भारत: आजकल हर दूसरे युवा का सपना है कि एक चमचमाती एसयूवी (SUV) हो, खासकर महिंद्रा थार जैसी दमदार गाड़ी। 20 लाख रुपए के बजट में ऐसी कई गाड़ियां आजकल बाजार में जलवा बिखेर रही हैं। लेकिन, सिर्फ गाड़ी खरीद लेना ही काफी नहीं होता, उसका बोझ आपकी जेब पर न पड़े, ये भी तो देखना पड़ता है।
अक्सर लोग जोश-जोश में बड़ा लोन ले लेते हैं और फिर हर महीने की ईएमआई (EMI) उनकी रातों की नींद और दिन का चैन छीन लेती है। मंथली सेविंग्स से लेकर बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने जैसे बड़े सपनों तक, सब पर असर पड़ता है।
पर क्या कोई ऐसा 'जादू' है जिससे आप अपनी ड्रीम कार भी खरीद लें और आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planning) भी न बिगड़े?
जी हां, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स (Financial Experts) ने एक ऐसा ही सुपरहिट और ग्लोबल नियम बनाया है, जिसे '20-4-10' का फॉर्मूला कहते हैं। अगर आप भी 20 लाख वाली थार खरीदने का मन बना चुके हैं, तो ये फॉर्मूला आपके बहुत काम आ सकता है।
चलिए, इसी गणित को थोड़ा आसान बनाते हैं और समझते हैं कि ये फॉर्मूला आखिर है क्या और आपकी जेब को कैसे खुश रख सकता है।
तो आखिर ये '20-4-10' फॉर्मूला क्या है, जो जेब बचाएगा?
ये कोई मुश्किल रॉकेट साइंस नहीं है, बल्कि आपकी जेब को टेंशन फ्री रखने का एक सीधा-साधा नियम है। इसका मकसद ये है कि आप कार तो लें, पर बाकी जरूरी खर्चे, जैसे घर, बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट प्लान (Retirement Plan) पर कोई बुरा असर न पड़े।
- पहला नंबर '20': इसका मतलब है कि कार की ऑन-रोड कीमत का कम से कम 20% हिस्सा आपको डाउन पेमेंट (Down Payment) के तौर पर कैश (Cash) देना चाहिए।
- दूसरा नंबर '4': ये बताता है कि आपकी कार लोन (Car Loan) की अवधि अधिकतम 4 साल (यानी 48 महीने) से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
- तीसरा नंबर '10': आपकी कार की मासिक ईएमआई (EMI) और कार के रख-रखाव (Maintenance) का खर्च, ये दोनों मिलाकर आपकी हर महीने की इन-हैंड सैलरी (In-Hand Salary) के 10% से ज्यादा नहीं होने चाहिए।
20 लाख की कार पर ये फॉर्मूला कैसे काम करेगा?
चलिए, एक उदाहरण से समझते हैं। मान लेते हैं कि आप 20 लाख रुपए की कोई कार खरीद रहे हैं, जिसमें ऑन-रोड कीमत, रजिस्ट्रेशन (Registration) और इंश्योरेंस (Insurance) सब शामिल है।
अब इस पर '20-4-10' का नियम लगाकर देखते हैं:
पहला कदम: डाउन पेमेंट कितनी दें?
नियम के पहले हिस्से '20' के हिसाब से, आपको 20 लाख रुपए का 20% यानी 4 लाख रुपए डाउन पेमेंट के तौर पर कैश देना होगा। अब आप पूछेंगे कि इसमें फायदा क्या है? फायदा ये है कि आपका लोन अमाउंट (Loan Amount) छोटा हो जाता है।
इससे बैंक से लोन मिलने में आसानी होती है, और तो और, आपको कम ब्याज दर (Interest Rate) पर लोन मिल सकता है। जब लोन ही छोटा होगा, तो ब्याज भी कम देना पड़ेगा।
है न फायदे का सौदा?
दूसरा कदम: लोन कितने का और कितने साल का लें?
4 लाख रुपए की डाउन पेमेंट देने के बाद, आपका कुल लोन अमाउंट बचेगा 16 लाख रुपए। अब बात आती है लोन की अवधि की, यानी नियम का दूसरा हिस्सा '4'।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कार लोन की अवधि 4 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। वजह सीधी है – लोन जितना लंबा होगा, आप बैंक को उतना ही ज्यादा ब्याज चुकाएंगे।
चलिए, एक आंकड़े से समझते हैं। मान लीजिए आपको बैंक से 9% सालाना ब्याज दर पर कार लोन मिल रहा है।
अगर आप 4 साल (48 महीने) के लिए लोन लेते हैं, तो आपकी अनुमानित मासिक ईएमआई करीब 39,811 रुपए होगी। इस पर आप कुल ब्याज देंगे लगभग 3,11,000 रुपए।
अगर आप इसी लोन को 5 साल (60 महीने) के लिए लेते हैं, तो आपकी ईएमआई घटकर 33,212 रुपए हो जाएगी, लेकिन कुल ब्याज बढ़कर 3,93,000 रुपए हो जाएगा।
और अगर आप 7 साल (84 महीने) के लिए लोन लेते हैं, तो ईएमआई और भी कम होकर 25,720 रुपए हो जाएगी, पर जानते हैं कितना ब्याज चुकाना पड़ेगा? पूरे 5,60,000 रुपए! मतलब, सिर्फ ब्याज में ही आपने एक छोटी कार खरीदने जितनी रकम दे दी।
जरा सोचिए, 4 साल के लोन की तुलना में, 7 साल के लोन में आप सीधे-सीधे करीब 2.5 लाख रुपए का शुद्ध ब्याज ज्यादा भर रहे हैं। ये लाखों रुपए कहीं और इन्वेस्ट (Invest) किए जा सकते थे, जिससे आपकी संपत्ति और बढ़ती।
तीसरा कदम: आपकी सैलरी कितनी होनी चाहिए?
अब आता है नियम का तीसरा और सबसे अहम हिस्सा '10'। इसके मुताबिक, आपकी कार की ईएमआई और उसका मंथली मेंटेनेंस कॉस्ट (Monthly Maintenance Cost) आपकी इन-हैंड सैलरी के 10% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
अगर हम 4 साल के लोन वाली स्थिति को देखें, तो आपकी ईएमआई करीब 39,811 रुपए बन रही है। अगर आप इसमें लगभग 5,000 रुपए हर महीने कार के पेट्रोल, सर्विसिंग (Servicing) और छोटे-मोटे खर्चों के जोड़ लेते हैं, तो कुल खर्च लगभग 44,811 रुपए बैठता है।
तो इस 10% के नियम के हिसाब से, आपकी महीने की इन-हैंड सैलरी कम से कम 4,48,110 रुपए होनी चाहिए। जी हां, करीब सवा चार लाख रुपए महीने।
अगर आपकी सैलरी इतनी नहीं है, तो शायद 20 लाख रुपए वाली थार या कोई और महंगी कार आपकी जेब के लिए थोड़ा भारी पड़ सकती है।
ये नियम आपको यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या आप सच में इस कीमत की कार को अफोर्ड (Afford) कर सकते हैं। अक्सर लोग ईएमआई कम करने के चक्कर में लोन की अवधि बढ़ा देते हैं, जिससे ब्याज का बिल तो बढ़ ही जाता है, साथ ही भविष्य के लिए सेविंग्स करने का मौका भी हाथ से निकल जाता है।
कुल मिलाकर, '20-4-10' का ये फॉर्मूला सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि एक फाइनेंशियल एडवाइस (Financial Advice) है जो आपको अपनी ड्रीम कार खरीदते समय समझदारी से फैसले लेने में मदद करता है। तो अगली बार जब आप अपनी नई कार का सपना देखें, तो इस फॉर्मूले को याद रखें और अपनी जेब का गणित न बिगड़ने दें!






































