आजमगढ़: रात का गहरा सन्नाटा था। घड़ी की सुइयां एक बजाने वाली थीं और शायद सड़कों पर इक्का-दुक्का वाहन ही नज़र आ रहे थे। तभी अचानक, आजमगढ़ के बिलरियागंज थाना क्षेत्र का गुलवा गौरी नहर वाला रास्ता एक भीषण चीख से गूँज उठा। वो चीख किसी इंसान की नहीं, बल्कि लोहे के दो भारी-भरकम वाहनों के आपस में टकराने की थी, जिसने रात के अंधेरे को चीरते हुए कई जिंदगियों को दांव पर लगा दिया।
एक वैगनआर कार और एक पिकअप वाहन आमने-सामने से इतनी बुरी तरह भिड़े कि टक्कर की आवाज़ दूर तक सुनाई दी। जिसने भी सुनी, उसका दिल सहम गया।
यह सिर्फ दो गाड़ियों का टकराना नहीं था, बल्कि किस्मत का एक ऐसा क्रूर खेल था जिसमें पलक झपकते ही हंसती-खेलती जिंदगियां दर्द से कराह उठीं। टक्कर इतनी ज़बरदस्त थी कि दोनों ही वाहनों के परखच्चे उड़ गए।
वैगनआर कार तो पहचानना भी मुश्किल हो रहा था, जैसे किसी ने उसे लोहे का ढेर बना दिया हो।
राह चलते इक्का-दुक्का लोग जो वहां से गुज़र रहे थे, धमाके की आवाज़ सुनकर तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े। उन्होंने जो मंज़र देखा, वो किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने वाला था।
गाड़ी के अंदर फंसे लोग दर्द से तड़प रहे थे। चारों तरफ कांच के टुकड़े बिखरे थे, पेट्रोल की गंध हवा में घुल गई थी और लोहे के मुड़े-तुड़े हिस्सों में से धुंआ उठ रहा था।
बिना देर किए, स्थानीय लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना मदद का हाथ बढ़ाया। किसी ने फोन उठाकर पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी, तो कोई अपनी गाड़ी से ही घायलों को निकालने की कोशिश में जुट गया।
घटनास्थल पर रेस्क्यू ऑपरेशन
कुछ ही देर में पुलिस की टीमें और एंबुलेंस सायरन बजाती हुई घटनास्थल पर पहुंच गईं। अंधेरी रात में सर्चलाइट की रोशनी में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ।
पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से एक-एक कर घायलों को गाड़ी से बाहर निकाला जाने लगा। इस हादसे में कुल छह लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनकी हालत वाकई चिंताजनक बनी हुई थी।
उनके शरीर पर गहरी चोटें थीं और कुछ तो बेहोशी की हालत में थे। तत्काल उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई ताकि सही समय पर उनका इलाज शुरू हो सके।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों की टीम ने तुरंत घायलों का प्राथमिक उपचार शुरू किया। कुछ घायलों की स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उनकी गहन चिकित्सा चल रही है।
डॉक्टरों के मुताबिक, घायलों को सिर, हाथ, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। कुछ को फ्रैक्चर की आशंका है, तो कुछ अंदरूनी चोटों से भी जूझ रहे हैं।
परिवार वालों को जैसे ही इस दुर्घटना की सूचना मिली, वे सदमे में आ गए और फौरन अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। अस्पताल में एक अजीब सा माहौल था, जहां घायलों के ठीक होने की प्रार्थना की जा रही थी।
पुलिस की प्रारंभिक जांच और सड़क सुरक्षा का सबक
बिलरियागंज पुलिस ने घटना स्थल का मुआयना किया और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को क्रेन की मदद से सड़क से हटवाया ताकि यातायात सामान्य हो सके। पुलिस ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह तेज़ रफ़्तार और लापरवाही से ड्राइविंग का मामला लग रहा है।
दोनों वाहनों के चालकों की स्थिति और दुर्घटना के सही कारणों की जांच की जा रही है। चश्मदीदों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना की पूरी तस्वीर साफ हो सके।
पुलिस ने इस मामले में संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली है और आगे की कार्रवाई जारी है। यह हादसा एक बार फिर सड़कों पर सुरक्षा नियमों के पालन की ज़रूरत पर जोर देता है।
सड़क सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन अक्सर ऐसे ही भयावह हादसों का कारण बनता है। तेज़ रफ़्तार, नशे में गाड़ी चलाना या फिर नींद की झपकी, ये सब एक पल में कई जिंदगियों को तबाह कर सकते हैं।
आजमगढ़ में हुए इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर याद दिलाया है कि सड़कों पर चलते हुए हर व्यक्ति की जिम्मेदारी सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि दूसरों की सुरक्षा की भी होती है।
घायलों के परिजनों का कहना है कि वे इस घटना से सदमे में हैं। उनके लिए यह रात एक बुरे सपने जैसी थी, जब उन्हें अचानक अपने प्रियजनों के सड़क हादसे में घायल होने की खबर मिली।
फिलहाल, सभी की दुआएं घायलों के जल्द स्वस्थ होने के लिए हैं। पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सड़कों पर सतर्कता बरतें और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करें ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।
यह दुर्घटना एक सबक है उन सभी के लिए जो रफ्तार के जुनून में सुरक्षा को दरकिनार कर देते हैं। इस घटना ने पूरे इलाके में एक तरह की उदासी और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

