सुरक्षित रखने के तरीके की। इसमें भी दोनों पीढ़ियों के बीच एक दिलचस्प अंतर देखने को मिलता है।
पुरानी पीढ़ी, यानी बेबी बूमर्स, पासवर्ड को याद रखने के लिए या तो उसे अपनी याददाश्त पर भरोसा करते हैं या फिर उसे किसी कॉपी-किताब में लिख कर रखते हैं। आपने भी देखा होगा कि आपके घर में बड़े-बुज़ुर्ग अक्सर अपने पासवर्ड किसी डायरी या नोटपैड में लिखकर रखते हैं।
वहीं, दूसरी तरफ, नई पीढ़ी, जो टेक्नोलॉजी में ज़्यादा माहिर मानी जाती है, वो पासवर्ड को सेव करने के लिए ब्राउज़र-बेस्ड स्टोरेज (जैसे क्रोम या सफारी में ऑटोसेव) या फिर थर्ड-पार्टी पासवर्ड मैनेजर्स का इस्तेमाल करती है। कहने को ये तरीके ज़्यादा मॉडर्न और डिजिटल लगते हैं, लेकिन क्या ये वाकई ज़्यादा सुरक्षित हैं? ये सवाल भी अपने आप में मायने रखता है।
जानकार बताते हैं कि पासवर्ड को याद रखना या उसे लिखकर रखना अक्सर पासवर्ड को दोबारा इस्तेमाल करने की वजह बनता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोग सोचते हैं कि जब उन्हें याद ही रखना है या लिखना ही है, तो क्यों न एक ही पासवर्ड को थोड़ा-बहुत बदलकर हर जगह इस्तेमाल कर लिया जाए।
और यही पासवर्ड के दोबारा इस्तेमाल (Password Reuse) की आदत साइबर अटैक या अकाउंट हैक होने के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है। अगर आपका एक अकाउंट कॉम्प्रोमाइज़ होता है, तो बाकी अकाउंट्स पर भी खतरा मंडराने लगता है।
पासवर्ड की संख्या घटी, पर टेंशन खत्म हुई क्या?
एक और आंकड़ा है, जो बताता है कि लोगों के पास कुल पासवर्ड की संख्या थोड़ी कम हुई है। साल 2024 में औसत तौर पर एक व्यक्ति के पास 168 पासवर्ड हुआ करते थे।
ये संख्या अब 2026 में घटकर 120 हो गई है। कहने को ये एक अच्छी खबर है कि पासवर्ड की संख्या घटी है, लेकिन क्या 120 पासवर्ड रखना कम है? बिल्कुल नहीं! इतने सारे पासवर्ड को मैनेज करना, उन्हें याद रखना और हर एक को यूनीक बनाए रखना आज भी एक बड़ा चैलेंज है।
कुल मिलाकर, इस स्टडी से ये साफ होता है कि पासवर्ड हाइजीन के मामले में हर जनरेशन को अभी बहुत कुछ सीखने और सुधारने की ज़रूरत है। चाहे वो नई पीढ़ी हो जो पासवर्ड बदलने में ढीली है, या पुरानी पीढ़ी जो उन्हें लिखने की आदत रखती है - हर किसी को अपनी ऑनलाइन सिक्योरिटी को लेकर और ज़्यादा सचेत होना पड़ेगा।
क्योंकि आपकी एक छोटी सी चूक आपकी ऑनलाइन दुनिया को बड़े खतरे में डाल सकती है। पासवर्ड मैनेजर्स का सही इस्तेमाल और नियमित रूप से पासवर्ड बदलते रहना ही इस डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने का एकमात्र रास्ता है।




































