नई दिल्ली: इलेक्ट्रिक गाड़ियां यानी EV... आज के समय में हर तरफ इनकी ही चर्चा है। लेकिन जब भी बात EV की आती है, सबसे बड़ा सवाल जो लोगों के दिमाग में घूमता है, वो है इनकी बैटरी का। 'अरे यार, इसकी बैटरी कितने दिन चलेगी? कहीं 5 साल बाद ही बदलवानी पड़ जाए तो लाखों का चूना लग जाएगा।' यही ना? तो भैया, अगर आपके मन में भी ये सवाल और ये डर बैठा है, तो तैयार हो जाइए, क्योंकि नई रिसर्च ने आपके सारे डर को धुआँ-धुआँ कर दिया है। आंकड़े इतने चौंकाने वाले हैं कि आप अपनी आँखों पर यकीन नहीं करेंगे!
हाल ही में एक बैटरी एनालिटिक्स कंपनी 'Recurrent' ने एक धमाकेदार स्टडी जारी की है, जिसमें पता चला है कि इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी, जिनकी उम्र को लेकर सबसे ज़्यादा चिंता जताई जाती है, वो दरअसल हमारी सोच से कहीं ज़्यादा टिकाऊ हैं। ये रिपोर्ट बताती है कि औसतन, एक इलेक्ट्रिक गाड़ी की बैटरी 5 साल सड़कों पर दौड़ने के बाद भी अपनी मूल क्षमता का 95% तक बरकरार रखती है।
जी हाँ, आपने सही सुना - 95%!
ये कोई छोटी बात नहीं है। जब EV का शुरुआती दौर था, तो बड़े-बड़े ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स और मैन्युफैक्चरर्स को भी डर था कि बैटरी पैक इतनी तेज़ी से ख़राब होंगे कि उन्हें कुछ ही सालों में बदलना पड़ जाएगा।
लेकिन अब डेटा कुछ और ही कहानी कह रहा है। ये बैटरियाँ उन शुरुआती भविष्यवाणियों से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं, और यही वजह है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपनाने का रास्ता अब और आसान लगने लगा है।
बैटरी की लंबी उम्र: चौंकाने वाले आंकड़े
Recurrent की इस स्टडी के आंकड़े बताते हैं कि 2011 से 2016 के बीच बनी लगभग 12 इलेक्ट्रिक गाड़ियों में से एक को बैटरी बदलवाने की ज़रूरत पड़ी थी। ये संख्या उस समय चिंताजनक मानी जाती थी।
लेकिन अब ज़रा नया डेटा देखिए। 2022 से आगे बनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए, बैटरी बदलने की ज़रूरत वाली गाड़ियों का आंकड़ा नाटकीय रूप से गिरकर सिर्फ 0.3 प्रतिशत रह गया है! सोचिए, कहाँ 12 में से 1 और कहाँ 1000 में से सिर्फ 3!
इसका सीधा मतलब ये है कि अब इलेक्ट्रिक कार ख़रीदने वालों को बैटरी बदलने के भारी-भरकम ख़र्च की चिंता शायद ही करनी पड़ेगी। ये आंकड़े सीधे तौर पर उन सभी आशंकाओं को ख़ारिज करते हैं जो बैटरी की लाइफ को लेकर मार्केट में फैली हुई थीं।
अब लोग बेफ़िक्र होकर EV ख़रीद सकते हैं, यह जानते हुए कि उनकी बैटरी लंबे समय तक उनका साथ निभाएगी।
तकनीकी तरक्की का कमाल
'The Wall Street Journal' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस शानदार नतीजे के पीछे बैटरी केमिस्ट्री, थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम (यानी बैटरी को ठंडा रखने वाला सिस्टम) और गाड़ी के सॉफ्टवेयर में हुई ज़बरदस्त तरक्की है। इन सबने मिलकर बैटरी की उम्र को कई गुना बढ़ा दिया है।
अब इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ पेट्रोल-डीज़ल वाली गाड़ियों जितनी ही दूरी तय कर पा रही हैं, वो भी बिना बैटरी पैक बदलवाने की ज़रूरत के।
पुराने ज़माने में, बैटरी को लेकर एक आम धारणा थी कि ज़्यादा गर्मी या ज़्यादा ठंड से उसकी उम्र कम होती है। लेकिन आधुनिक EV बैटरियों में ऐसे सिस्टम लगे होते हैं जो तापमान को नियंत्रित रखते हैं, जिससे बैटरी हमेशा सबसे अच्छी परफॉरमेंस देती है।
साथ ही, बैटरी के अंदर इस्तेमाल होने वाली केमिस्ट्री भी अब कहीं ज़्यादा बेहतर और स्थिर हो गई है, जिससे डिग्रेडेशन (यानी क्षमता में कमी) बहुत धीमी गति से होता है।
फास्ट चार्जिंग का सच और एक रियल-वर्ल्ड उदाहरण
एक और सवाल जो EV मालिकों के मन में आता है, वो है फास्ट चार्जिंग का। क्या बार-बार DC फास्ट चार्जर का इस्तेमाल करने से बैटरी जल्दी ख़राब हो जाती है? Recurrent की रिपोर्ट मानती है कि नियमित घरेलू चार्जिंग की तुलना में ज़्यादा पावर वाले DC चार्जिंग से बैटरी डिग्रेडेशन थोड़ा तेज़ हो सकता है।
लेकिन 'Digital Trends' ने Geotab के डेटा के हवाले से बताया है कि जो बैटरियाँ बार-बार हाई पावर पर चार्ज की जाती हैं, वे भी कई सालों बाद अपनी मूल क्षमता का लगभग 89.7 प्रतिशत तक बरकरार रखती हैं। तो इसका मतलब ये हुआ कि फास्ट चार्जिंग उतनी बुरी नहीं है जितना लोग सोचते हैं।
और अब एक मज़ेदार उदाहरण सुनिए। 'The Wall Street Journal' की रिपोर्ट एक UK-आधारित EV डीलर का ज़िक्र करती है, जिनकी पाँच साल पुरानी Tesla Model 3 गाड़ी ने 247,000 मील (लगभग 3.97 लाख किलोमीटर) का लंबा सफ़र तय किया है।
लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि इस गाड़ी की अनुमानित रेंज, जब यह नई थी, तब की WLTP फिगर से सिर्फ़ कुछ ही मील कम है। यानी इतनी ज़्यादा चली हुई गाड़ी की बैटरी भी लगभग उतनी ही रेंज दे रही है जितनी नई गाड़ी देती थी! यह किसी करिश्मे से कम नहीं है और सीधे तौर पर बताता है कि आधुनिक EV बैटरियां कितनी भरोसेमंद हो गई हैं।
तो अगली बार जब कोई आपसे कहे कि EV की बैटरी जल्दी ख़राब हो जाती है, तो उसे ये नई रिसर्च के आंकड़े और Tesla का ये रियल-वर्ल्ड उदाहरण ज़रूर बताइएगा। इलेक्ट्रिक गाड़ियों का भविष्य उज्ज्वल है, और उनकी बैटरियाँ इस भविष्य को और मज़बूत बना रही हैं।





































