कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में एक अस्पताल के भीतर इंसानियत और डॉक्टरों की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां जान बचाने की उम्मीद लिए लोग अस्पताल पहुंचते हैं, वहीं कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में रजनी शर्मा उर्फ मंजू नाम की एक प्रसूता ने कथित तौर पर चिकित्सकीय लापरवाही के चलते अपनी जान गंवा दी। अब इस मामले में जनता के गुस्से और बढ़ते दबाव ने प्रशासन को हिला दिया है। पहले एक डॉक्टर पर गाज गिरी, उन्हें सस्पेंड किया गया और अब दो स्टाफ नर्सों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। मामला ऐसा गर्म है कि अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग, दोनों पर जनता की सीधी नजर है।
यह पूरा मामला 21 जून को शुरू हुआ, जब प्रसूता रजनी शर्मा उर्फ मंजू शर्मा को इलाज के लिए कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन, जो उम्मीदें लेकर परिजन रजनी को अस्पताल लाए थे, वे कुछ ही देर में बिखर गईं।
परिजनों का आरोप है कि रजनी की हालत गंभीर थी, उनकी पीड़ा बढ़ रही थी, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद डॉ. अनु देवी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
आरोप है कि रजनी को समय पर उचित उपचार नहीं मिला, जिसकी वजह से उनकी जान चली गई।
घटना की पृष्ठभूमि और आरोप
पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि जब रजनी की हालत बिगड़ रही थी, तब डॉ. अनु देवी ने न सिर्फ लापरवाही बरती, बल्कि उनके इलाज में भी देरी की।
मरीजों और उनके परिजनों का भरोसा डॉक्टरों पर टिका होता है, लेकिन यहां आरोपों के मुताबिक, डॉक्टरों ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई। दुखद बात यह है कि इस गंभीर आरोप के साथ-साथ दो स्टाफ नर्सों, रेशमा और सोनिया, पर भी परिजनों ने दुर्व्यवहार और उपचार में देरी का आरोप लगाया है।
परिवार का कहना है कि अगर समय पर सही इलाज मिल जाता और नर्सों का व्यवहार भी ठीक रहता, तो शायद मंजू आज उनके बीच होतीं।
अस्पताल प्रशासन पर पहले भी मामले को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगा है। शुरुआत में इस मामले में ढुलमुल रवैया अपनाया गया, जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क गया।
एक प्रसूता की मौत, ऊपर से अस्पताल का उदासीन रवैया – ये सब मिलकर एक बड़े जनआंदोलन की नींव बन गए।
अस्पताल का ढुलमुल रवैया और जन आक्रोश
मंजू की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का सब्र जवाब दे गया। सोमवार और मंगलवार को, मंडी और कुल्लू जिले के सैकड़ों लोग क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के बाहर जमा हो गए।
उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया, नारेबाजी की और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। ये सिर्फ कुछ लोगों का गुस्सा नहीं था, बल्कि पूरे क्षेत्र में चिकित्सा लापरवाही के खिलाफ एक जनभावना उमड़ पड़ी थी।
प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। कुछ लोगों ने तो आमरण अनशन की भी चेतावनी दी, जिससे प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया।
स्थानीय विधायक सुंदर सिंह ठाकुर भी प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचे और उन्हें आश्वस्त किया कि इस मामले में शीघ्र ही कोई निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई लगातार बढ़ते जनदबाव, उग्र प्रदर्शनों और आमरण अनशन के बाद की जा रही है।
जनता की आवाज को अनसुना करना अब किसी के लिए मुमकिन नहीं था।
प्रशासन का एक्शन; डॉक्टर के बाद अब नर्सों की बारी
जनदबाव के आगे प्रशासन को आखिरकार झुकना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में डॉ.
अनु देवी को बीते कल ही निलंबित कर दिया। निलंबन के बाद डॉ.
अनु का मुख्यालय शिमला में तय किया गया है, यानी उन्हें कुल्लू से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई जनता के आंदोलन की पहली जीत मानी जा रही है, लेकिन लोगों की मांग यहीं खत्म नहीं हुई।
गुस्साए लोगों ने प्रसूता रजनी शर्मा की मौत के दौरान ड्यूटी पर तैनात नर्सों रेशमा और सोनिया पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि इन दोनों नर्सों के दुर्व्यवहार और समय पर उपचार न देने के कारण ही मंजू की जान चली गई।
अब ताजा जानकारी के मुताबिक, अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट (MS) ने हैल्थ डायरेक्टर से इन दोनों स्टाफ नर्सों पर भी कार्रवाई की सिफारिश की है। सूत्रों की मानें तो सरकार आज ही दोनों स्टाफ नर्सों पर भी कार्रवाई कर सकती है।
यह देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या मंजू के परिजनों को पूरा इंसाफ मिल पाता है। जनता की नजरें अब भी प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या अस्पताल के भीतर की लापरवाही का पूरा सच सामने आएगा और जिम्मेदार लोगों को उनके किए की सजा मिलेगी।

