धर्मशाला: हिमाचल के धर्मशाला में आजकल हवा में सियासत की गर्माहट कुछ ज़्यादा ही घुली हुई है। वजह है 1 जुलाई को होने वाले मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव। लेकिन ये चुनाव सिर्फ़ एक सामान्य चुनावी प्रक्रिया नहीं रह गए हैं, बल्कि एक बड़े सियासी 'खेला' में बदल गए हैं। अचानक, शहर में सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़े, यानी अतिक्रमण का मुद्दा, एक धारदार राजनीतिक हथियार बनकर सामने आया है। और इस बार निशाने पर हैं कांग्रेस के कई दिग्गज।
कहते हैं राजनीति में कब, कौन-सा मुद्दा आग पकड़ ले, कोई नहीं जानता। ठीक यही धर्मशाला में हो रहा है।
नगर निगम के चुनाव नतीजों के बाद भाजपा भले ही बहुमत में हो, लेकिन चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस के कुछ पार्षदों और पूर्व प्रत्याशियों पर अतिक्रमण का आरोप लगाकर भाजपा ने जो दांव चला है, उसने पूरे राजनीतिक माहौल में खलबली मचा दी है। ये शिकायतें सिर्फ़ स्थानीय प्रशासन तक नहीं, बल्कि सीधे दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय और राज्यपाल तक पहुंच गई हैं।
सियासी दांव और शिकायत की लंबी फेहरिस्त
मंगलवार को भाजपा ने अपनी रणनीति को ज़मीन पर उतारते हुए कांग्रेस के तीन पार्षदों और एक पूर्व प्रत्याशी के ख़िलाफ़ बाक़ायदा लिखित शिकायत दर्ज करा दी। ये शिकायत कांगड़ा के डीसी (उपायुक्त) और निर्वाचन अधिकारी हेमराज बैरवा के ज़रिए आगे बढ़ाई गई है।
शिकायत की कॉपी देश के प्रधानमंत्री, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल और शहरी विकास विभाग के सचिव तक भेजी गई है। मामला गंभीर है क्योंकि आरोप सरकारी ज़मीन पर अवैध निर्माण के हैं।
अगर जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो कई पार्षदों की कुर्सी, यानी उनकी सदस्यता, खतरे में पड़ सकती है। सोचिए, एक आरोप और कुर्सी जाने का डर! सियासत इसी को तो कहते हैं, जब एक दांव से कई जानें खतरे में पड़ जाती हैं।
- वार्ड नंबर 4: यहां से पार्षद और पूर्व मेयर नीनू शर्मा के ख़िलाफ़ नेहा सांगल ने शिकायत की है। पूर्व मेयर रह चुकी नीनू शर्मा पर आरोप लगना अपने आप में बड़ी बात है।
- वार्ड नंबर 11: पार्षद अनुराग धीमान के ख़िलाफ़ अक्षय धीमान ने शिकायत दर्ज कराई है। अनुराग धीमान भी नगर निगम की राजनीति में जाना-पहचाना चेहरा हैं।
- वार्ड नंबर 14: पार्षद आनोज बिष्ट के ख़िलाफ़ भी शिकायत है।
- वार्ड नंबर 17: यहां से पूर्व प्रत्याशी सुरेश पप्पी के ख़िलाफ़ चूरू राम ने मोर्चा खोला है। भले ही ये चुनाव हार गए हों, लेकिन इनका नाम भी इस विवाद में घिर गया है।
इतना ही नहीं, भाजपा यहीं नहीं रुकी है। पार्टी अब वार्ड नंबर 15 (खनियारा) से पूर्व मेयर रजनी व्यास और वार्ड नंबर 2 से ओंकार सिंह नैहरिया के ख़िलाफ़ भी कानूनी सलाह ले रही है।
मतलब साफ़ है, भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती और कांग्रेस के हर उस चेहरे को घेरने की तैयारी में है, जिस पर अतिक्रमण का हल्का सा भी दाग़ लग सकता है। ये सिर्फ़ आरोप नहीं, बल्कि आने वाले चुनाव के लिए एक बड़ी बिसात बिछाई जा रही है।
संख्याबल भाजपा के साथ, फिर भी जंग प्रतिष्ठा की
धर्मशाला नगर निगम के समीकरणों पर अगर नज़र डालें तो कुल 17 वार्ड हैं। हाल ही में हुए चुनावों में भाजपा ने ज़बरदस्त प्रदर्शन करते हुए 11 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
इस तरह से उसके पास स्पष्ट बहुमत है। वहीं, कांग्रेस के खाते में 5 सीटें आईं और एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी ने जीती थी।
आंकड़ों के हिसाब से देखें तो भाजपा समर्थित मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव जीतना लगभग तय है। लेकिन ये सिर्फ़ आंकड़ों का खेल नहीं है।
ये प्रतिष्ठा की जंग है।
बहुमत होते हुए भी, भाजपा ने अतिक्रमण के मुद्दे को उठाकर कांग्रेस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की है। इसका सीधा संदेश ये है कि भले ही संख्या बल हमारे साथ हो, लेकिन हम किसी भी तरह की 'अनियमितता' को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
यह रणनीति सिर्फ मेयर चुनाव तक सीमित नहीं लगती, बल्कि इसका असर भविष्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
सुधीर शर्मा के गृह क्षेत्र में बढ़ी राजनीतिक हलचल
ये पूरा घटनाक्रम धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र में हो रहा है, जो कि पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक सुधीर शर्मा का गृह क्षेत्र है। सुधीर शर्मा कांग्रेस के बड़े नेता हैं और उनके गढ़ में इस तरह की राजनीतिक उठापटक स्वाभाविक रूप से सरगर्मी बढ़ा देती है।
दिल्ली और शिमला तक पहुंची इन शिकायतों ने स्थानीय राजनीति में ज़बरदस्त उबाल ला दिया है। अब सब की नज़रें 1 जुलाई पर टिकी हैं, जब मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव होगा।
सवाल ये है कि क्या ये 'अतिक्रमण वार' चुनाव के नतीजों पर कोई असर डालेगा, या फिर ये बस एक सियासी शोर साबित होगा? और क्या कांग्रेस इन आरोपों का कोई तोड़ निकाल पाएगी या फिर बैकफुट पर ही रहेगी? इन सभी सवालों के जवाब 1 जुलाई के बाद ही मिलेंगे, लेकिन फिलहाल धर्मशाला की सियासत में पारा चढ़ा हुआ है और गर्मी अपने चरम पर है।

