कुरुक्षेत्र: शिमला की सर्द हवाओं से नोएडा की भागदौड़ भरी जिंदगी की तरफ लौट रहा था एक आईटी इंजीनियर, लेकिन शायद नियति ने उसके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में शिमला से नोएडा लौट रहे एक 48 वर्षीय आईटी इंजीनियर की अचानक तबीयत बिगड़ गई और फिर अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है, जिसने परिवार और पुलिस, दोनों को ही उलझन में डाल दिया है।
मामला कुछ यूं है कि नोएडा की एक कंपनी में आईटी इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले कुश शर्मा, जो मूल रूप से गौतमबुद्ध नगर के रहने वाले थे, शिमला से अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने नोएडा लौट रहे थे। रास्ते में कुरुक्षेत्र पहुंचते-पहुंचते उनकी तबीयत इतनी खराब हो गई कि उन्हें ट्रेन से उतरना पड़ा।
उन्होंने सोचा कि कुछ देर आराम कर लेंगे, तो शायद तबीयत सुधर जाएगी। इसी उम्मीद में उन्होंने कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन के ठीक पास एक होटल में कमरा किराए पर ले लिया।
लेकिन किसे पता था कि यह सिर्फ एक पड़ाव नहीं, बल्कि सफर का आखिरी मुकाम साबित होगा।
शिमला से नोएडा का सफर और अचानक पड़ाव
48 साल के कुश शर्मा नोएडा में एक नामी आईटी कंपनी में इंजीनियर थे। परिवार में पत्नी और एक आठ साल की बेटी है।
वे शिमला से छुट्टी बिताकर या किसी काम से लौट रहे थे, और सोमवार को उन्हें अपनी कंपनी फिर से जॉइन करनी थी। लेकिन ट्रेन में सफर के दौरान ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।
शायद सफर की थकान, या कोई और अंदरूनी परेशानी, जिसने उन्हें कुरुक्षेत्र में रुकने पर मजबूर कर दिया। रेलवे स्टेशन के ठीक पास ही एक होटल में उन्होंने कमरा लिया।
शायद यह सोचकर कि एक रात के आराम से सब ठीक हो जाएगा और वो अगली सुबह अपनी मंजिल की ओर रवाना हो सकेंगे। होटल के रिकॉर्ड्स के मुताबिक, कुश शर्मा दो दिन से उस कमरे में रुके हुए थे।
होटल के कमरे में रहस्य और पुलिस की दस्तक
जब दो दिन बाद भी कुश शर्मा अपने कमरे से बाहर नहीं निकले और न ही किसी आवाज़ का जवाब दिया, तो होटल स्टाफ को कुछ गड़बड़ लगी। उन्होंने कई बार आवाज़ें दीं, दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई हलचल नहीं हुई।
अनहोनी की आशंका से घबराकर होटल प्रबंधन ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम बिना देरी किए होटल पहुंच गई।
दरवाजा अंदर से बंद था और कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दरवाजा तोड़ने का फैसला किया।
जैसे ही दरवाजा टूटा, अंदर का नज़ारा हैरान करने वाला था। कुश शर्मा अपने बेड पर बेहोशी की हालत में पड़े थे।
पुलिस ने फौरन उन्हें उठाया और बिना वक्त गंवाए इलाज के लिए नजदीकी एलएनजेपी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने तुरंत उनका इलाज शुरू किया, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।
अस्पताल में इलाज के दौरान ही कुश शर्मा ने आखिरी सांस ली। इस दुखद घटना ने सबको स्तब्ध कर दिया।
इलाज के दौरान दम तोड़ा, दिमाग़ी बीमारी का खुलासा
पुलिस ने जब कुश शर्मा के कमरे की तलाशी ली, तो उन्हें वहां से कुछ दवाइयों के रैपर मिले। ये रैपर दिमाग़ी बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों के थे।
इस जानकारी ने मामले को एक नया मोड़ दिया। बाद में, कुश शर्मा के चचेरे भाई नितेश शर्मा ने पुलिस को बताया कि कुश पिछले सात-आठ सालों से दिमाग़ी बीमारी से जूझ रहे थे।
उनका नोएडा में नियमित इलाज चल रहा था। नितेश शर्मा ने आशंका जताई कि हो सकता है दवा के ओवरडोज के कारण ही उनकी मौत हुई हो।
यह एक ऐसा खुलासा था जिसने उनके अचानक निधन के पीछे की वजह पर एक रोशनी डाली, लेकिन साथ ही कई सवाल भी खड़े किए। परिवार के लिए यह खबर किसी वज्रपात से कम नहीं थी, क्योंकि एक स्वस्थ दिख रहा व्यक्ति यूं अचानक चला जाएगा, किसी ने सोचा भी नहीं था।
परिवार का दर्द और पुलिस की आगे की कार्रवाई
कुश शर्मा के परिवार में उनकी पत्नी और एक आठ साल की छोटी बेटी है। इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
नोएडा से कुरुक्षेत्र पहुंचे परिवार के सदस्य पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर खड़े होकर न्याय और सच्चाई का इंतजार कर रहे थे। पुलिस ने परिवार के बयान के आधार पर 'इत्तेफाकिया रिपोर्ट' (यानी आकस्मिक मौत की रिपोर्ट) दर्ज कर ली है।
मामले की गहराई तक जाने के लिए पुलिस ने कुश शर्मा के शव का पोस्टमॉर्टम करवाया। फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ.
गौरव कौशिक ने बताया कि मौत के सही और सटीक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सैंपल पंचकूला स्थित मोगीनंद लैब में भेजा गया है। विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि कुश शर्मा की मौत का असली कारण क्या था—क्या यह सचमुच दवा का ओवरडोज था, या कोई और अनजानी वजह थी? रिपोर्ट का इंतजार है और इसी रिपोर्ट से इस अनसुलझी पहेली पर से पर्दा उठने की उम्मीद है।
पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया गया है, ताकि वे अंतिम संस्कार कर सकें। लेकिन सवालों के जवाब अभी भी बाकी हैं।

