पूर्वी मेदिनीपुर: सोमवार की देर रात जब बंगाल का हल्दिया शहर गहरी नींद में सोया हुआ था, तभी अचानक एक जोरदार धमाके ने सब कुछ हिलाकर रख दिया। रात के करीब पौने तीन बजे का वक्त था। पलक झपकते ही हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स की नैफ्था सप्लाई पाइपलाइन आग के गोले में तब्दील हो गई। ये आग इतनी भीषण थी कि देखते ही देखते आसपास के रिहायशी इलाकों को भी अपनी चपेट में ले लिया। मानो आग की लपटें अपना रास्ता बनाती हुई चिरंजीबपुर के घरों तक पहुंच गईं, जहां लोग अपने घरों में बेफिक्र सो रहे थे। इस भयानक हादसे में अब तक 15 लोग बुरी तरह झुलस चुके हैं, जिनमें से 2 की हालत इतनी नाजुक है कि डॉक्टर भी चिंतित हैं।
ये कोई मामूली आग नहीं थी। नैफ्था, जो पेट्रोल से भी ज्यादा ज्वलनशील होता है, जब बेकाबू हुआ तो पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
धमाके की आवाज़ दूर-दूर तक सुनी गई और आसमान में उठते धुएँ के गुबार ने रात के अँधेरे को और डरावना बना दिया। जो लोग सो रहे थे, वे घबराकर उठे और बाहर भागे, लेकिन तब तक आग की लपटें कई घरों को अपनी गिरफ्त में ले चुकी थीं।
हादसे का मंजर और घायलों का हाल
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने के बाद अफरा-तफरी का माहौल था। झुलसे हुए 15 लोगों को तुरंत हल्दिया सब-डिवीजनल अस्पताल पहुंचाया गया।
वहां से, गंभीर हालत वाले 5 मरीजों को तमलूक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रेफर किया गया। इनमें से दो लोगों की हालत अभी भी बेहद गंभीर बनी हुई है, और डॉक्टर उनकी जान बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
घायलों में कई लोग ऐसे हैं जो अपने घरों में सो रहे थे और आग की लपटों से बच नहीं पाए। उनके शरीर पर गहरे घाव हैं और वे दर्द से कराह रहे हैं।
हादसे की खबर मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। आग बुझाने के लिए 12 से ज्यादा फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।
रात के अँधेरे और नैफ्था की वजह से आग की भीषणता ने फायर फाइटर्स के लिए चुनौती खड़ी कर दी थी। घंटों की मशक्कत के बाद कहीं जाकर आग पर थोड़ा काबू पाया जा सका, लेकिन धुएँ का गुबार और जलने की बदबू पूरे इलाके में छाई रही।
पाइपलाइन में आग; रेलवे पर भी असर
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग सबसे पहले हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स की नैफ्था पाइपलाइन में लगी। ये पाइपलाइन चिरंजीबपुर इलाके से गुजर रही थी और इसी के पास से हल्दिया और दुर्गाचक को जोड़ने वाली रेलवे लाइन भी गुज़रती है।
आग इतनी भयानक थी कि इसकी तपिश और धुएँ ने रेलवे यातायात को भी प्रभावित किया। साउथ ईस्टर्न रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के बाद एहतियात के तौर पर हल्दिया और दुर्गाचक के बीच की ट्रेन सेवा को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया।
यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा क्योंकि कई ट्रेनें या तो रद्द कर दी गईं या उनके रूट में बदलाव किया गया।
रेलवे की ओवरहेड बिजली लाइन के उपकरण भी इस आग की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गए। इसका मतलब था कि सिर्फ ट्रेनें रुकना ही नहीं, बल्कि मरम्मत का काम भी काफी बड़ा था।
मंगलवार सुबह 5:20 बजे से ही हल्दिया और दुर्गाचक के बीच रेल सेवा ठप पड़ गई थी।
- 38052 (हल्दिया-हावड़ा) लोकल ट्रेन को आज के लिए रद्द कर दिया गया।
- 38051 (हावड़ा-हल्दिया) लोकल को दुर्गाचक तक ही चलाया गया, यानि वह हल्दिया तक नहीं पहुंच पाई।
- 38054 (हल्दिया-पांसकुड़ा) लोकल को हल्दिया की बजाय दुर्गाचक से शुरू किया गया।
ये सारे बदलाव यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बने, लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर रेलवे के पास और कोई विकल्प नहीं था।
नैफ्था क्या है और आग की वजह?
सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी भयानक आग कैसे लगी? पुलिस अभी तक आग लगने की सही वजह का पता नहीं लगा पाई है। पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और जांच चल रही है।
हालांकि, हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स ने इस घटना पर एक बयान जारी किया है, जिससे कुछ संकेत मिलते हैं।
कंपनी ने अपने बयान में कहा, "दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में कुछ लोगों के घायल होने की सूचना है और कंपनी प्रभावित लोगों व प्रशासन को हरसंभव सहयोग दे रही है।" कंपनी ने आगे बताया कि शुरुआती जानकारी से ऐसा लगता है कि यह घटना उनके प्लांट्स के पास नैफ्था की चोरी वाले स्थान के आसपास हुई हो सकती है।
कंपनी का कहना है कि वे संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर आग लगने के सही कारणों की जांच कर रहे हैं।
यहां यह जानना जरूरी है कि नैफ्था क्या है और यह कितना खतरनाक हो सकता है। कंपनी ने खुद इस पर प्रकाश डाला है। नैफ्था पेट्रोलियम (यानी कच्चे तेल) से रिफाइनिंग के दौरान मिलने वाला एक हल्का तरल हाइड्रोकार्बन मिश्रण है। यह आमतौर पर रंगहीन या हल्के पीले रंग का होता है और इसमें पेट्रोल जैसी तेज गंध आती है। सबसे अहम बात यह है कि यह अत्यधिक ज्वलनशील तरल है। यह पेट्रोकेमिकल उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण कच्ची सामग्रियों में से एक माना जाता है।
कंपनी पहले भी स्थानीय लोगों को चेतावनी देती रही है कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट के बिना किसी अथॉरिटी के इस्तेमाल या उनमें छेड़छाड़ से गंभीर खतरे हो सकते हैं। इस घटना से एक बार फिर साफ हो गया है कि ऐसे ज्वलनशील पदार्थों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।
अभी भी आग लगने की असल वजह और नुकसान का सही आकलन किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल हल्दिया शहर में इस हादसे की गूंज हर तरफ सुनाई दे रही है। प्रशासन और कंपनी मिलकर इस पूरी घटना की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को टाला जा सके।

