हाथरस: उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सासनी कस्बे से एक बेहद दुखद और रिश्तों की पेचीदगियों से भरी खबर सामने आई है। यहां मध्य रात्रि के करीब 35 साल के एक युवक ने अपनी ससुराल के पड़ोस में खुद को गोली मारकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। जिसने भी इस घटना के बारे में सुना, वो सन्न रह गया। मरने वाला शख्स, जिसका नाम महेश था, अपनी पत्नी के बार-बार उसे छोड़कर चले जाने से इस कदर टूट चुका था कि उसने मौत को गले लगाने का फैसला कर लिया। खास बात ये कि उसने यह आत्मघाती कदम उसी घर में उठाया, जिस शख्स के साथ उसकी पत्नी गई थी, उसके पिता का घर था।
यह मामला महज एक आत्महत्या का नहीं, बल्कि एक पति के लगातार टूटते हौसले और बिखरते परिवार की दर्दनाक कहानी है। पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद बताया कि महेश अपनी पत्नी आशा के छोड़कर जाने से गहरे सदमे में था।
आशा ने एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन बार महेश को और अपने बच्चों को छोड़कर दूसरे शख्स का दामन थामा था। इस बार, जब वह 16 जून को फिर से अरविंद नाम के शख्स के साथ चली गई, तो महेश के लिए यह आखिरी चोट साबित हुई।
इसी टूटन और निराशा में महेश ने सासनी का रुख किया और वहां पहुंचकर एक ऐसा कदम उठा लिया, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया।
रिश्तों की उलझन और एक दुखद अंत
पुलिस के अनुसार, यह घटना देर रात करीब 1:00 बजे घटी। मरने वाला महेश, समस्तपुर, तहसील खुर्जा का रहने वाला था।
उसकी ससुराल सासनी कस्बे में बिजली घर के पास रामबाबू के घर पर थी। महेश की पत्नी आशा रामबाबू की ही बेटी थी।
कहानी तब और पेचीदा हो जाती है जब इसमें अरविंद का नाम आता है। अरविंद, बिजली घर के पास ही रहने वाले सूरजपाल का बेटा है और वही शख्स है जिसके साथ महेश की पत्नी आशा बार-बार घर छोड़कर जा रही थी।
30 जून की देर शाम को महेश अपनी ससुराल पहुंचा था। शायद वह अपनी पत्नी या अपने बच्चों से मिलने की उम्मीद में था, या शायद कोई बातचीत करना चाहता था।
लेकिन अंदर ही अंदर उसके मन में क्या चल रहा था, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। कुछ देर ससुराल में रहने के बाद, वह अचानक ससुराल के पड़ोस में स्थित सूरजपाल के घर में घुस गया।
सूरजपाल वही व्यक्ति हैं जिनके बेटे अरविंद के साथ महेश की पत्नी गई हुई थी।
आत्मघाती कदम और घटना का खुलासा
सूरजपाल के घर में घुसते ही महेश सीधे एक कमरे में चला गया। वहां उसने बिना किसी को कुछ बताए, एक तमंचा निकाला और अपनी कनपटी पर रख कर गोली चला दी।
गोली की आवाज सुनते ही सूरजपाल के घर में हड़कंप मच गया। घर के सदस्य दौड़कर कमरे में पहुंचे तो उन्होंने देखा कि महेश लहूलुहान जमीन पर पड़ा था और मौके पर ही उसकी मौत हो चुकी थी।
इस दृश्य ने वहां मौजूद सभी को स्तब्ध कर दिया। तुरंत कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और महेश के शव को कब्जे में ले लिया।
कानूनी प्रक्रिया के तहत पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया, ताकि मौत की असली वजह और अन्य पहलुओं की जांच की जा सके। यह घटना उस इलाके में चर्चा का विषय बन गई, जहां लोग महेश के इस अंतिम और दुखद फैसले के पीछे की वजहों पर हैरान थे।
पुलिस की पड़ताल और पत्नी के 'बार-बार' जाने का किस्सा
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी निरीक्षक विपिन चौधरी ने मीडिया को बताया कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि महेश अपनी पत्नी आशा के उसे छोड़कर चले जाने से बहुत ज्यादा परेशान था।
इंस्पेक्टर चौधरी ने यह भी बताया कि आशा की यह कोई पहली बार घर छोड़कर जाने की घटना नहीं थी। वह पहले भी तीन बार अपने पति महेश और बच्चों को छोड़कर बिजली घर के अरविंद पुत्र सूरजपाल के साथ जा चुकी थी।
यह बार-बार का छोड़ना महेश के लिए एक मानसिक यंत्रणा बन चुका था। हर बार जब आशा वापस आती होगी, तो शायद महेश एक नई उम्मीद बांधता होगा, लेकिन हर बार उसकी उम्मीदें टूट जाती थीं।
आखिरी बार आशा ने महेश और अपने बच्चों को करीब 16 जून को छोड़ा था और फिर से अरविंद के साथ चली गई थी। यह घटना महेश के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुई।
पत्नी के इस बार-बार छोड़कर जाने के गहरे दर्द और अकेलेपन ने उसे इस हद तक पहुंचा दिया कि उसने अपनी जान लेने का फैसला कर लिया।
महेश की यह मानसिक परेशानी ही उसे सासनी तक खींच लाई थी। वह अपनी ससुराल पहुंचा और फिर सीधे उसी शख्स के पिता के घर में चला गया, जिसके साथ उसकी पत्नी थी।
यह कदम उसकी हताशा और टूटे हुए मन का प्रतीक था। पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच पड़ताल कर रही है, जिसमें मृतक के परिवार से बातचीत, आस-पड़ोस के लोगों से जानकारी जुटाना और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को खंगालना शामिल है।
पुलिस यह भी समझने की कोशिश कर रही है कि क्या इस आत्महत्या के पीछे कोई और कारण भी था या यह पूरी तरह से पत्नी के छोड़कर जाने की वजह से ही हुआ है। इस दुखद घटना ने समाज में रिश्तों की नाजुकता और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

