कानपुर: शहर में मादक पदार्थों की खुलेआम बिक्री पर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने मंगलवार देर शाम एक क्राइम मीटिंग बुलाई थी। उनकी भौंहें तनी हुई थीं और लहजा सख्त था। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर नशीले पदार्थों की बिक्री बंद नहीं हुई तो थानेदारों पर गाज गिरेगी। ये चेतावनी हवा में नहीं थी, एक गंभीर समस्या पर सीधी चोट थी। लेकिन, शायद कानपुर के कुछ इलाकों में कमिश्नर साहब की सख्ती का असर होने से पहले ही, जमीन पर कुछ और ही खेल चल रहा था। उनकी मीटिंग खत्म हुए कुछ ही घंटे बीते थे कि कर्नलगंज थाना क्षेत्र से दो ऐसे वीडियो सामने आए, जिन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए। ये वीडियो सिर्फ ड्रग्स बेचने वालों की करतूत नहीं दिखा रहे थे, बल्कि ये इशारा कर रहे थे कि पुलिस की नाक के नीचे, बल्कि शायद उनकी मिलीभगत से ही, ये धंधा फल-फूल रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल इन वीडियो ने शहर में हड़कंप मचा दिया और पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
इनमें से एक वीडियो में तो 'डी-80' नाम का एक कुख्यात गैंग खुलेआम मादक पदार्थ बेचते हुए दिखाई दे रहा है। वहीं, दूसरा वीडियो और भी चौंकाने वाला है, जहां जनता खुद एक ड्रग तस्कर को पकड़कर पुलिस के हवाले कर रही है, लेकिन जनता का आरोप है कि पुलिस ने उस पकड़े गए शख्स को जेल भेजने की बजाय, कुछ 'ले-देकर' छोड़ दिया।
यह पूरा मामला कमिश्नर के सख्त आदेशों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करता है और यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या पुलिस का डंडा वाकई अपराधियों पर चल रहा है, या फिर कहीं वो खुद ही इस धंधे में शामिल तो नहीं?
पुलिस कमिश्नर की सख्ती और फिर खुलासे का वीडियो
मंगलवार शाम को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने शहर के सभी पुलिस अधिकारियों और थानेदारों को बुलाया था। एजेंडा साफ था - शहर में खुलेआम बिक रहे मादक पदार्थ।
मीटिंग में कमिश्नर ने साफ लफ्जों में कहा, "मुझे लगातार कई थानाक्षेत्रों से मादक पदार्थों की खुलेआम बिक्री की सूचनाएं मिल रही हैं। आखिर थाने की पुलिस क्या कर रही है? यह सब तुरंत बंद होना चाहिए, नहीं तो सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
" उनकी इस चेतावनी को सुनकर थानेदारों के माथे पर बल पड़ गए थे। सबको लगा कि अब सख्ती होगी, अब ड्रग माफियाओं पर नकेल कसी जाएगी।
लेकिन, विडंबना देखिए, कमिश्नर साहब की मीटिंग खत्म हुए कुछ ही घंटे हुए थे और देर रात तक कानपुर के कर्नलगंज थाना क्षेत्र से दो वीडियो सोशल मीडिया पर तैरने लगे। ये वीडियो पुलिस कमिश्नर के आदेशों को धता बताते हुए जमीन की कड़वी सच्चाई सामने ला रहे थे।
डी-80 गैंग और रहमानी मार्केट का नजारा
सोशल मीडिया पर वायरल हुए इन दो वीडियो में से पहला वीडियो रहमानी मार्केट के पास का बताया जा रहा है। इस वीडियो में कर्नलगंज थाना क्षेत्र का एक युवक खुलेआम मादक पदार्थ की पुड़िया बेचते हुए दिख रहा है।
दावा किया जा रहा है कि यह युवक कुख्यात 'डी-80' गैंग का सदस्य है, जो इस इलाके में मादक पदार्थों की सप्लाई में सक्रिय है। हालांकि, यह वीडियो कब का है, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन इसमें दिख रहा नजारा चौंकाने वाला है।
दिन-दहाड़े या खुलेआम, जिस तरह से यह शख्स ड्रग्स बेच रहा है, वह बताता है कि इन इलाकों में तस्करों को पुलिस का खौफ नहीं है। यह वीडियो पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
आखिर कैसे एक कुख्यात गैंग का सदस्य बेखौफ होकर यह धंधा चला रहा है?
जुगियाना में जनता का एक्शन और पुलिस की भूमिका
दूसरे वायरल वीडियो ने तो और भी सनसनी फैला दी है। यह वीडियो 28 जून, यानी रविवार रात का बताया जा रहा है और जुगियाना इलाके का है।
इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुछ क्षेत्रीय लोग एक मादक पदार्थ तस्कर को पकड़कर ले जा रहे हैं। ये लोग उस तस्कर को दो बाइक सवार पुलिसकर्मियों के हवाले करते हैं।
वीडियो में पुलिसकर्मी उस युवक को अपनी बाइक पर बीच में बैठाकर ले जाते हुए दिख रहे हैं। यहां तक तो सब ठीक लगता है, जनता ने अपनी जिम्मेदारी निभाई और अपराधी को पुलिस को सौंपा।
लेकिन, इसके बाद जो हुआ, वह क्षेत्रीय लोगों के आरोप के अनुसार बेहद निराशाजनक है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उस पकड़े गए आरोपी को जेल भेजने की बजाय, 'रुपए लेकर छोड़ दिया'। अगर ये आरोप सही हैं, तो यह सीधे तौर पर पुलिस की मिलीभगत और भ्रष्टाचार का मामला बनता है।
यह घटना सिर्फ एक तस्कर के छूटने का मामला नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है। अगर लोग अपराधी को पकड़कर पुलिस को सौंपते हैं और पुलिस उसे छोड़ देती है, तो भला जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा? यह घटना साफ बताती है कि कानपुर में ड्रग्स का यह धंधा कितना गहरा है और इसमें कितनी परतें हो सकती हैं।
हवाई फायरिंग से दहला था इलाका
इस पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यह 'डी-80' गैंग सिर्फ ड्रग्स बेचने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह आपराधिक गतिविधियों में भी सक्रिय है।
इसी गैंग के कुछ सदस्यों ने शनिवार को बजरिया स्थित छोटे जुगियाना, बड़ा जुगियाना और कर्नलगंज स्थित बम पुलिस के पास 5 से 6 राउंड हवाई फायरिंग की थी। इस हवाई फायरिंग से पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी।
अब सवाल यह उठता है कि जब इस गैंग के सदस्य खुलेआम हवाई फायरिंग जैसी वारदातें कर रहे हैं, ड्रग्स बेच रहे हैं, और पुलिस उन्हें पकड़ने के बाद छोड़ देती है, तो क्या यह स्थिति शहर के कानून-व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी नहीं है?
कमिश्नर रघुबीर लाल ने भले ही सख्त निर्देश दिए हों, लेकिन इन वायरल वीडियो और जनता के आरोपों ने उनकी सख्ती पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि इस मामले में क्या कार्रवाई होती है और क्या वाकई कानपुर से मादक पदार्थों के इस जाल को खत्म किया जा सकेगा या यह महज कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगा।

