टोंक: राजस्थान के टोंक जिले का एक नौजवान, जिसका नाम जय मूंदड़ा है, उसने हाल ही में पूरे क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कहानी कुछ ऐसी है कि एक लड़का जो कभी भारतीय टीम के लिए नेट बॉलर था, अब वही लड़का आयरलैंड की जर्सी पहनकर टीम इंडिया के पसीने छुड़ा रहा है। आयरलैंड और भारत के बीच हुई दो मैचों की सीरीज में जय ने जो कमाल किया है, वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। 27 साल के इस युवा खिलाड़ी ने अपनी तेज रफ्तार और सटीक गेंदबाजी से कुल 5 विकेट झटके, और तो और, वो सीरीज में दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज भी रहे। बाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज को देखकर क्रिकेट पंडितों को ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज मिचेल स्टार्क की याद आ गई। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये टोंक का छोरा आयरलैंड कैसे पहुंचा और कैसे इतनी बड़ी टीम के लिए खेलने लगा? तो चलिए, आज हम आपको बताते हैं जय मूंदड़ा के ‘नेट बॉलर’ से ‘मैच विनर’ बनने तक का पूरा किस्सा।
जय की कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं, बल्कि सपनों और हौसले की कहानी है। उनका बचपन टोंक की गलियों में बीता, जहां उन्होंने पहले स्पिन गेंदबाजी का हाथ आजमाया।
लेकिन उनके पहले कोच इम्तियाज अली ने उनकी लंबी कद-काठी देखकर उन्हें सलाह दी कि अगर वो तेज गेंदबाजी करें तो ज्यादा दूर तक जा सकते हैं। इस एक सलाह ने जय की ज़िंदगी की दिशा ही बदल दी।
उन्होंने अपनी स्पिन को छोड़कर तेज गेंदबाजी पर हाथ आजमाया और धीरे-धीरे इसमें महारत हासिल करते चले गए। लेकिन उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कोरोना महामारी ने दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया और खेल की दुनिया ठहर सी गई।
कोरोना काल ने खोला आयरलैंड का रास्ता
साल था 2020 का, जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस की चपेट में थी। क्रिकेट के मैदान सूने पड़े थे और खेल लगभग थम सा गया था।
इसी दौरान जय ने अपनी बीटेक की पढ़ाई पूरी कर ली थी। उनके पिता चाहते थे कि बेटा पढ़ाई पर ज़्यादा ध्यान दे और अपने भविष्य को सुरक्षित करे।
इसीलिए उन्होंने जय को एमटेक करने की सलाह दी। पिता के कहने पर जय ने आयरलैंड में एडमिशन ले लिया और नए सपनों के साथ उस यूरोपीय देश की ओर कूच कर गए।
जय खुद बताते हैं कि पहले साल तो उनका पूरा ध्यान पढ़ाई पर ही था। उन्होंने तब कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन वो आयरलैंड की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनेंगे और भारत के खिलाफ ही मैदान पर उतरेंगे।
आयरलैंड पहुंचने के बाद भी क्रिकेट का जुनून जय को शांत नहीं बैठने दिया। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने डबलिन के लेनस्टर क्रिकेट क्लब को जॉइन किया।
यहीं से उनके क्रिकेट करियर को नई उड़ान मिली। उन्हें आयरिश सीनियर कप में खेलने का मौका मिला।
ये वो पल था जब जय को अपनी काबिलियत दिखाने का सुनहरा मौका मिला। और उन्होंने इसे हाथ से जाने नहीं दिया।
संजू सैमसन का विकेट और पिता की यादें
जय बताते हैं कि आयरिश सीनियर कप में उन्होंने अपने पहले ही मैच में भारतीय बल्लेबाज संजू सैमसन का विकेट लिया था। उस पल उन्हें अपने पिता की बहुत याद आई।
जय के पिता को लेकर अक्सर लोग गलतफहमी में रहते हैं कि वे जय के क्रिकेट खेलने के खिलाफ थे। लेकिन जय इस बात को सिरे से नकारते हैं।
वे कहते हैं, "पापा क्रिकेट के खिलाफ बिल्कुल नहीं थे। वो बस चाहते थे कि मेरा भविष्य सुरक्षित रहे, इसलिए उन्होंने मुझसे पहले पढ़ाई पूरी करने को कहा था।
" जय को इस बात का अफसोस हमेशा रहेगा कि उनके पिता आज इस दुनिया में नहीं हैं, और वो अपने बेटे को आयरलैंड की जर्सी में खेलते हुए और भारत के खिलाफ जलवा बिखेरते हुए नहीं देख पाए। यह एक ऐसा भावनात्मक पहलू है जो जय की कहानी को और भी मार्मिक बना देता है।
"भारत के लिए खेलने का सपना?"
हर भारतीय क्रिकेटर का सपना होता है कि वो एक दिन अपने देश के लिए खेले। जब जय से ये सवाल पूछा गया कि क्या उन्हें कभी लगा कि उन्हें भारत की ओर से खेलना चाहिए था, तो उन्होंने बहुत ही परिपक्व जवाब दिया।
जय ने कहा, "हर क्रिकेटर का सपना होता है कि वो बड़े स्तर पर खेले, लेकिन मैं इस बारे में ज्यादा नहीं सोचता। मुझे जहां मौका मिला है, मैं वहां अपना बेस्ट देना चाहता हूं।
फिलहाल मेरा पूरा फोकस आयरलैंड के लिए अच्छा प्रदर्शन करने पर है।" यह जवाब उनकी प्रतिबद्धता और व्यावसायिकता को दर्शाता है।
वे जानते हैं कि उन्हें जहां मौका मिला है, वहीं अपना 100% देना सबसे महत्वपूर्ण है।
नेट बॉलर से मैच विनर तक: जसप्रीत बुमराह की सलाह
जय के करियर का एक और दिलचस्प पड़ाव वो था, जब पिछली बार भारतीय टीम आयरलैंड दौरे पर आई थी। उस वक्त जय आयरलैंड टीम का हिस्सा नहीं थे, बल्कि भारतीय खिलाड़ियों को नेट में गेंदबाजी करा रहे थे।
यानी वो सिर्फ एक ‘नेट बॉलर’ थे। उसी दौरान उनकी मुलाकात भारतीय टीम के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह से हुई।
जय बताते हैं कि बुमराह ने उनसे सिर्फ एक बात कही थी, "जितना भी मौका मिले, पूरी तरह फोकस होकर खेलना।" यह एक छोटी सी सलाह थी, लेकिन जय के दिमाग में आज भी वो बात घर किए हुए है।
आज, जब जय आयरलैंड के लिए भारत के खिलाफ ही मैदान पर अपनी गेंदबाजी का जौहर दिखा रहे हैं, तो बुमराह की वो सलाह उनके लिए और भी मायने रखती है।
फिलहाल जय का सपना आईपीएल खेलने का भी है। उन्होंने साफ कहा कि हर क्रिकेटर आईपीएल खेलना चाहता है और अगर भविष्य में उन्हें मौका मिला तो वो जरूर खेलना चाहेंगे।
लेकिन जैसा कि उन्होंने पहले भी कहा, उनकी पहली प्राथमिकता आयरलैंड के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करना है। टोंक से निकला ये सितारा अब आयरलैंड के क्रिकेट जगत में चमक रहा है और पूरी दुनिया उसे पहचान रही है।
जय मूंदड़ा की कहानी हमें सिखाती है कि मौके कहीं भी मिल सकते हैं, बस ज़रूरत है अपनी लगन और मेहनत को बनाए रखने की। उनका सफर अभी जारी है और ये देखना दिलचस्प होगा कि ये खिलाड़ी आने वाले समय में और क्या-क्या कमाल दिखाता है।

