चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) का कैंपस, जहां सुबह-शाम छात्रों की चहल-पहल और गाड़ियों का हॉर्न बजना आम बात थी, अब वहां हर बुधवार को एक नया नजारा देखने को मिलेगा। सोचिए, एक बड़ा विश्वविद्यालय परिसर जहां आमतौर पर सैकड़ों गाड़ियां फर्राटा भरती हैं, और अचानक हफ्ते में एक दिन वो सब थम जाएं! चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी ने प्रदूषण पर लगाम कसने और तेल बचाने के लिए एक धांसू कदम उठाया है। अब हर बुधवार को यूनिवर्सिटी कैंपस ‘वाहन-मुक्त दिवस’ मनाएगा। यह फैसला सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि कैंपस को और हरा-भरा बनाने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने की एक बड़ी पहल है, जिसे ‘सेव पीयू कैंपेन’ का नाम दिया गया है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों से अपील की है कि वे बुधवार को अपने निजी वाहन लेकर कैंपस में न आएं। अब सवाल ये कि इतने बड़े कैंपस में बिना गाड़ी के काम कैसे चलेगा? इसी का जवाब है प्रशासन की मुस्तैदी।
बुधवार को कैंपस में पूरे दिन मुफ्त शटल बस सेवा उपलब्ध रहेगी, ताकि किसी को आने-जाने में कोई दिक्कत न हो। साथ ही, ई-रिक्शा भी रियायती दरों पर पूरे कैंपस में दौड़ते नजर आएंगे।
यह एक ऐसा बदलाव है जो न सिर्फ पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि कैंपस लाइफ में भी एक नया अनुभव जोड़ेगा।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
पंजाब यूनिवर्सिटी ने यह फैसला हवा में तीर चलाने जैसा नहीं लिया है, बल्कि इसके पीछे एक ठोस वजह है – प्रदूषण और लगातार बढ़ती ईंधन की खपत। आज के दौर में जहां शहरों में हवा की गुणवत्ता एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है, ऐसे में यूनिवर्सिटी जैसे बड़े संस्थान की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
‘सेव पीयू कैंपेन’ के तहत यह कोशिश है कि कार्बन फुटप्रिंट को कम किया जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ वातावरण तैयार किया जाए। यूनिवर्सिटी प्रशासन का मानना है कि इस पहल से न केवल प्रदूषण का स्तर घटेगा, बल्कि ईंधन की बचत भी होगी, जिसका सीधा फायदा देश और समाज को मिलेगा।
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रोफेसर वाई.पी.
वर्मा ने बताया कि इस संबंध में बाकायदा एक सर्कुलर यूनिवर्सिटी के वेब पोर्टल पर जारी कर दिया गया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि पहले से चल रहे ई-रिक्शा चालकों को बुधवार के दिन नियमित सेवा देने के लिए खास तौर पर निर्देश दिए गए हैं, ताकि छात्रों और कर्मचारियों को आने-जाने में जरा भी असुविधा न हो।
बुधवार को क्या होगा कैंपस का हाल?
बुधवार का दिन अब पंजाब यूनिवर्सिटी में आम दिनों जैसा नहीं होगा। जो लोग अपने दुपहिया या चौपहिया वाहन लेकर कैंपस में आते थे, उन्हें अब एक अलग व्यवस्था से गुजरना होगा।
निजी वाहनों को कैंपस के अंदर आने की अनुमति नहीं होगी, बल्कि उन्हें निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़ा करना होगा। इसके बाद, विभागों या प्रशासनिक भवनों तक पहुंचने के लिए शटल बसों या ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ेगा।
यह नियम सभी छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों पर लागू होगा। अगर किसी के पास पहले से कोई वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद है, तो उसे भी कैंपस के भीतर वाहन ले जाने की इजाजत नहीं मिलेगी।
यह एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें हर किसी की भागीदारी जरूरी है ताकि यह पहल कामयाब हो सके और कैंपस सचमुच प्रदूषण मुक्त बन पाए।
इतना बड़ा कैंपस, कैसे पहुंचेंगे छात्र?
पंजाब यूनिवर्सिटी का कैंपस कोई छोटा-मोटा इलाका नहीं है। सेक्टर-14 और सेक्टर-25 में फैला यह परिसर करीब 550 एकड़ में है।
इतने बड़े इलाके में पैदल चलना अपने आप में एक चुनौती है। यहीं पर शटल बसों और ई-रिक्शा की व्यवस्था का महत्व और भी बढ़ जाता है।
प्रशासन ने इस बात का खास ख्याल रखा है कि लोगों को परेशानी न हो। शटल बसें तय रूट पर चलेंगी और ई-रिक्शा भी रियायती दरों पर उपलब्ध होंगे।
इसके अलावा, एक सुझाव यह भी है कि हॉस्टलों के बाहर साइकिलें उपलब्ध कराई जाएं, ताकि छात्र कम दूरी के लिए उनका इस्तेमाल कर सकें। हालांकि, पहले खरीदी गई कई साइकिलें रखरखाव की कमी के चलते खराब हो चुकी हैं, जो एक छोटा सा अड़ंगा जरूर है।
उम्मीद है कि इस पर भी जल्द ही काम होगा।
ऑनलाइन होंगे कई काम, कम होगी बाहरी आवाजाही
प्रदूषण और ईंधन की खपत को कम करने के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी सिर्फ वाहन-मुक्त दिवस तक ही सीमित नहीं है। यूनिवर्सिटी ने कई प्रशासनिक गतिविधियों को भी ऑनलाइन करने का फैसला किया है।
अब रीजनल सेंटरों के साथ होने वाली बैठकें और छात्रों की काउंसलिंग भी ऑनलाइन ही आयोजित की जाएंगी। इसका सीधा मतलब है कि बाहरी आवाजाही कम होगी और अनावश्यक रूप से लगने वाले ईंधन की बचत होगी।
यह एक मल्टी-एंगल अप्रोच है, जहां हर संभव तरीके से पर्यावरण को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी से अपील की है कि वे हर बुधवार को निजी वाहन न लाएं और अगर संभव हो तो ‘कारपूलिंग’ का विकल्प अपनाएं।
यह सिर्फ एक यूनिवर्सिटी का फैसला नहीं, बल्कि एक बड़े और जिम्मेदार संस्थान की तरफ से भविष्य के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दूसरों को भी प्रेरित करेगा। यह पहल कैंपस को न केवल स्वच्छ और शांत बनाएगी, बल्कि एक नया उदाहरण भी पेश करेगी।

