दिल्ली: शेयर बाजार की दुनिया में अक्सर ऐसी खबरें आती हैं, जो किसी कंपनी के शेयर को अचानक रॉकेट बना देती हैं. कुछ ऐसा ही देखने को मिला 9 जुलाई को, जब वेदांता ऑयल एंड गैस के शेयरों में ज़बरदस्त तेज़ी दर्ज की गई. सुबह बाज़ार खुलते ही शेयर मजबूत स्थिति में था, और देखते ही देखते दोपहर एक बजे तक इसमें 6.68 फीसदी का शानदार उछाल आ गया. शेयर का भाव बढ़कर 38.96 रुपये पर जा पहुंचा. आखिर क्या वजह थी इस अचानक आई 'बल्ले-बल्ले' वाली तेज़ी की, जो एक झटके में निवेशकों को मालामाल कर गई?
दरअसल, इस उछाल के पीछे दिल्ली हाई कोर्ट का एक बड़ा फैसला है. कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस आपत्ति को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें सरकार वेदांता और रेवा ऑयल के पक्ष में आए 9.9 करोड़ डॉलर के एक विदेशी आर्बिट्राल अवॉर्ड को लागू करने से रोकना चाहती थी.
सीधी भाषा में कहें तो, वेदांता के पाले में एक बड़ी जीत आई है, जिसने निवेशकों में जोश भर दिया है.
अब सवाल ये है कि ये आर्बिट्राल अवॉर्ड क्या है और इसका पूरा मामला क्या है? चलिए, इसे थोड़ा विस्तार से समझते हैं.
क्या है ये पूरा मामला, जिसमें केंद्र सरकार और वेदांता आमने-सामने थे?
ये पूरा विवाद रेवा ऑयल फील्ड से जुड़े 'प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट' (PSC) से जुड़ा है. ये कॉन्ट्रैक्ट तय करता है कि तेल और गैस के प्रोडक्शन से होने वाले मुनाफे को सरकार और कंपनी के बीच कैसे बांटा जाएगा.
बात साल 2014 की है, जब केंद्र सरकार ने वेदांता और रेवा ऑयल पर 9.9 करोड़ डॉलर का दावा ठोक दिया था. सरकार ने इसके लिए एक 'शो-कॉज नोटिस' यानी कारण बताओ नोटिस जारी किया था.
सरकार का कहना था कि कंपनियों ने कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों का सही से पालन नहीं किया है.
केंद्र सरकार के इस नोटिस के बाद वेदांता और रेवा ऑयल ने इस मामले को आर्बिट्राल ट्राइब्यूनल के सामने ले जाने का फैसला किया. आर्बिट्राल ट्राइब्यूनल एक तरह की विशेष अदालत होती है, जो ऐसे कारोबारी विवादों को सुलझाती है.
काफी सुनवाई और दलीलों के बाद, ट्राइब्यूनल ने 2016 में अपना अंतिम फैसला (अवॉर्ड) सुनाया. ये फैसला वेदांता और रेवा ऑयल के पक्ष में था.
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. ट्राइब्यूनल के इस अवॉर्ड को मलेशिया की अदालतों ने भी सही ठहराया, जिससे वेदांता की स्थिति और मजबूत हो गई.
लेकिन भारत सरकार इस फैसले से खुश नहीं थी और उसने इसे लागू करने का विरोध किया.
केंद्र सरकार की क्या दलील थी, जिसे हाई कोर्ट ने नहीं माना?
भारत सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि आर्बिट्राल ट्राइब्यूनल का ये फैसला भारत की 'पब्लिक पॉलिसी' यानी सार्वजनिक नीति के खिलाफ है. सरकार का तर्क था कि ट्राइब्यूनल ने 'प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट' को एक तरह से फिर से लिख दिया है.
उनका आरोप था कि ट्राइब्यूनल के फैसले ने पेट्रोलियम मुनाफे में सरकार की हिस्सेदारी को 9.9 करोड़ डॉलर तक घटा दिया, जो कि भारत के हितों के खिलाफ है. यह जानकारी 'बार एंड बेंच' नाम की वेबसाइट ने दी थी.
लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की इन दलीलों को खारिज कर दिया. कोर्ट का ये फैसला वेदांता के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है, क्योंकि अब कंपनी को इस विवाद से जुड़ी कानूनी अड़चनों से मुक्ति मिल गई है और 9.9 करोड़ डॉलर के आर्बिट्राल अवॉर्ड को लागू करने का रास्ता साफ हो गया है.
वेदांता का बिजनेस अपडेट क्या कहता है, जब शेयर में तेज़ी आई?
ये तो रहा अदालती मोर्चे का अपडेट, लेकिन क्या कंपनी के बिजनेस फ्रंट पर सब कुछ ठीकठाक चल रहा है? वेदांता ऑयल एंड गैस ने जून तिमाही का अपना बिजनेस अपडेट भी जारी किया है. और आंकड़ों पर नज़र डालें, तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखती है.
कंपनी के एवरेज डेली ग्रॉस प्रोडक्शन में 17 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. एक साल पहले की इसी अवधि में जहां ये 93.2 Kboepd (हजार बैरल ऑफ ऑयल इक्विवेलेंट प्रति दिन) था, वहीं जून तिमाही में ये घटकर 77.7 Kboepd पर आ गया है.
कुल ऑयल एंड गैस वाल्यूम में भी 17 फीसदी की कमी आई है, जो पिछले साल के 8.5 Kboepd से गिरकर इस तिमाही में 7.1 Kboepd रह गया है. यानी, प्रोडक्शन के मोर्चे पर कंपनी को थोड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
इसके बावजूद, दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और शेयर को उछाल दे दिया. ये दिखाता है कि कानूनी जीत कई बार कंपनी के मौजूदा प्रदर्शन से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है, खासकर जब मामला करोड़ों डॉलर का हो.
बाजार का हाल कैसा रहा, जब वेदांता के शेयर में तेज़ी दिखी?
उधर, अगर पूरे शेयर बाजार की बात करें, तो 9 जुलाई को बाज़ार में एक अच्छी रिकवरी देखने को मिली. इससे एक दिन पहले, 8 जुलाई को, शेयर बाज़ार में बड़ी गिरावट आई थी, जब सेंसेक्स और निफ्टी 2 फीसदी से ज़्यादा गिर गए थे.
लेकिन 9 जुलाई को स्थिति बदली.
निफ्टी 0.72 फीसदी यानी 171 अंक चढ़कर 24,052 पर पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स 0.69 फीसदी यानी 527 अंक के उछाल के साथ 77,023 पर कारोबार कर रहा था. बैंक निफ्टी में भी करीब 1 फीसदी की तेज़ी दर्ज की गई.
ऐसे में, वेदांता ऑयल एंड गैस का शेयर ऐसे माहौल में चमका, जब पूरा बाज़ार रिकवरी मोड में था, लेकिन इसकी तेज़ी के पीछे मुख्य वजह दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला ही रहा.
कुल मिलाकर, वेदांता के लिए यह दिन दोहरी खुशखबरी लेकर आया. एक तरफ अदालती मोर्चे पर बड़ी जीत, जिसने एक बड़े वित्तीय बोझ को टाल दिया, तो दूसरी तरफ शेयर बाजार में आई शानदार तेज़ी, जिसने निवेशकों को खुश कर दिया.
हालांकि, कंपनी के प्रोडक्शन आंकड़ों को देखकर लगता है कि आने वाले समय में उसे अपनी ऑपरेशनल चुनौतियों से भी निपटना होगा.




































