पूर्णिया: सोचिए, एक क्लासरूम है जहाँ ब्लैकबोर्ड और चॉक के पारंपरिक तरीके के बजाय कुछ ऐसा हो रहा है जिसे देखकर बच्चे भी हैरान हों और सीखने के लिए उतावले रहें। अक्सर हम सुनते हैं कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है, लेकिन पूर्णिया के कुछ शिक्षकों ने इस बदलाव को कागजों से निकालकर क्लासरूम की हकीकत बना दिया है। इन्हीं ऐसे ही 'आउट ऑफ द बॉक्स' सोचने वाले शिक्षकों के सम्मान में रविवार को डायट श्रीनगर में एक खास आयोजन हुआ, जहाँ उन शिक्षकों की मेहनत को सराहा गया जिन्होंने पढ़ाने के पुराने ढर्रे को तोड़कर कुछ नया किया है।
इस पूरे कार्यक्रम का आयोजन 'टीबीटी हिस्ट्री मेकर' मंच के बैनर तले किया गया था। इस समारोह की सबसे बड़ी बात यह थी कि यहाँ कोई वीआईपी प्रोटोकॉल मुख्य नहीं था, बल्कि केंद्र में वे 101 शिक्षक थे जिन्होंने अपनी रचनात्मकता से शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार (Innovation) किया है।
पूर्णिया प्रमंडल के अलग-अलग इलाकों से आए इन शिक्षकों ने यह साबित किया कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो सीमित संसाधनों में भी बच्चों को सिखाने के बेहतरीन और नए तरीके खोजे जा सकते हैं।
सम्मान समारोह के दौरान माहौल काफी उत्साहजनक था। जब एक-एक करके उन 101 उत्कृष्ट शिक्षकों को मंच पर बुलाया गया, तो उनकी खुशी साफ झलक रही थी।
उन्हें केवल प्रशस्ति-पत्र और स्मृति-चिह्न ही नहीं दिए गए, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक-एक पौधा भी भेंट किया गया। यह इस बात का प्रतीक था कि जैसे एक पौधा बढ़कर पेड़ बनता है, वैसे ही इन शिक्षकों के छोटे-छोटे नवाचार बच्चों के भविष्य को एक नई दिशा देंगे।
नवाचार और सम्मान की पहल
कार्यक्रम में केवल सम्मानित शिक्षक ही नहीं, बल्कि कई विशिष्ट अतिथि भी शामिल हुए। अतिथियों का स्वागत भी पारंपरिक तरीके से शॉल, पुष्पगुच्छ, स्मृति-चिह्न और पौधों के साथ किया गया।
इस पूरे आयोजन का मकसद केवल सर्टिफिकेट बांटना नहीं था, बल्कि उन शिक्षकों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म देना था जहाँ वे एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकें और यह महसूस करें कि उनकी मेहनत को पहचाना जा रहा है।
टीबीटी हिस्ट्री मेकर मंच के खोजकर्ता डॉ. कुमार गौरव ने इस मौके पर अपनी बात रखते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन शिक्षा जगत में एक मील का पत्थर साबित होंगे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जब एक शिक्षक को उसके नए प्रयोगों के लिए सम्मान मिलता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए और ज्यादा ऊर्जा के साथ काम करता है। यह सम्मान आने वाले समय में अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा बनेगा कि वे भी अपनी टीचिंग स्टाइल में बदलाव लाएं।
कार्यक्रम के दौरान उन तरीकों पर भी चर्चा हुई जिनसे बच्चों की पढ़ाई को और अधिक रोचक बनाया जा सकता है। शिक्षकों का मानना था कि जब पढ़ाई बोझ नहीं बल्कि एक अनुभव बन जाती है, तो बच्चे खुद-ब-खुद सीखने की ओर आकर्षित होते हैं।
समारोह का अंत राष्ट्रगान के साथ हुआ, लेकिन वहां मौजूद शिक्षकों के चेहरों की मुस्कान और उनका जोश यह बता रहा था कि अब क्लासरूम में कुछ नया और बेहतर देखने को मिलेगा।


