मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में मौजूद एशिया की सबसे बड़ी नवीन गुड़ मंडी। यूं तो यहां की हवा में हमेशा गुड़ की मीठी सौंधी खुशबू घुली रहती है, लेकिन बीते मंगलवार की रात यहां के बाजार में एक अलग ही गरमाहट थी। ये गरमाहट किसी नए गुड़ की आवक की नहीं, बल्कि 'दि गुड़ खांडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन' के द्विवार्षिक चुनाव के नतीजों की थी। और जब देर रात करीब 11 बजे परिणाम सामने आए, तो सिर्फ मीठापन नहीं, एकतरफा जीत का कड़वा सच भी कई लोगों को चखना पड़ा।
इस चुनाव में एकतरफा 'क्लीन स्वीप' हुआ है। लंबे समय से मंडी के बेताज बादशाह कहे जाने वाले संजय मित्तल के गुट ने विरोधी खेमे का ऐसा सफाया किया कि देखने वाले भी दांतों तले उंगली दबा गए।
पूरे 31 सदस्य पदों पर संजय मित्तल गुट ने अपना कब्जा जमा लिया। यानी, मंडी की राजनीति में उनका सिक्का पहले भी चलता था, अब तो वो ठप्पा बन गया है।
इस बार चुनाव की खास बात ये थी कि पहली बार बीजेपी के एक नेता और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े सचिन सिंघल चुनावी मैदान में उतरे थे। कहा जा रहा था कि इस बार टक्कर कांटे की होगी, लेकिन नतीजों ने सबको चौंका दिया।
सचिन सिंघल को महज 28 वोट मिले और उनके समर्थक पैनल का हाल तो और भी बुरा रहा। खरीदार वर्ग से उनके खास समर्थक रिंकल बंसल को भी सिर्फ 30 वोट ही मिल पाए।
ये हार उनके लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है।
मुजफ्फरनगर नवीन गुड़ मंडी चुनाव: क्या थे जीत-हार के समीकरण?
इस चुनाव में कुल 252 सदस्यों में से 241 व्यापारियों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। मतदान के बाद जब वोटों की गिनती शुरू हुई, तो धीरे-धीरे संजय मित्तल गुट की बढ़त साफ होने लगी।
देखते ही देखते ये बढ़त इतनी बड़ी हो गई कि विरोधी पैनल के पास संभलने का कोई मौका ही नहीं बचा। मुजफ्फरनगर की इस मंडी में संजय मित्तल का लगातार 18वीं बार अध्यक्ष चुना जाना, ये कोई छोटी बात नहीं है।
ये दिखाता है कि व्यापारियों के बीच उनकी जड़ें कितनी गहरी हैं और उनका विश्वास कितना मजबूत।
सवाल उठता है कि ऐसी एकतरफा जीत के पीछे वजह क्या रही? खबरों के मुताबिक, इस चुनाव में मंडी की साख, व्यापारियों के हित और सबसे बढ़कर, 'झूठी शिकायतों के कारण खराब होती कारोबारी छवि' जैसे मुद्दे बेहद अहम रहे। व्यापारियों को लगा कि संजय मित्तल ही इन मुद्दों पर उनका नेतृत्व कर सकते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान निकाल सकते हैं।
जब कारोबार की बात आती है, तो व्यापारी सुरक्षा और भरोसे को सबसे ऊपर रखते हैं। मित्तल गुट इन मुद्दों पर व्यापारियों का भरोसा जीतने में कामयाब रहा, जबकि विरोधी खेमा शायद इस विश्वास को जगा नहीं पाया।
कौन-कौन बना मंडी समिति का नया सदस्य?
इस चुनाव में बिकवाल (बेचने वाले) और खरीददार (खरीदने वाले) दोनों ही वर्गों से सदस्य चुने गए। इन 31 सदस्यों में से ही आगे चलकर अध्यक्ष, महामंत्री और अन्य पदाधिकारियों का चुनाव होगा।
ये चुने हुए सदस्य ही अगले दो साल तक मंडी के कामकाज और व्यापारियों के हितों का ध्यान रखेंगे।
- बिकवाल वर्ग से निर्वाचित सदस्य: अंकित गर्ग, अरविंद गोयल, आशीष बंसल, देवेंद्र कुमार, निकेत गोयल, नितिन सिंघल, नितिन संगल, नवीन जैन, प्रदीप कुमार, रविंद्र कुमार, सचिन मोहन गोयल, सुनील तायल, श्याम सिंह सैनी, विकास गुप्ता और विवेक गर्ग।
- खरीददार वर्ग से निर्वाचित सदस्य: संजय मित्तल, अमित जैन, अनुज कुमार सिंघल, हरिशंकर तायल, मुकेश जैन, मनोज कुमार, राजेश गोयल, राजेंद्र सिंघल, शुभम बंसल, श्याम सुंदर बेडिया, सुरेंद्र कुमार बंसल, संदीप गुप्ता, संजीव गोयल, विजय कुमार, विजय गुप्ता और विशाल कालरा।
जीत के बाद संजय मित्तल का बयान और आगे की राह
लगातार 18वीं बार अध्यक्ष चुने जाने के बाद संजय मित्तल ने सभी व्यापारियों का दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपनी जीत को 'पूरे व्यापारी समाज के विश्वास की जीत' बताया।
मित्तल ने भरोसा दिलाया कि वह आगे भी संगठन को मजबूत करने और व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम करते रहेंगे। इस शानदार जीत ने एक बार फिर मुजफ्फरनगर की नवीन गुड़ मंडी में संजय मित्तल की बादशाहत कायम कर दी है और अब देखना होगा कि अगले दो साल में मंडी के विकास और व्यापारियों की समस्याओं को लेकर क्या नई पहल होती है।


