किशनगंज: बिहार के किशनगंज से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो रिश्तों के सबसे पवित्र धागों को तार-तार करती है और समाज में बढ़ते अपराधों पर गहरे सवाल उठाती है। यहां एक दादा ने अपनी ही 13 साल की नाबालिग पोती को अपनी हवस का शिकार बनाया। कई महीनों तक यह घिनौना सिलसिला चलता रहा, जिसमें बच्ची को जान से मारने की धमकी देकर चुप कराया गया। जब मां के सामने बेटी की उदासी का राज खुला, तो पूरा परिवार सन्न रह गया। इस दिल दहला देने वाली घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी दादा को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल भी कर लिया है।
यह घटना सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि उस समाज के लिए एक चेतावनी है, जहां घर के भीतर भी बेटियां सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही हैं। मासूम बच्ची की चुप्पी और मां की हिम्मत ने इस अपराध का पर्दाफाश किया है।
दर्दनाक घटना की पृष्ठभूमि
यह सब कुछ 25 अप्रैल से शुरू हुआ। उस दिन बच्ची की मां किसी पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए घर से बाहर गई थीं।
उन्होंने अपनी 13 साल की बेटी को घर पर दादा के भरोसे छोड़ दिया था, निश्चिंत थीं कि घर के बुजुर्ग की निगरानी में उनकी बच्ची पूरी तरह सुरक्षित होगी। लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस पर उन्होंने सबसे ज्यादा भरोसा किया था, वही शख्स उनकी मासूम बेटी के साथ ऐसा जघन्य अपराध करेगा।
घर में कोई नहीं था, और आरोपी दादा ने इसी मौके का फायदा उठाया। बच्ची के मुताबिक, दादा ने उसके मुंह पर कपड़ा बांध दिया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया।
इस घटना के बाद, उसने बच्ची को जान से मारने की धमकी दी। दादा ने कहा, “अगर तुमने यह बात किसी को बताई, तो मैं तुम्हें और पूरे परिवार को जान से मार दूंगा।
” यह धमकी इतनी डरावनी थी कि बच्ची सहम गई। वह इतनी डर गई कि उसने किसी को कुछ नहीं बताया।
बच्ची ने बार-बार दादा को रोकने की कोशिश की, रोती रही और विरोध करती रही, लेकिन दादा नहीं माने और इस घिनौने कृत्य को अंजाम देते रहे। इसके बाद, जब भी उन्हें मौका मिलता, वह अपनी पोती को हवस का शिकार बनाते रहे।
हर बार यही धमकी दोहराई जाती, जिससे बच्ची की हिम्मत जवाब दे गई थी।
माँ की शंका और बेटी का खुलासा
शुरुआत में तो बच्ची डर के मारे सब कुछ चुपचाप सहती रही, लेकिन यह दर्द भीतर ही भीतर उसे खोखला कर रहा था। उसकी हंसी गायब होने लगी, वह उदास रहने लगी और पहले जैसी चंचल नहीं रही।
मां की नजरें अपनी बेटी के इन बदलते हाव-भाव को पकड़ रही थीं। उन्हें शक हुआ कि कुछ तो गड़बड़ है।
वह अपनी बेटी से बार-बार पूछती थीं कि आखिर उसे क्या हुआ है, वह इतनी गुमसुम क्यों रहती है। मां के लगातार पूछने और प्यार भरे दबाव के आगे आखिर मासूम बच्ची की चुप्पी टूट गई।
उसने अपने परिवार के सदस्यों के सामने, और उस वक्त आरोपी दादाजी भी वहीं मौजूद थे, अपनी पूरी आपबीती विस्तार से बताई।
यह सुनकर परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। मां को जब पता चला कि पिछले तीन महीनों से उनके ससुर उनकी मासूम बेटी के साथ लगातार दुष्कर्म कर रहे थे, तो उन्हें गहरा सदमा लगा।
इस खुलासे के बाद घर में कोहराम मच गया।
मामला दबाने की कोशिशें और परिवार का संघर्ष
घटना की जानकारी सामने आने के बाद, आरोपी दादा ने अपने कृत्य की बदनामी के डर से मामले को दबाने की हरसंभव कोशिश की। उसने परिवार पर दबाव बनाना शुरू किया कि यह बात बाहर न जाए, ताकि उसकी इज्जत बची रहे।
हद तो तब हो गई जब घर के ही कुछ रिश्तेदारों ने भी मां और बेटी को धमकाया, उन्हें चुप रहने और मामले को पुलिस तक न ले जाने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। उनका मकसद भी बदनामी से बचना था, भले ही इसके लिए एक मासूम को न्याय से वंचित करना पड़े।
लेकिन पीड़ित बच्ची की मां ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी बेटी को न्याय दिलाने का दृढ़ संकल्प लिया।
उनके लिए यह केवल उनकी बेटी का सवाल नहीं था, बल्कि हर उस मासूम की आवाज थी, जो ऐसे दर्द से गुजरता है और चुप्पी साधने पर मजबूर हो जाता है। मां ने समाज और परिवार के दबाव को दरकिनार करते हुए अपनी बेटी के साथ खड़े रहने का फैसला किया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और आरोपी की गिरफ्तारी
अपनी नाबालिग बेटी को लेकर मां सीधे किशनगंज के महिला थाने पहुंचीं। वहां उन्होंने महिला थानाध्यक्ष सुनीता कुमारी को अपनी पूरी आपबीती सुनाई और आरोपी दादा के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई की। महिला थानाध्यक्ष सुनीता कुमारी ने बताया कि जैसे ही बच्ची की मां का लिखित आवेदन प्राप्त हुआ, पुलिस हरकत में आ गई।
जांच के दौरान, पुलिस ने आरोपी दादा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान आरोपी दादा ने अपनी 13 साल की पोती के साथ दुष्कर्म करने की घटना को कबूल कर लिया।
उसने अपने जघन्य अपराध को स्वीकार किया। इसके बाद, पुलिस ने आरोपी दादा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
इस घटना के सामने आने के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और हर कोई आरोपी के लिए सख्त से सख्त सजा की मांग कर रहा है। यह मामला दिखाता है कि कैसे कभी-कभी सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले रिश्ते भी टूट सकते हैं और एक मां की हिम्मत ही बच्चों को न्याय दिला सकती है।

