वाशिंगटन डीसी: अमेरिका और भारत, दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र, क्या वाकई दोस्ती की राह पर डाँवाडोल हो रहे हैं? एक धमाकेदार बयान में भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कुछ ऐसा ही दावा किया है, जिसने वॉशिंगटन से दिल्ली तक खलबली मचा दी है। खन्ना का कहना है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने भारत-अमेरिका रिश्तों को पिछले 30 साल के सबसे बुरे दौर में पहुंचा दिया है। ये बात उन्होंने तब कही, जब हर कोई भारत और अमेरिका की ‘पक्की दोस्ती’ की बातें करता है। खन्ना ने साफ शब्दों में कहा कि ट्रंप की व्यापार नीति, ईरान को लेकर उनके एकतरफा फैसले और सहयोगी देशों से बिना पूछे कदम उठाने की आदत ने अमेरिका की साख को बट्टा लगाया है, और सबसे ज्यादा नुकसान भरोसे को हुआ है।
रो खन्ना ने वॉशिंगटन में हुए यूएस-इंडिया स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में बोलते हुए इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।
खन्ना ने कहा कि जब अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की, तो उसने भारत, यूरोप या कनाडा जैसे अपने करीबी सहयोगियों से कोई सलाह नहीं ली। उनके मुताबिक, ऐसे एकतरफा फैसलों से सहयोगी देशों का भरोसा कमजोर होता है, जो किसी भी मजबूत रिश्ते की नींव होता है।
ट्रंप की नीतियों ने संबंधों को बिगाड़ा?
खन्ना यहीं नहीं रुके, उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को भी गलत ठहराया। उनकी बातों में एक ऐसा वाकया था, जो इस नुकसान की गहराई को दिखाता है।
उन्होंने बताया कि अपनी हालिया चीन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक भारतीय राजदूत से हुई। खन्ना के मुताबिक, उस राजदूत ने उनसे साफ-साफ कहा, ‘आपके राष्ट्रपति (ट्रंप) की वजह से भरोसे की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई है।
’ यह बयान रो खन्ना के लिए इतना मायने रखता था कि उन्होंने इसे खुले मंच पर रखा, यह दिखाने के लिए कि उनकी बात सिर्फ हवाई नहीं है, बल्कि जमीन पर महसूस की जा रही है।
सांसद खन्ना ने यह भी जोड़ा कि अगर ट्रंप की नीतियों से हुए इस नुकसान को स्वीकार नहीं किया गया, तो यह सच से मुंह मोड़ने जैसा होगा। उन्होंने ट्रंप को ‘लेम डक’ (ऐसा नेता जिसका कार्यकाल खत्म होने वाला हो और उसकी शक्तियाँ कम हो रही हों) राष्ट्रपति बताया और भविष्यवाणी की कि डेमोक्रेटिक पार्टी अगले मिड-टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करेगी और 2028 का राष्ट्रपति चुनाव भी जीतेगी।
खन्ना ने जोर देकर कहा कि नई पीढ़ी को सिर्फ अमेरिका के अंदर ही नहीं, बल्कि दुनिया के देशों के साथ भी अमेरिका के रिश्तों को फिर से मजबूत करना होगा। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी.
रूजवेल्ट का उदाहरण दिया, जो दुनिया के देशों के साथ मिलकर चलने में विश्वास रखते थे और यहां तक कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी समर्थन करते थे।
लोकतंत्रों की दोस्ती और व्यापारिक समझौता
एक तरफ जहां रो खन्ना ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक अलग ही तस्वीर पेश की। इसी कार्यक्रम में बोलते हुए गोर ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहता है और दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को पूरी तरह स्वीकार करता है।
गोर के अनुसार, दोनों देश एक और बड़े व्यापार समझौते को पूरा करने के बहुत करीब हैं, और प्रस्तावित व्यापार समझौता अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। यह खबर उन लोगों के लिए राहत लेकर आई जो भारत-अमेरिका संबंधों को आर्थिक दृष्टिकोण से देखते हैं।
गोर ने एक हफ्ते पहले की अपनी नई दिल्ली यात्रा का भी जिक्र किया, जहां उनकी मुलाकात एक भारतीय मंत्री से हुई थी। उस मंत्री के शब्दों को कोट करते हुए गोर ने कहा, ‘खबरों में चाहे जो दिखे, 50 साल बाद भी भारत और अमेरिका दोस्त रहेंगे।
’ यह बयान दोनों देशों के बीच की गहरी, रणनीतिक दोस्ती को रेखांकित करता है। गोर ने यह भी दोहराया कि अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है और भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और यह पहचान दोनों को एक मजबूत बंधन में बांधती है।
मोदी-ट्रंप की दोस्ती का अनोखा किस्सा
रिश्तों की बात हो और नेताओं की केमिस्ट्री की बात न हो, ऐसा कैसे हो सकता है? सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती का एक मजेदार किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले की बात है, ट्रंप सुबह 6 बजे (भारतीय समयानुसार) ही पीएम मोदी को फोन करना चाहते थे।
गोर उस समय मियामी में एक UFC इवेंट के दौरान ट्रंप के साथ बैकस्टेज बैठे थे। तभी ट्रंप ने अचानक कहा, ‘चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं।
’
जब गोर ने उन्हें याद दिलाया कि भारत में उस वक्त सुबह के 6 बजे हैं, तो ट्रंप ने अपने अंदाज में जवाब दिया, ‘वो उठे होंगे। वो मेरी तरह हैं, सोते नहीं।
’ हालांकि, ट्रंप को कुछ देर बाद मंच पर जाना था, इसलिए दोनों नेताओं की बातचीत अगले दिन के लिए तय की गई। गोर ने इस घटना को सुनाते हुए कहा कि यह दिखाता है कि ट्रंप, प्रधानमंत्री मोदी को अपना बेहद करीबी दोस्त मानते हैं।
यह किस्सा जहां एक तरफ दोनों नेताओं के बीच की पर्सनल केमिस्ट्री को दिखाता है, वहीं दूसरी तरफ उन दावों पर भी रोशनी डालता है जो भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर किए जा रहे हैं।

