पूर्वी सिंहभूम: सोमवार की रात जमशेदपुर के बिष्टुपुर का गोलचक्कर उस वक्त एक रणभूमि सा लग रहा था, जब आधी रात तक वहां सिर्फ और सिर्फ हंगामा, चीख-पुकार और तोड़फोड़ का शोर गूंज रहा था। वजह थी करणी सेना के युवा जिलाध्यक्ष हिमांशु कुमार सिंह की मौत, जिसे शनिवार रात डबल डाउन बार के बाहर बेरहमी से चाकू से गोदा गया था। हिमांशु की मौत की खबर फैलते ही बिष्टुपुर का वो शांत इलाका अचानक आग के गोले में बदल गया। नाराज भीड़ ने न सिर्फ सड़क जाम कर दी, बल्कि जो भी गाड़ी वहां से गुजरने की कोशिश करती, उसे अपना गुस्सा झेलना पड़ता। आलम ये था कि लोगों को समझाने पहुंचे खुद सिटी एसपी की गाड़ी पर भी हमला बोल दिया गया।
आप समझिए, पूरा शहर गुस्से में उबल रहा था। करणी सेना के कार्यकर्ता और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में सड़क पर उतर आए थे।
रात के करीब 10:30 बजे, जब सिटी एसपी अपनी गाड़ी से हालात संभालने पहुंचे, तो भीड़ का गुस्सा उन पर भी फूट पड़ा। उनकी गाड़ी को निशाना बनाया गया, तोड़फोड़ की गई।
सिर्फ सिटी एसपी ही नहीं, इनकम टैक्स के एक पूर्व कमिश्नर की गाड़ी और बिष्टुपुर थाने की एक गाड़ी को भी भीड़ के गुस्से का शिकार होना पड़ा। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि शहर के कई थानों से पुलिस बल को बुलाना पड़ा ताकि किसी बड़ी अनहोनी को टाला जा सके।
ये घटना सिर्फ एक मौत का मामला नहीं थी, बल्कि शहर की कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही थी।
डबल डाउन बार के बाहर का वो खौफनाक मंजर
इस पूरे बवाल की जड़ शनिवार रात की एक घटना में छुपी है। बिष्टुपुर के डबल डाउन बार के ठीक बाहर, पुलिस वैन के सामने ही, करणी सेना के युवा जिलाध्यक्ष हिमांशु कुमार सिंह को कुछ अज्ञात हमलावरों ने चाकू से गोद डाला था।
जिसने भी ये मंजर सीसीटीवी फुटेज में देखा, उसके रोंगटे खड़े हो गए। फुटेज में साफ दिख रहा है कि जिलिंगगोड़ा के सात-आठ युवक दो युवकों पर ताबड़तोड़ चाकुओं से हमला कर रहे हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात ये थी कि मौके पर पुलिस की दो जीपें और टाइगर मोबाइल के जवान भी मौजूद थे। लेकिन, फुटेज में पुलिसकर्मी काफी हद तक निष्क्रिय दिख रहे हैं, और इसी बात ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया।
हिमांशु को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां कई दिनों तक मौत से जंग लड़ने के बाद सोमवार को उसने दम तोड़ दिया। इस हमले में आदित्यपुर के रहने वाले प्रत्युष आनंद (28) भी गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनका इलाज कोलकाता के अपोलो अस्पताल में चल रहा है।
उनकी हालत भी नाजुक बताई जा रही है।
हिमांशु की मौत और बिष्टुपुर का गुस्सा
जैसे ही हिमांशु कुमार सिंह की मौत की खबर फैली, करणी सेना के कार्यकर्ताओं में और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। हिमांशु, जो सरायकेला करणी सेना के युवा जिलाध्यक्ष थे, उनकी असामयिक और हिंसक मौत ने लोगों को झकझोर कर रख दिया।
सोमवार की रात, सैकड़ों लोग बिष्टुपुर गोलचक्कर पर जमा हो गए और सड़क जाम कर दी। उनका गुस्सा इस बात पर था कि पुलिस की मौजूदगी में ऐसी घटना कैसे हो सकती है, और इतने दिन बाद भी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
भीड़ ने अपनी आंखों के सामने हुए अन्याय और पुलिस की कथित निष्क्रियता के खिलाफ आवाज बुलंद की। सड़क पर जाम लगने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया, और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
जब सिटी एसपी की गाड़ी पर हुआ हमला
बढ़ते हंगामे को देखते हुए, रात करीब 10:30 बजे जमशेदपुर के सिटी एसपी खुद मौके पर पहुंचे ताकि भीड़ को शांत किया जा सके। लेकिन, उनका पहुंचना आग में घी डालने जैसा साबित हुआ।
उग्र भीड़ ने सिटी एसपी की गाड़ी को देखते ही उस पर हमला बोल दिया। पत्थर फेंके गए, गाड़ी को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
ये साफ था कि भीड़ का गुस्सा सिर्फ हमलावरों पर नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन पर भी था। उनके मुताबिक, पुलिस ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, और अब जब एक जान चली गई है, तो उन्हें जवाब चाहिए था।
सिटी एसपी की गाड़ी पर हुए हमले के बाद पुलिस के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई। सुरक्षा के मद्देनजर शहर के कई थानों से अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाना पड़ा।
पुलिस की कार्रवाई; सवालों के घेरे में कानून-व्यवस्था
सिटी एसपी की गाड़ी पर हमले और तोड़फोड़ के बाद, जो पुलिसकर्मी पहले कुछ हद तक तमाशबीन दिख रहे थे, वे अचानक सक्रिय हो गए। माहौल को शांत करने के लिए, पुलिस ने परिजनों के एक प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया।
हालांकि, प्रतिनिधिमंडल ने साफ कह दिया कि वे 'नेता लोगों' से नहीं, बल्कि हिमांशु के माता-पिता और परिवार के सदस्यों से बात करेंगे। वार्ता के दौरान, सिटी एसपी ने परिजनों को बताया कि घटना के समय मौके पर मौजूद गश्ती दल के तीनों पुलिसकर्मियों – एएसआई रतन कुमार दास, एएसआई राजेश कुमार रंजन और पुलिस जवान मनोज कुमार – को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष दल छापेमारी कर रहा है।
हालांकि, परिजनों ने पुलिस की इस कार्रवाई से संतोष नहीं जताया। उनका मानना था कि सिर्फ निलंबन काफी नहीं है, और दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाना चाहिए।
एसएसपी के साथ लंबी बातचीत के बाद ही परिजनों ने सड़क जाम हटाया। इस पूरी घटना ने जमशेदपुर शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस की मौजूदगी में हुए इस जघन्य अपराध और उसके बाद की कथित ढिलाई ने आम जनता के भरोसे को हिलाकर रख दिया है। बार संचालक भाजपा नेता नीरज सिंह समेत कुल 11 लोगों पर इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।
पुलिस अब इन सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तेजी से जुट गई है और शहर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, लेकिन लोगों के मन में कई सवाल अभी भी घूम रहे हैं।

