पूर्णिया: एक तरफ नए मेहमान के आने की खुशी थी और दूसरी तरफ एक परिवार का सबकुछ उजड़ गया। बिहार के पूर्णिया जिले के लाइन बाजार स्थित मंजू क्लीनिक में एक प्रसूता की मौत के बाद सोमवार को भारी हंगामा हुआ। जिस घर में किलकारियां गूंजनी चाहिए थीं, वहां अब चीख-पुकार है। मृतका की पहचान 21 वर्षीय गुड़िया कुमारी के रूप में हुई है, जिसकी शादी को अभी सिर्फ एक साल हुआ था और यह उसका पहला बच्चा था।
गुड़िया के पति राहुल कुमार का आरोप है कि डॉक्टरों की एक छोटी सी गलती ने उनकी दुनिया उजाड़ दी। राहुल के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों से प्रसूता की एक मुख्य नस कट गई, जिससे उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी।
परिजनों का दर्द और गुस्सा तब और बढ़ गया जब उन्होंने आरोप लगाया कि मौत के बाद डॉक्टर और क्लीनिक का पूरा स्टाफ मुख्य गेट पर ताला जड़कर वहां से रफूचक्कर हो गया।
मृतका की मां किरण देवी की आंखों में आंसू थे जब उन्होंने बताया कि डॉक्टर निहारिका रानी ने भरोसा दिया था कि ऑपरेशन सामान्य है और बेटी सुरक्षित है। लेकिन रात होते-होते हालात बदल गए।
मां का आरोप है कि जब बेटी दर्द से तड़प रही थी, तब कोई उसकी सुध लेने नहीं आया। इसी बीच गुड़िया की मौत हो गई और परिवार के हाथ सिर्फ एक नवजात बच्चा और उम्र भर का गम लगा।
पुलिस की कार्रवाई और परिजनों का आरोप
जैसे ही मौत की खबर फैली, क्लीनिक के बाहर भीड़ जमा हो गई और शोर-शराबा शुरू हो गया। हंगामे की सूचना मिलते ही फणीश्वरनाथ रेणु टीओपी प्रभारी राजनंदनी सिन्हा और सहायक खजांची थानाध्यक्ष पुरुषोत्तम कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद स्थिति को संभाला और शव को पोस्टमार्टम के लिए पूर्णिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा। पुलिस का कहना है कि परिजनों से लिखित आवेदन मिल चुका है और प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
डॉक्टर की सफाई: बीमारी बताया मौत का कारण
इस पूरे मामले में क्लीनिक के संचालक डॉ. निखिल आर्य ने नस कटने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
डॉक्टर का कहना है कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि एक मेडिकल कंडीशन थी। उनके मुताबिक, गुड़िया की मौत 'प्री-एक्लेम्पसिया' (Pre-eclampsia) नाम की बीमारी के कारण हुई है।
डॉक्टर ने बताया कि जब मरीज 26 जून को आई थी, तब जांच में पानी की कमी पाई गई थी और 28 जून को भर्ती के समय उनका ब्लड प्रेशर काफी ज्यादा था, जिसके लिए दवाएं दी गई थीं। डॉक्टर का दावा है कि दोपहर 3:18 बजे एनेस्थेसिया विशेषज्ञ की मौजूदगी में सुरक्षित तरीके से ऑपरेशन किया गया और बच्चे का जन्म हुआ।
अवैध क्लीनिकों पर उठे सवाल
इस घटना ने शहर के लाइन बाजार में चल रहे निजी और कथित अवैध क्लीनिकों की पोल खोल दी है। मौके पर पहुंचे समाजसेवी जितेंद्र यादव, पूर्व वार्ड पार्षद पवन राय और कांग्रेस नेता रिंकू यादव ने जिला प्रशासन के सामने गंभीर सवाल उठाए।
जितेंद्र यादव ने यहां तक कह दिया कि मंजू क्लीनिक की हालत किसी रैन बसेरे से भी बदतर है और ऐसी जगहों पर मरीजों की जान जोखिम में डाली जा रही है। उन्होंने मांग की है कि इलाके के सभी क्लीनिकों की उच्चस्तरीय जांच की जाए।
वहीं, सिविल सर्जन डॉ. पी.
के. कनौजिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि निजी क्लीनिक में मरीज की मौत की सूचना मिली है और इसकी पूरी जांच कराई जाएगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंजू क्लीनिक निबंधित (Registered) है या नहीं, इसकी सटीक जानकारी ऑफिस खुलने के बाद ही मिल पाएगी। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस बात की जांच कर रहे हैं कि मौत की असली वजह डॉक्टर की लापरवाही थी या कोई बीमारी।

