संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में आजकल एक अधिकारी की कुर्सी पर लगे आरोपों का बवंडर थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां के जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) चंद्रभूषण के पर कतर दिए गए हैं। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने एक झटके में उनके सारे वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार छीन लिए हैं। सोचिए, जिस अधिकारी के हाथ में महिलाओं और बच्चों के कल्याण की बड़ी-बड़ी योजनाओं की बागडोर होती है, उसे अचानक चलता कर दिया गया। अब उनकी जगह डिप्टी कलेक्टर अवधेश कुमार को यह अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है और चंद्रभूषण को अगले आदेश तक मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के दफ्तर से संबद्ध कर दिया गया है। ये कोई छोटी बात नहीं है, इसके पीछे गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के बड़े आरोप हैं, जिसकी परतें एक-एक कर खुली हैं।
दरअसल, चंद्रभूषण के खिलाफ महिला कल्याण विभाग की तमाम योजनाओं, सेवा प्रदाता एजेंसियों के चयन और पैसों के लेन-देन में बड़ी गड़बड़ियों की शिकायतें आ रही थीं। ये शिकायतें हवा-हवाई नहीं थीं, बल्कि इतनी पुख्ता थीं कि जिलाधिकारी को खुद इन मामलों में जांच कमेटियां बैठानी पड़ीं।
और जब इन कमेटियों की रिपोर्ट सामने आई, तो चंद्रभूषण के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश सीधे शासन को भेज दी गई।
जांच कमेटियों ने अपनी पड़ताल में जो खुलासे किए, वो चौंकाने वाले थे। पता चला कि सेवा प्रदाता एजेंसी चुनने में सरकार के आदेशों और तय प्रक्रियाओं का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन किया गया।
कागजों में भी बड़ी कमियां पाई गईं और अलग-अलग योजनाओं में वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितताएं मिलीं। इन सब बातों ने ही अनुशासनिक कार्रवाई की जमीन तैयार की थी।
'मिशन बेटी बचाओ पढ़ाओ' और 'चाइल्ड हेल्पलाइन' में बड़ा खेल
अभी तो ये शुरुआत भर थी। कहानी में ट्विस्ट तब आया जब 15 जून 2026 (जी हां, तारीख ध्यान दीजिएगा) को जिलाधिकारी खुद जिला प्रोबेशन अधिकारी के दफ्तर का अचानक निरीक्षण करने पहुंच गए।
हैरानी की बात ये थी कि चंद्रभूषण बिना किसी पूर्व अनुमति के कार्यालय से नदारद मिले। दफ्तर के रिकॉर्ड और काम-काज की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई।
अब आप समझ सकते हैं कि जब कप्तान खुद निरीक्षण पर जाए और अधिकारी गायब मिले, तो क्या संदेश जाता है।
लेकिन असली बम तो तब फूटा, जब मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की जांच रिपोर्ट सामने आई। इस रिपोर्ट ने तो 'मिशन बेटी बचाओ पढ़ाओ' और 'चाइल्ड हेल्पलाइन' जैसी संवेदनशील योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और धांधली के आरोपों पर मुहर लगा दी।
सोचिए, जिन योजनाओं का मकसद समाज के सबसे कमजोर तबके यानी बेटियों और बच्चों की मदद करना है, उनमें ही भ्रष्टाचार का दीमक लग गया था।
CDO की रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले 'चाइल्ड हेल्पलाइन' के सरकारी बजट में 60 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया। ये रकम कोई छोटी-मोटी नहीं होती।
ये वही पैसा है जो बच्चों की सुरक्षा और मदद के लिए होता है, लेकिन कथित तौर पर उसकी बंदरबांट हो गई।
रिपोर्ट में चंद्रभूषण पर जालसाजी, जीईएम (GEM) पोर्टल के अनुबंधों में हेराफेरी कर फर्जी फर्मों को फायदा पहुंचाने, वित्तीय मामलों में जमकर धांधली करने और यहां तक कि डिप्टी कलेक्टर की जांच समिति की बातों को भी नजरअंदाज करने जैसे संगीन आरोप साबित हुए हैं। जीईएम पोर्टल, जिसके जरिए सरकारी खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है, उसी में सेंध लगाकर फर्जी कंपनियों को लाभ पहुंचाना अपने आप में एक गंभीर अपराध है।
CDO की सिफारिशें: गबन की वसूली और रोज़ाना जुर्माना
जब CDO ने सारे सबूत और अनियमितताओं का कच्चा-चिट्ठा जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल को सौंपा, तो उन्होंने साफ शब्दों में जिला प्रोबेशन अधिकारी से गबन की पूरी रकम वसूलने की सिफारिश की। सिर्फ इतना ही नहीं, CDO ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि चंद्रभूषण से 250 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना भी वसूला जाए और उन्हें उनके पद से हटा दिया जाए।
यह सिफारिशें कितनी कठोर हैं, इससे आप मामले की गंभीरता का अंदाजा लगा सकते हैं।
फिलहाल, ये जो कार्रवाई हुई है, वो एक अंतरिम प्रशासनिक कदम है। यानी अभी जिलाधिकारी ने अधिकारों पर रोक लगाई है और चंद्रभूषण को संबद्ध किया है।
इस पूरे मामले पर सक्षम प्राधिकारी का अंतिम फैसला आना अभी बाकी है। शासन स्तर पर भी इस विभागीय कार्रवाई पर विचार किया जाएगा और तब जाकर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
लेकिन संभल में इस मामले ने सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, और सबको इंतज़ार है कि इस पूरी कहानी का अगला पन्ना क्या खुलेगा।

