शेखपुरा: मामला बिहार के शेखपुरा जिले का है, जहाँ की जनता की कुछ बुनियादी मांगें अब सरकार के दरवाजे तक पहुँच गई हैं। अक्सर होता यह है कि छोटे जिलों में सुविधाओं के अभाव में लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है, और यही हाल शेखपुरा का भी है। इसी सिलसिले में हाल ही में एक बड़ी हलचल हुई जब बिहार सरकार की समाज कल्याण सह प्रभारी मंत्री श्वेता गुप्ता जिले के एक दिवसीय दौरे पर यहाँ पहुंचीं।
मंत्री के इस दौरे का मकसद जिले का जायजा लेना था, लेकिन इस मौके को जनता की समस्याओं को उठाने के लिए एक प्लेटफॉर्म की तरह इस्तेमाल किया गया। जनता दल (यू) के प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष प्रो.
डॉ. राजेंद्र यादव ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और मंत्री श्वेता गुप्ता से मुलाकात की।
यह मुलाकात सिर्फ शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि इसमें जिले के विकास से जुड़े कुछ जरूरी मुद्दों को लेकर एक औपचारिक मांग पत्र सौंपा गया।
सबसे बड़ी मांग जिस पर जोर दिया गया, वह है सुरक्षा और खेल। जिले के लोगों का मानना है कि यहाँ एक नई पुलिस चौकी की सख्त जरूरत है ताकि कानून-व्यवस्था बेहतर हो सके और आम जनता को अपनी शिकायतों के लिए दूर न जाना पड़े।
इसके साथ ही, युवाओं के लिए खेल सुविधाओं का अभाव एक बड़ी समस्या है, जिसे दूर करने के लिए एक आउटडोर स्टेडियम की मांग मजबूती से रखी गई है। \
जनहित के मुद्दों पर सौंपा गया मांग पत्र
प्रो. डॉ.
राजेंद्र यादव ने मंत्री श्वेता गुप्ता को जो मांग पत्र सौंपा, उसमें केवल पुलिस चौकी और स्टेडियम ही नहीं, बल्कि कई अन्य जनहित के मुद्दे भी शामिल थे। उनका तर्क था कि अगर जिले में बेहतर खेल सुविधाएं होंगी, तो स्थानीय युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
वहीं, पुलिस चौकी की मांग सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के नजरिए से की गई है।
मंत्री श्वेता गुप्ता ने इन मांगों को ध्यान से सुना और इस बात पर चर्चा की कि कैसे इन समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। जिले के लोगों को उम्मीद है कि सरकार की प्रभारी मंत्री होने के नाते श्वेता गुप्ता इन मांगों को उच्च स्तर पर पहुँचाएंगी और जल्द ही जमीन पर काम शुरू होगा।
इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी सक्रियता दिखी, जो चाहते हैं कि शेखपुरा को बुनियादी सुविधाओं के मामले में अन्य जिलों के बराबर लाया जाए। फिलहाल, अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या इन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या यह सिर्फ एक मांग पत्र तक ही सीमित रह जाएगा।

