चंडीगढ़: हरियाणा के चिड़ियाघरों में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। अब आप रोहतक के चिड़ियाघर में दरियाई घोड़ों को अठखेलियां करते और सफेद बाघों को दहाड़ते हुए देख पाएंगे। जी हां, ये कोई कल्पना नहीं, बल्कि हरियाणा सरकार की वन्यजीव संरक्षण और चिड़ियाघरों को आधुनिक बनाने की नई पहल का हिस्सा है। प्रदेश के चिड़ियाघर अब सिर्फ देखने भर की जगह नहीं रहेंगे, बल्कि वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आशियाना और लोगों के लिए शिक्षा व मनोरंजन का केंद्र बनेंगे।
सरकार ने इस दिशा में कमर कस ली है और चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के तीन प्रमुख चिड़ियाघरों को अपग्रेड करने का फैसला किया है। इनमें रोहतक का चिड़ियाघर सबसे आगे है, जहाँ नए मेहमानों के रूप में दरियाई घोड़े और सफेद बाघ लाए जाएंगे।
यह खबर उन वन्यजीव प्रेमियों के लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं है, जो लंबे समय से हरियाणा के चिड़ियाघरों में नई जान फूंके जाने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन सिर्फ रोहतक ही नहीं, भिवानी और कुरुक्षेत्र के पिपली चिड़ियाघरों के लिए भी बड़े प्लान तैयार हैं।
रोहतक का बदलता रूप और नए मेहमान
रोहतक का चिड़ियाघर, जिसे अक्सर इसके सीमित संग्रह के लिए जाना जाता था, अब पूरी तरह से नया रूप लेने को तैयार है। वन्यजीव विभाग के अधिकारियों की मानें तो यहाँ दरियाई घोड़े और सफेद बाघ लाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है।
इन प्रजातियों को शामिल करने से चिड़ियाघर की लोकप्रियता बढ़ना तय है। एक अधिकारी ने बताया, "रोहतक जू में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है।
हमारा लक्ष्य इसे राष्ट्रीय स्तर के चिड़ियाघरों की कतार में लाना है, जहाँ पर्यटक और वन्यजीव दोनों को बेहतर अनुभव मिल सके।"
दरअसल, इन जीवों को लाने के पीछे सिर्फ आकर्षण बढ़ाना ही मकसद नहीं है, बल्कि इससे जैव विविधता के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। सफेद बाघ और दरियाई घोड़े दोनों ही अपनी प्राकृतिक आवासों में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
चिड़ियाघर इनके लिए एक सुरक्षित प्रजनन केंद्र के रूप में भी काम कर सकते हैं, जिससे इनकी आबादी को बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, बच्चों और बड़ों को इन अद्भुत जीवों के बारे में करीब से जानने और समझने का मौका मिलेगा।
भिवानी और पिपली को भी मिलेगा नया 'जीवन'
सिर्फ रोहतक ही नहीं, राज्य की दीर्घकालिक वन्यजीव विकास योजना में भिवानी स्थित चौधरी सुरेंद्र सिंह मिनी जू को भी शामिल किया गया है। यह चिड़ियाघर फिलहाल एक मिनी जू के तौर पर संचालित हो रहा है, लेकिन सरकार की मंशा इसे अपग्रेड कर आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की है।
इसके लिए आधारभूत ढांचे और सुविधाओं के विस्तार की योजना बनाई गई है। यानी, जल्द ही भिवानी का यह मिनी जू भी अपने आगंतुकों को बेहतर और अधिक समृद्ध अनुभव प्रदान कर पाएगा।
उधर, कुरुक्षेत्र के पिपली चिड़ियाघर को लेकर भी बड़ी तैयारी चल रही है। इसे मिनी जू से मीडियम जू बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
यह एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि मीडियम जू के तौर पर इसे अधिक स्थान, अधिक प्रजातियों और बेहतर प्रबंधन सुविधाएं मिलेंगी। इसके लिए आवश्यक 'कलेक्शन प्लान' और 'मास्टर प्लान' तैयार कर सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA), नई दिल्ली को मंजूरी के लिए भेज दिए गए हैं।
CZA की मंजूरी के बाद ही इन योजनाओं को अमली जामा पहनाया जा सकेगा। यह मंजूरी वन्यजीव संरक्षण के राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए अत्यंत आवश्यक होती है।
अधिकारी क्या कहते हैं?
इस पूरी योजना के बारे में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन, डॉ. नवदीप सिंह ने जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह मुख्यमंत्री के सीधे निर्देशों पर हो रहा है। डॉ.
सिंह के मुताबिक, "मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के तीन चिड़ियाघरों को अपग्रेड किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि हरियाणा के चिड़ियाघर न केवल वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और आरामदायक घर बनें, बल्कि जनता के लिए शिक्षा और जागरूकता का भी एक महत्वपूर्ण जरिया बनें।
" यह बयान दर्शाता है कि सरकार वन्यजीव संरक्षण को गंभीरता से ले रही है और इसमें जनता की भागीदारी को भी सुनिश्चित करना चाहती है।
आधुनिक चिड़ियाघरों की अवधारणा सिर्फ जानवरों को पिंजरों में रखने तक सीमित नहीं है। अब इन्हें शिक्षा, अनुसंधान और संरक्षण के केंद्रों के रूप में देखा जाता है।
अपग्रेडेशन का मतलब सिर्फ नए जानवर लाना नहीं, बल्कि उनके आवासों को प्राकृतिक परिवेश के करीब बनाना, चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर करना, और आगंतुकों के लिए इंटरैक्टिव और सीखने योग्य अनुभव प्रदान करना भी है। इसमें वन्यजीवों के स्वास्थ्य और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
आगे क्या?
सेंट्रल जू अथॉरिटी से मंजूरी मिलने के बाद इन योजनाओं पर तेजी से काम शुरू हो जाएगा। यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी, जिसमें निर्माण, नए जीवों का अधिग्रहण, स्टाफ प्रशिक्षण और वन्यजीव आवासों का विकास शामिल है।
यह हरियाणा सरकार की एक बड़ी पहल है, जो राज्य में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में हरियाणा के चिड़ियाघर सचमुच में जीवंत और रोमांचक अनुभव प्रदान करने वाले स्थान बन जाएंगे, जहाँ आप प्रकृति और वन्यजीवों की अनमोल दुनिया को करीब से महसूस कर पाएंगे।

