शेखपुरा: बिहार के शेखपुरा जिले में एक दुखद खबर ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। शेखोपुर सराय प्रखंड की पांची ग्राम कचहरी की लोकप्रिय सरपंच सिंधु देवी अब हमारे बीच नहीं रहीं। मंगलवार की सुबह जब उनका पार्थिव शरीर वाराणसी से उनके पैतृक गांव पांची पहुंचा, तो मानो पूरे गांव पर सन्नाटा छा गया। उनकी असामयिक मृत्यु से न सिर्फ उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है, बल्कि पूरे गांव और आसपास के इलाकों में मातम पसर गया है। एक ऐसी जनप्रतिनिधि जो लगातार दस सालों से लोगों की सेवा कर रही थी, उनका यूं चले जाना किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
सिंधु देवी, महज 48 साल की उम्र में अपनी जिंदगी की जंग हार गईं। सोमवार रात उन्होंने वाराणसी के एक निजी नर्सिंग होम में अंतिम सांस ली।
वो पिछले एक साल से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रही थीं, और बीते एक महीने से उनका गहन इलाज वाराणसी में चल रहा था। एक बीमारी ने हंसते-खेलते घर और समर्पित जननेता के रूप में उनकी छवि को हमेशा के लिए छीन लिया।
उनके निधन की खबर से पांची गांव में शोक की लहर दौड़ गई है, और हर कोई उनकी कमी महसूस कर रहा है।
एक कुशल जनप्रतिनिधि की अनूठी कहानी
सिंधु देवी का नाम पांची गांव के हर घर में सम्मान के साथ लिया जाता था। वे कोई साधारण नेता नहीं थीं, बल्कि एक ऐसी जनप्रतिनिधि थीं जिन्होंने लगातार दस सालों तक अपनी सेवा से लोगों का दिल जीता।
दो बार चुनाव जीतकर उन्होंने यह साबित किया कि जनता का विश्वास उन पर कितना गहरा था। पांची गांव निवासी गणेश पासवान की धर्मपत्नी सिंधु देवी ने अपने कार्यकालों में न सिर्फ अपने गांव का विकास किया, बल्कि अपने सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व से लोगों के बीच एक अलग पहचान बनाई।
ग्रामीण बताते हैं कि वो हमेशा लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनती थीं और उनका समाधान करने के लिए हर संभव प्रयास करती थीं।
ग्रामीण इलाकों में सरपंच का पद सिर्फ एक कुर्सी नहीं होता, बल्कि वो जनता और सरकार के बीच की एक मजबूत कड़ी होता है। सिंधु देवी ने इस भूमिका को बखूबी निभाया।
उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि दूर-दूर से लोग उनसे मिलने और अपनी समस्याएं बताने आते थे। अपने दस साल के कार्यकाल में उन्होंने पंचायत स्तर पर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए और अपने इलाके की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका असमय चले जाना सिर्फ उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि उस पूरी जनता के लिए एक बड़ी क्षति है जिसने उन पर इतना भरोसा किया था।
बीमारी से लंबी जंग और वाराणसी में अंतिम समय
सिंधु देवी के पति गणेश पासवान ने भारी मन से बताया कि उनकी पत्नी पिछले एक साल से कैंसर से पीड़ित थीं। यह खबर सुनकर हर कोई हैरान था, क्योंकि वह हमेशा अपने काम में सक्रिय दिखती थीं।
बीमारी का पता चलने के बाद से परिवार लगातार उनके इलाज के लिए संघर्ष कर रहा था। जब उनकी हालत और बिगड़ी, तो उन्हें बेहतर इलाज के लिए उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
यह लगभग एक महीने पहले की बात है। परिवार को उम्मीद थी कि वाराणसी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज सफल होगा और वे जल्द ठीक होकर वापस घर लौटेंगी।
लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सोमवार की रात, बीमारी ने सिंधु देवी को आखिरकार हरा दिया।
रात के सन्नाटे में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली, और इसी के साथ पांची गांव की उम्मीदों पर भी विराम लग गया। परिवार के सदस्य जो एक महीने से वाराणसी में उनके साथ थे, इस खबर से टूट गए।
उन्होंने तुरंत उनके पार्थिव शरीर को विशेष वाहन से पैतृक गांव पांची लाने की व्यवस्था की।
अंतिम दर्शन और जनसैलाब
मंगलवार की सुबह जब सरपंच सिंधु देवी का पार्थिव शरीर पांची गांव पहुंचा, तो गांव की गलियों में सन्नाटा था, लेकिन लोगों की आंखों में आंसू और चेहरे पर गम साफ झलक रहा था। उनके अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।
सैकड़ों की संख्या में लोग उनके घर के बाहर इकट्ठा हुए। महिलाएं, पुरुष, युवा और बुजुर्ग—हर कोई अपनी प्रिय सरपंच को आखिरी बार देखना चाहता था।
यह उनकी लोकप्रियता का ही प्रमाण था कि इतनी भारी भीड़ उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंची थी।
इस दुख की घड़ी में उनके घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। मुखिया बॉबी देवी, प्रखंड प्रमुख सोनी देवी, जदयू नेता टुन्नी कुमार, मुखिया प्रतिनिधि शशिकांत कुमार सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के स्थानीय नेता और पंचायत प्रतिनिधि उनके आवास पर पहुंचे।
सभी ने परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और सिंधु देवी के असमय निधन पर गहरा शोक प्रकट किया। नेताओं ने उनकी सेवाओं को याद किया और कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में समाज के लिए बहुत काम किया, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा।
सिंधु देवी अपने पीछे तीन पुत्र और एक पुत्री सहित चार बच्चों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनके बच्चों और पति के लिए यह क्षति अपूरणीय है।
पूरा पांची गांव इस दुख की घड़ी में उनके परिवार के साथ खड़ा है। एक जननेता का जाना सिर्फ एक व्यक्ति का जाना नहीं होता, बल्कि एक युग का अंत होता है।
सिंधु देवी ने अपने कर्मों से जो मिसाल कायम की है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। उनकी यादें और उनके द्वारा किए गए कार्य हमेशा पांची गांव के लोगों के दिलों में ज़िंदा रहेंगे।


