नई दिल्ली: कमोडिटी बाजार में आजकल एक 'लाल' धातु की खूब चर्चा है, जिसने अपनी कीमतों में अचानक उछाल से सबका ध्यान खींचा है. हम बात कर रहे हैं तांबे की, वही धातु जो हमारे घरों में बिजली के तारों से लेकर बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज के दिल यानी मशीनों तक में इस्तेमाल होती है. पिछले दिनों इस तांबे के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स में ऐसी जबरदस्त तेजी देखने को मिली है कि बाजार के बड़े-बड़े धुरंधर भी इस पर करीबी नज़र बनाए हुए हैं. आखिर क्या है पूरा माजरा, और क्यों अचानक बढ़ गई इस 'लाल सोने' की चमक?
असल में, 9 जुलाई को जब बाजार खुला तो तांबे के भाव एकदम से ऊपर चढ़ गए. कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स (MCX) पर इसका जुलाई डिलीवरी वाला कॉन्ट्रैक्ट करीब 1 फीसदी की तेजी के साथ 1,279.45 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया.
सिर्फ उछाल ही नहीं, इसमें जबरदस्त खरीदारी भी देखने को मिली. कुल 12,961 लॉट का धुआंधार कारोबार हुआ, जिससे साफ हो गया कि मार्केट में तांबे की डिमांड को लेकर कितनी उम्मीदें हैं.
सिर्फ जुलाई वाला कॉन्ट्रैक्ट ही नहीं, अगस्त डिलीवरी वाला तांबा भी पीछे नहीं रहा. इसमें भी करीब 0.9 फीसदी की तेजी दर्ज की गई और यह 1,294.75 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था.
अगस्त वाले कॉन्ट्रैक्ट में भी 2,554 लॉट का टर्नओवर हुआ, जो यह बताता है कि आने वाले समय में भी तांबे की कीमतों में मजबूती बनी रहने की उम्मीद है. यह बाजार के पॉजिटिव सेंटीमेंट को दिखाता है.
आखिर क्यों उछल रहा है तांबा?
अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि तांबे की कीमतों में इतना जबरदस्त उछाल आ गया? इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ने की उम्मीद. ट्रेडर्स और एक्सपर्ट्स का मानना है कि दुनिया भर में मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी (यानी फैक्ट्रियों का काम-काज) फिर से जोर पकड़ रहा है, जिसका सीधा असर तांबे जैसी धातुओं की खपत पर पड़ रहा है.
आपको बता दें, तांबा सिर्फ तारों या बर्तनों तक सीमित नहीं है. यह इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EVs), रिन्यूएबल एनर्जी (जैसे सोलर पैनल, विंड टर्बाइन), इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे तमाम सेक्टर्स की जान है.
जैसे-जैसे दुनिया ग्रीन एनर्जी और नए इंफ्रास्ट्रक्चर की तरफ बढ़ रही है, तांबे की जरूरत भी उतनी ही बढ़ती जा रही है. यही उम्मीदें इसकी कीमतों को पंख दे रही हैं.
निवेशक और कंपनियां दोनों ही भविष्य की ग्रोथ को देखते हुए इसमें अपनी पोजीशन बना रहे हैं.
दुनिया के बाजार में क्या हो रहा है?
यह सिर्फ भारत का ही मामला नहीं है, बल्कि ग्लोबल मार्केट में भी तांबे का जलवा दिख रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कॉपर फ्यूचर्स करीब 2 फीसदी चढ़कर 13,456.22 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया.
ये एक इंटरनेशनल बेंचमार्क है, और जब वहां कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर दुनिया भर के बाजारों पर होता है, जिसमें भारत भी शामिल है. यह ग्लोबल सप्लाई चेन और डिमांड के कॉम्प्लेक्स नेटवर्क को दिखाता है.
इसी तरह अमेरिका के कॉमेक्स (Comex) पर भी सितंबर डिलीवरी वाले फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में 2 फीसदी का उछाल आया और यह 6.22 डॉलर प्रति पाउंड पर पहुंच गया. कुल मिलाकर, ग्लोबल मार्केट्स से लगातार पॉजिटिव सिग्नल्स मिल रहे हैं, जो घरेलू बाजार में भी खरीदारी को बढ़ावा दे रहे हैं.
यह बताता है कि यह तेजी किसी एक बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर इसकी जड़ें मजबूत हो रही हैं.
एक्सपर्ट्स किस बात पर रख रहे हैं नज़र?
बाजार के जानकार बताते हैं कि इस समय सभी की नजर ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी पर टिकी है. बड़े-बड़े एनालिस्ट्स यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि दुनिया की फैक्ट्रियां कितनी तेजी से काम कर रही हैं, क्योंकि यहीं से तांबे की असली डिमांड निकलती है.
ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग के आंकड़े ही यह तय करेंगे कि तांबे की खपत आगे कैसे रहने वाली है.
खास तौर पर उन देशों के घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है, जो तांबे के सबसे बड़े कंज्यूमर हैं, जैसे चीन. चीन की आर्थिक सेहत और उसकी औद्योगिक ग्रोथ का सीधा असर तांबे की वैश्विक मांग पर पड़ता है.
इसके अलावा, सप्लाई साइड से जुड़े ट्रेंड्स भी अहम हैं. यानी, तांबे की खदानों से कितना उत्पादन हो रहा है और मार्केट में इसकी उपलब्धता कितनी है, ये सब बातें भी कीमतों को तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं.
अगर सप्लाई कम रही और डिमांड बढ़ती रही, तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, जिससे मार्केट में एक नया चैलेंज खड़ा हो सकता है.
तांबे की बढ़ती कीमतें सिर्फ ट्रेडर्स के लिए ही मायने नहीं रखतीं, बल्कि कहीं न कहीं इसका असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ता है. सोचिए, अगर तांबा महंगा होगा तो बिजली के तार, घर बनाने में इस्तेमाल होने वाले फिटिंग्स, नई इलेक्ट्रिक गाड़ी, या यहां तक कि आपका नया स्मार्टफोन, इन सबकी लागत भी बढ़ सकती है.
तो यह कहना गलत नहीं होगा कि यह 'लाल धातु' हम सबकी जिंदगी से जुड़ी है और इसकी कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव अप्रत्यक्ष रूप से हम सभी को प्रभावित करता है.
कुल मिलाकर, कमोडिटी मार्केट में तांबे की मौजूदा तेजी ने एक नई उम्मीद जगाई है. ग्लोबल इकोनॉमी के रिकवर होने और इंडस्ट्रियल डिमांड में बढ़ोतरी की संभावनाओं ने इस धातु को एक नई चमक दी है.
अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह ट्रेंड कितना कायम रहता है और दुनियाभर के एक्सपर्ट्स की नजरें इसी पर बनी हुई हैं कि यह 'लाल सोना' आगे कौन सी करवट लेता है. बाजार की गतिविधियां बताती हैं कि तांबा अभी भी इन्वेस्टमेंट के लिए एक हॉट कमोडिटी बना हुआ है.




































