जालंधर: पंजाब का जालंधर, और उस पर भी फिल्लौर की जीटी रोड. रात का दूसरा पहर, घड़ी में तकरीबन 2 बजे का वक़्त. सड़कों पर सन्नाटा पसरा था, कभी-कभार कोई गाड़ी सर्र से निकल जाती. लेकिन ये शांति ज्यादा देर तक टिकने वाली नहीं थी. अचानक, एक ज़ोरदार धमाका हुआ, ऐसा लगा जैसे कोई बम फट गया हो. पलक झपकते ही मुर्गियों से भरा एक तेज़ रफ़्तार कैंटर, सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से भिड़ गया. टक्कर इतनी भीषण थी कि जिसने भी सुना, वह सिहर उठा.
हादसा इतना भयंकर था कि कैंटर के परखच्चे उड़ गए. अंदर ड्राइवर समेत तीन लोग बुरी तरह फंस गए, लहूलुहान हालत में.
बाहर सड़क पर मुर्गियां चीख रही थीं, कुछ तो मौके पर ही मर चुकी थीं, बाकी छटपटा रही थीं. चारों तरफ कांच के टुकड़े और लोहे के पुर्जे बिखरे पड़े थे.
कुछ देर पहले तक जो सड़क ख़ामोश थी, अब चीखों और तबाही की गवाह बन चुकी थी. जिसने भी ये मंजर देखा, उसके रोंगटे खड़े हो गए.
दर्दनाक हादसा और जान का नुकसान
ये दर्दनाक घटना फिल्लौर में जीटी रोड पर, एक सीएनजी पंप के बिल्कुल पास हुई. जानकारी मिली कि मुर्गियों से भरा ये कैंटर बड़ी तेज़ी से आ रहा था.
बताया जा रहा है कि कैंटर के ड्राइवर को अचानक झपकी आ गई. हाईवे पर रात के समय लंबी दूरी की ड्राइव अक्सर थका देने वाली होती है और ऐसी झपकी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है.
ठीक वैसा ही हुआ. ड्राइवर का संतुलन बिगड़ा और कैंटर सीधे सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से जा टकराया.
टकराव की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि दूर-दूर तक सुनाई दी. टक्कर इतनी भयावह थी कि कैंटर का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया.
अंदर बैठे तीनों लोग गाड़ी के मलबे में बुरी तरह फंस गए. सबसे पहले तो चीख पुकार मची.
आसपास के लोगों को कुछ समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है. फिर जब नज़दीक जाकर देखा तो दिल दहल गया.
मुर्गियों से भरा कैंटर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था और अंदर फंसे लोग दर्द से कराह रहे थे.
बचाव कार्य और अस्पताल का मंज़र
घटना की जानकारी मिलते ही सबसे पहले रोड सेफ्टी फोर्स (SSF) की टीम मौके पर पहुंची. रात के अंधेरे में राहत और बचाव का काम शुरू करना आसान नहीं था.
एसएसएफ की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की. कैंटर का ढांचा इस तरह से मुड़ गया था कि फंसे हुए लोगों को बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो रहा था.
बड़ी मशक्कत के बाद, एक-एक करके तीनों घायलों को बाहर निकाला गया. वे सभी खून से लथपथ थे और उनकी हालत बेहद नाजुक लग रही थी.
तत्काल प्रभाव से 108 एम्बुलेंस सेवा को बुलाया गया. एम्बुलेंस टीम भी बिना देरी किए मौके पर पहुंची.
आनन-फानन में तीनों घायलों को एम्बुलेंस में डाला गया और उन्हें तुरंत फिल्लौर के सिविल अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों की टीम तुरंत उनकी जांच में जुट गई.
लेकिन अफसोस! डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों में से एक व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया. मृतक की पहचान मुश्ताक अली के रूप में हुई.
यह खबर सुनते ही वहां मौजूद सभी लोग सदमे में आ गए. मुश्ताक अली इस हादसे में अपनी जान गंवा बैठे थे.
बाकी बचे दो घायल व्यक्तियों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई थी. उन्हें तत्काल इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कर लिया गया और डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही थी.
उनके शरीर पर कई गंभीर चोटें आई थीं और वे खतरे से बाहर नहीं थे.
दूसरे ट्रक ड्राइवर की तलाश और पुलिस की जांच
घटनास्थल पर एक और चौंकाने वाली बात सामने आई. एसएसएफ टीम ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद, जिस ट्रक से कैंटर की टक्कर हुई थी, उसका ड्राइवर अपने वाहन को लेकर मौके से फरार हो गया.
यह अपने आप में एक गंभीर सवाल खड़ा करता है कि आखिर उस ड्राइवर ने ऐसा क्यों किया? क्या वह नशे में था? या कोई और वजह थी? हालांकि, मौके पर मरने वाले कैंटर ड्राइवर ने अपनी आखरी सांसें लेने से पहले बताया था कि टक्कर अचानक हुई थी, जिसका मतलब है कि दूसरे ट्रक के ड्राइवर को भागने का पूरा मौका मिल गया.
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, थाना फिल्लौर के ड्यूटी अफसर भी तुरंत मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी. पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों की स्थिति का जायजा लिया और आसपास के लोगों से पूछताछ की.
उनका पहला काम था फरार हुए दूसरे ट्रक ड्राइवर की तलाश करना. उसकी पहचान और गिरफ्तारी इस पूरे मामले की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण साबित होगी.
पुलिस ने मामले से जुड़े सबूत जुटाने शुरू कर दिए हैं. आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि फरार ड्राइवर का सुराग मिल सके.
फिलहाल, मुश्ताक अली के परिजनों को सूचित कर दिया गया है और शव का पोस्टमॉर्टम करवाया जा रहा है. घायल व्यक्तियों के इलाज पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है.
पुलिस अधिकारी ने बताया कि वे जल्द ही फरार हुए ट्रक ड्राइवर का पता लगा लेंगे और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इस घटना ने एक बार फिर रात के समय हाईवे पर चलने वाले वाहन चालकों की सुरक्षा और उनकी नींद पूरी होने के महत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.


