पूर्वी सिंहभूम: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले का जमशेदपुर शहर, सोमवार की रात एक खौफनाक वारदात से दहल उठा। बिष्टुपुर के डबल डाउन बार के ठीक बाहर, पार्किंग में करणी सेना के एक नेता हिमांशु सिंह की बेरहमी से चाकू गोदकर हत्या कर दी गई। यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी, बल्कि इसने पूरे शहर को सदमे में डाल दिया और कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई, इस वारदात के बाद जो कुछ हुआ, उसने पूरे सूबे की सियासत और पुलिस प्रशासन में भूचाल ला दिया। सूबे के मुखिया, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आधी रात को जागते हुए, एक ऐसा बड़ा और सख्त फैसला लिया, जिसकी शायद ही किसी ने कल्पना की होगी। उनका ये एक्शन दिखाता है कि वो अपराधियों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शने के मूड में नहीं हैं।
सोमवार देर रात, जब हिमांशु सिंह की हत्या की खबर जंगल की आग की तरह फैली, तो जमशेदपुर में आक्रोश की लहर दौड़ गई। बिष्टुपुर के गोलचक्कर पर गुस्साए लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
ये लोग सिर्फ नारे नहीं लगा रहे थे, उनका गुस्सा इतना उग्र था कि उन्होंने जमशेदपुर सिटी एसपी की गाड़ी पर भी हमला कर दिया। पुलिस के लिए स्थिति को संभालना मुश्किल हो गया था।
सड़कें जाम हो गईं, टायर जलाए गए, और हर तरफ से पुलिस प्रशासन पर लचर कानून-व्यवस्था का आरोप लग रहा था। यह सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं रह गया था, बल्कि यह पुलिस-प्रशासन की साख से जुड़ा सवाल बन चुका था।
सीएम का आधी रात का 'ऑपरेशन क्लीन'
जब जमशेदपुर सुलग रहा था, तब रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पूरी रात हालात पर नजर बनाए हुए थे। मंगलवार देर रात उन्होंने एक आपातकालीन बैठक बुलाई और वहीं से एक बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया।
उन्होंने तत्काल प्रभाव से पूर्वी सिंहभूम के एसएसपी पीयूष पांडेय और सरायकेला-खरसावां की एसपी निधि द्विवेदी को उनके पदों से हटा दिया। हैरानी की बात ये भी है कि पीयूष और निधि दोनों पति-पत्नी हैं।
सीएम के इस एक फैसले ने साफ कर दिया कि कानून-व्यवस्था के मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे अधिकारी कितने भी बड़े क्यों न हों। दोनों अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, यानी उन्हें अब फिलहाल कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
शहर की कमान अब बड़े अधिकारियों के हाथ
सिर्फ अधिकारियों को हटाना ही हेमंत सोरेन का मकसद नहीं था, बल्कि वह चाहते थे कि जमशेदपुर में तुरंत स्थिति सामान्य हो और अपराधियों को पकड़ा जाए। इसलिए, उन्होंने शहर की कमान तीन वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों के हाथों में सौंप दी।
अब जमशेदपुर में एडीजी मनोज कौशिक, कमिश्नर रवि रंजन विक्रम और कोल्हान डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा कैंप करेंगे। इन तीनों अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे आज से ही शहर में डेरा डालें और पल-पल की रिपोर्ट दें।
उनका मुख्य काम है कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाना, अपराधियों को पकड़ना और जनता में पुलिस का खोया हुआ भरोसा वापस दिलाना।
लापरवाही पर पहला एक्शन बिष्टुपुर थाने पर
यह एक्शन सिर्फ बड़े अधिकारियों तक ही सीमित नहीं था। मुख्यमंत्री ने जमीनी स्तर पर हुई लापरवाही पर भी तुरंत कार्रवाई की।
इस पूरे मामले में कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में बिष्टुपुर थाना प्रभारी आलोक कुमार दुबे को भी निलंबित कर दिया गया। उनकी जगह निरंजन कुमार को बिष्टुपुर थाने की कमान सौंपी गई है।
इतना ही नहीं, जिस डबल डाउन बार के बाहर हिमांशु सिंह की हत्या हुई थी, उसका लाइसेंस भी तुरंत निलंबित कर दिया गया और बार को सील कर दिया गया। ये कदम बताते हैं कि सरकार किसी भी सूरत में अपराधियों को पनाह देने या लापरवाह रवैया अपनाने वालों को बख्शने वाली नहीं है।
सीएम ने X पर दिया कड़ा संदेश
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद अपने आधिकारिक X (पहले ट्विटर) हैंडल से इस बड़े फैसले की जानकारी दी और एक कड़ा संदेश भी दिया। उन्होंने लिखा, "पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक एवं सरायकेला-खरसावां की पुलिस अधीक्षक को विधि-व्यवस्था बनाए रखने में विफलता तथा आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में लापरवाही के कारण तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध करने का निर्णय मैंने लिया है।
"
आगे उन्होंने कहा, "चाईबासा के आयुक्त एवं एडीजी को क्षेत्र में लगातार कैंप कर स्थिति की प्रतिदिन समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, डीआईजी जमशेदपुर में रहकर कानून-व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी।
किसी भी स्तर पर लापरवाही या जवाबदेही से बचने की अनुमति नहीं दी जाएगी।" यह ट्वीट सिर्फ एक सूचना नहीं था, बल्कि राज्य के पुलिस प्रशासन के लिए एक स्पष्ट चेतावनी थी कि अगर उन्होंने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई, तो उन पर भी गाज गिर सकती है।
पीड़ित पिता से सीएम ने की बात, दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा
इस बीच, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मृतक हिमांशु सिंह के पिता अरविंद सिंह से मोबाइल पर सीधी बात की। अरविंद सिंह ने अपनी पीड़ा और गुस्से के बीच मुख्यमंत्री से कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं।
उनकी मांगों में शामिल था कि घटना के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए, हत्या के आरोपियों का एनकाउंटर किया जाए और हिमांशु की पत्नी ऋचा सिंह को सरकारी नौकरी दी जाए। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि इस बर्बर घटना में शामिल अपराधियों के साथ-साथ, जिन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने लापरवाही बरती है, उन सभी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अलावा, राज्य के डीजीपी तदाशा मिश्रा ने भी अरविंद सिंह से फोन पर बात की और उन्हें सांत्वना दी। डीजीपी ने कहा कि पुलिस पूरी मुस्तैदी और सख्ती से कार्रवाई कर रही है और बहुत जल्द हत्यारों को पकड़ लिया जाएगा।
इससे पहले, झामुमो के जिलाध्यक्ष विक्टर सोरेन, प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी और केंद्रीय सदस्य प्रमोद लाल भी हिमांशु के घर पहुंचे थे। कुणाल षाड़ंगी ने ही पीड़ित पिता अरविंद सिंह की मुख्यमंत्री और डीजीपी से बात कराई, जिससे परिवार को कुछ हद तक राहत मिली और उन्हें कार्रवाई का आश्वासन मिल सका।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इन अपराधियों को पकड़ पाता है और शहर में शांति बहाल कर पाता है।

