हरिद्वार: जैसलमेर की तपती रेत से अपने घर हरिद्वार के रुड़की लौट रहे एक बीएसएफ हेड-कॉन्स्टेबल के साथ ट्रेन में वो हुआ, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की होगी। छुट्टी पर आ रहे सत्यपाल सिंह की ट्रेन यात्रा खुशियों के बजाय एक डरावने अंत में बदल गई। काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर जब रानीखेत एक्सप्रेस अपनी अंतिम मंजिल पर रुकी, तो एक जनरल डिब्बे में सत्यपाल सिंह बेसुध पड़े मिले। अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अब पुलिस ने इस मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज किया है और शक है कि ट्रेन में उन्हें जहर देकर लूटपाट की गई थी। ये कहानी सिर्फ एक जवान की नहीं, बल्कि चलती ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
जैसलमेर में 20वीं बटालियन में तैनात हेड-कॉन्स्टेबल सत्यपाल सिंह (उम्र 53 साल) अपने घर उत्तराखंड के रुड़की, राज विहार कॉलोनी, मिलापनगर लौट रहे थे। छुट्टी मंजूर हो चुकी थी और 27 जून को उन्होंने जैसलमेर से रानीखेत एक्सप्रेस पकड़ी।
घर वापसी की खुशी चेहरे पर रही होगी और परिवार उनका इंतजार कर रहा होगा। सब कुछ सामान्य लग रहा था।
ट्रेन अपनी रफ्तार से मंजिल की ओर बढ़ रही थी।
घर वापसी का सफर और एक रहस्यमयी मोड़
सत्यपाल सिंह ने जोधपुर पहुंचने पर अपने बेटे को फोन भी किया था। उन्होंने बताया था कि वो ट्रेन से घर के लिए निकल चुके हैं।
प्लान के मुताबिक, उन्हें दिल्ली में उतरकर वहां से हरिद्वार-रुड़की के लिए दूसरी ट्रेन लेनी थी। लेकिन किसे पता था कि दिल्ली उनका अगला पड़ाव नहीं होगा।
किसी अनहोनी का शिकार हुए सत्यपाल सिंह दिल्ली में नहीं उतरे और ट्रेन में ही आगे बढ़ते चले गए। जोधपुर से काठगोदाम के बीच का ये सफर 960 किलोमीटर से भी ज़्यादा लंबा है।
हैरत की बात तो ये है कि इस पूरे लंबे सफर में जनरल बोगी में बैठे किसी सहयात्री या रेलकर्मी की नज़र उनकी इस बदहवासी पर नहीं पड़ी। शायद वो बेहोशी की हालत में थे और किसी ने ध्यान नहीं दिया, या फिर अंधेरे का फायदा उठाकर सब कुछ अंजाम दिया गया।
काठगोदाम स्टेशन पर सामने आई भयावह सच्चाई
29 जून की सुबह थी। रानीखेत एक्सप्रेस अपने आखिरी स्टेशन, काठगोदाम पहुंची।
जैसे ही ट्रेन रुकी और जनरल डिब्बों की चेकिंग शुरू हुई, एक कर्मचारी की नज़र एक शख्स पर पड़ी जो बेसुध हालत में पड़ा था। स्टेशन पर हड़कंप मच गया।
तुरंत सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) को खबर दी गई। GRP के जवान मौके पर पहुंचे और आनन-फानन में बेसुध सत्यपाल सिंह को हल्द्वानी के डॉ.
सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय ले जाया गया। डॉक्टरों ने अपनी पूरी कोशिश की, लेकिन वो बच नहीं पाए।
इलाज के दौरान ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
अज्ञात शव से BSF जवान की पहचान तक
शुरुआत में, पुलिस ने शव को अज्ञात मानकर सामान्य कार्रवाई की। लेकिन मंगलवार को जब मृतक के सामान और जेब की तलाशी ली गई, तो उसमें रखे आधार कार्ड और कुछ अन्य दस्तावेजों ने पूरे मामले की तस्वीर बदल दी।
आधार कार्ड पर नाम था सत्यपाल सिंह, और पदनाम था बीएसएफ हेड-कॉन्स्टेबल। रुड़की का पता भी साफ-साफ लिखा था।
पहचान स्पष्ट होते ही पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई। तुरंत जैसलमेर स्थित BSF हेडक्वार्टर को इस दुखद घटना की आधिकारिक सूचना दी गई।
परिवार को भी खबर कर दी गई। पोस्टमॉर्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया, लेकिन उनके लिए ये सदमा बर्दाश्त कर पाना बेहद मुश्किल था।
पुलिस का एक्शन और जहरखुरानी का शक
मामले की गंभीरता को देखते हुए, GRP थाना काठगोदाम ने बुधवार को हत्या का केस दर्ज कर लिया। मेडिकल चौकी प्रभारी मनमोहन सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में ऐसा लग रहा है कि सत्यपाल सिंह को सफर के दौरान अज्ञात जहरखुरानों ने नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया होगा।
इसके बाद उनका मोबाइल फोन, पर्स, और पहचान संबंधी सारे दस्तावेज चोरी कर लिए गए होंगे। ये घटनाएं अक्सर चलती ट्रेनों में होती हैं, जहां बदमाश यात्रियों को नशीला पदार्थ खिलाकर उनके कीमती सामान पर हाथ साफ कर देते हैं।
इस मामले में भी पुलिस का शक इसी दिशा में गहरा रहा है। अब पुलिस इन जहरखुरानों को पकड़ने और इस पूरी वारदात की गुत्थी सुलझाने में जुट गई है।
सत्यपाल सिंह के परिवार और उनके साथी जवानों को अब न्याय का इंतजार है।

