खगड़िया: बिहार के खगड़िया शहर में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे जिले में सियासी पारा तो गर्मा ही दिया है, साथ ही आम लोगों की भावनाओं को भी गहरे तक झकझोर दिया है। बात दरअसल ये है कि शहर के जेएनकेटी विद्यालय मैदान के ठीक बगल में, एक ऐसी जगह जहां लोग आमतौर पर लघुशंका या शौच के लिए जाते हैं, वहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर वाले झंडे बड़ी संख्या में बिखरे पड़े मिले। ये मंजर देखने वालों के लिए सिर्फ एक खबर नहीं थी, बल्कि राष्ट्रपिता का सीधा अपमान था, जिसे देख हर कोई गुस्से से लाल हो गया। यह घटना सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैलने लगी और कुछ ही देर में इस इलाके में भारी भीड़ जुट गई, हर कोई स्तब्ध और आक्रोशित था।
ये झंडे ऐसे खुले और अपमानजनक स्थान पर पड़े थे कि कोई भी इन्हें देखकर आसानी से समझ सकता था कि इन्हें जानबूझकर फेंका गया था। जिस जगह की बात हो रही है, वो सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल होने वाली एक ऐसी जगह है, जहां साफ-सफाई का अक्सर अभाव रहता है और लोग बेफिक्री से इसका इस्तेमाल करते हैं।
ऐसे पवित्र प्रतीक, जिनसे देश का गौरव जुड़ा है, उन्हें इस तरह से गंदगी और उपेक्षा के बीच छोड़ देना किसी भी सूरत में बर्दाश्त के बाहर था। लोगों ने तुरंत प्रशासन से इस मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग उठानी शुरू कर दी।
महात्मा गांधी का अपमान; लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने की कार्रवाई की मांग
इस घटना की जानकारी मिलते ही लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के खगड़िया जिलाध्यक्ष मनीष कुमार सिंह हरकत में आ गए। उन्होंने तुरंत टाउन थाना का रुख किया और इस पूरे मामले पर एक लिखित आवेदन दिया।
उनके आवेदन में साफ तौर पर कहा गया था कि जेएनकेटी विद्यालय मैदान के पास जिस जगह पर ये झंडे मिले हैं, वो एक ऐसी जगह है जहां लोग मलमूत्र त्याग करते हैं। उन्होंने इसे सीधे तौर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान करार दिया, जिससे न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं की, बल्कि आम जनता की भी भावनाएं बुरी तरह आहत हुई हैं।
मनीष कुमार सिंह ने अपने आवेदन में एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि जो झंडे वहां से बरामद हुए हैं, उन पर "जन सुराज पार्टी" का नाम साफ-साफ अंकित है।
इसी आधार पर उन्होंने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर और खगड़िया जिलाध्यक्ष गजेंद्र निषाद के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, ये आरोप कितने पुख्ता हैं और इनकी सत्यता क्या है, इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। मनीष कुमार सिंह ने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का अपमान है और दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों में गहरा रोष: सत्य और अहिंसा के प्रतीक का तिरस्कार
जैसे ही ये खबर इलाके में फैली, मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक जमा हो गए। लोगों का गुस्सा साफ दिख रहा था।
उन्होंने एक सुर में इस घटना की कड़ी निंदा की। मौके पर मौजूद कई नागरिकों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि महात्मा गांधी सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि देश के सम्मान, सत्य और अहिंसा के प्रतीक हैं।
उन्होंने भारत को आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई और उनके आदर्श आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करते हैं। ऐसे में उनकी तस्वीर वाले झंडों का इस तरह अपमानजनक स्थान पर मिलना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और यह दिखाता है कि कुछ लोग राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति कितनी असंवेदनशीलता रखते हैं।
एक स्थानीय बुजुर्ग ने बताया, "गांधीजी ने हमें अहिंसा का पाठ पढ़ाया, उन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनकी तस्वीर वाले झंडों को इस तरह से कूड़े-कचरे के बीच पड़ा देखना दिल तोड़ने वाला है।
यह किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।" लोगों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस घटना के पीछे के असली दोषियों की पहचान की जाए और उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी ओछी हरकत करने की हिम्मत न कर सके।
उनका कहना था कि ये सिर्फ एक झंडे का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव का मामला है।
टाउन थाना की जांच जारी: दोषियों पर होगी विधिसम्मत कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए टाउन थाना अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि उन्हें लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के जिलाध्यक्ष मनीष कुमार सिंह से इस संबंध में एक लिखित आवेदन प्राप्त हुआ है। उन्होंने आश्वस्त किया कि पुलिस इस आवेदन के आधार पर पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है।
राकेश कुमार गुप्ता ने आगे कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया है और आसपास के इलाकों से साक्ष्य जुटाने का प्रयास भी कर रही है।
थाना अध्यक्ष ने बताया कि पुलिस टीम आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन झंडों को वहां किसने और किस मकसद से फेंका था। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय महत्व से जुड़ा मामला है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
समाचार लिखे जाने तक इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई थी, लेकिन पुलिस ने यह साफ कर दिया है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई में कोई देरी नहीं होगी। सभी की निगाहें अब पुलिस जांच पर टिकी हैं कि आखिर इस अपमानजनक कृत्य के पीछे कौन है और इसके पीछे की मंशा क्या थी।

