पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया जिले से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां अपनी मेहनत और लगन से परिवार का पेट पालने वाले एक किसान ने नदी में डूबकर अपनी जान गंवा दी। हर दिन की तरह वो अपनी मक्के की लहलहाती फसल की देखरेख करके लौट रहे थे, लेकिन किसे पता था कि ये उनका आखिरी सफर साबित होगा। ये कहानी सिर्फ एक मौत की नहीं, बल्कि एक परिवार के इकलौते सहारे के अचानक छिन जाने की है, जिसने पूरे गांव को सकते में डाल दिया है।
मामला पूर्णिया के सरसी थाना क्षेत्र का है, जहां मंजू मरांडी (उम्र 46 साल) नाम के मेहनती किसान की मौत ने उनके परिवार और पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। मंजू मरांडी रोज की तरह सुबह-सुबह अपने खेत की ओर निकल पड़ते थे।
उनका खेत नदी के दूसरी ओर था, जिसके लिए उन्हें हर दिन नदी पार करनी पड़ती थी। ये उनका रोजमर्रा का संघर्ष था, जिसे वो खुशी-खुशी निभाते थे क्योंकि यही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य जरिया था।
हर दिन की तरह, उस दिन भी मंजू मरांडी अपने खेत से लौटे। दिनभर खेतों में काम करने और मकई की फसल को देखने के बाद, वो खेत से लगे एक तालाब या नदी के किनारे गए, ताकि हाथ-पैर धोकर घर लौट सकें।
ये एक सामान्य सी बात थी, जो हर ग्रामीण किसान अपने खेत से लौटते वक्त करता है। लेकिन दुर्भाग्य को कुछ और ही मंजूर था।
मंजू मरांडी जब पैर-हाथ धोने के लिए पानी के करीब पहुंचे, तभी उनका पैर अचानक फिसला और वो गहरे पानी में जा समाए। ये सब इतनी तेजी से हुआ कि उन्हें संभलने का मौका भी नहीं मिला।
अनहोनी की आशंका और तलाश
मंजू मरांडी के भतीजे बबलू मरांडी ने पूरी घटना के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि चाचा अक्सर खेत से लौटने में थोड़ा देर करते थे, लेकिन उस दिन जब काफी देर हो गई और सूरज ढलने लगा, तब परिवार को चिंता सताने लगी।
पहले तो सोचा कि खेत में कुछ ज्यादा काम होगा, इसलिए देर हो गई होगी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया और मंजू मरांडी घर नहीं पहुंचे, परिवार वालों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती चली गईं।
अनहोनी की आशंका ने उनके दिलों में डर पैदा कर दिया।
परिवार ने गांव के कुछ लोगों को इकट्ठा किया और मिलकर मंजू मरांडी की तलाश शुरू की। गांव वाले भी उनके स्वभाव से परिचित थे और जानते थे कि वो बिना किसी ठोस वजह के इतनी देर तक घर से बाहर नहीं रहते।
लिहाजा, सभी ने मिलकर नदी किनारे और खेतों के आस-पास खोजबीन शुरू की। घंटों की मशक्कत और बेचैनी के बाद, आखिरकार उनका शव नदी से बरामद किया गया।
मंजू मरांडी की मौत की खबर सुनते ही पूरे गांव में मातम छा गया। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि हंसमुख और मेहनती मंजू अब इस दुनिया में नहीं रहे।
ग्रामीणों में शोक का माहौल और पुलिस की कार्रवाई
गांव के लोगों ने बताया कि मंजू मरांडी वाकई एक मेहनती किसान थे। उनकी खेती-किसानी ही उनके परिवार की रोजी-रोटी का इकलौता सहारा थी।
उनकी अचानक और असमय मौत से पूरे गांव में शोक का माहौल है। गांव वालों का कहना था कि मंजू जैसा सीधा-सादा और मेहनती आदमी मिलना मुश्किल था, जिसने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा।
उनके जाने से न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे गांव को एक बड़ा नुकसान हुआ है।
इस दर्दनाक हादसे की सूचना मिलते ही सरसी थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और मामले की जांच शुरू की।
शुरुआती जांच के बाद, पुलिस ने मंजू मरांडी के शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, पुलिस ने शव को उनके परिजनों को सौंप दिया, ताकि वो उनका अंतिम संस्कार कर सकें।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में नदी-तालाबों के किनारे सुरक्षा के इंतजामों की कमी और ऐसी दुर्घटनाओं की संभावनाओं को उजागर कर दिया है।


