शेयर बाजार: ज़रा सोचिए, कोई शेयर पांच महीने तक एक ख़ास लेवल को छूने के लिए तरसे, और फिर अचानक एक ख़बर आती है और वो लेवल फिर से पार हो जाता है! कुछ ऐसा ही हुआ है ज़ोमैटो की पैरेंट कंपनी एटर्नल के शेयर के साथ। लंबे इंतजार के बाद एटर्नल के शेयर ने ₹300 का आंकड़ा फिर से पार कर लिया है, और ये हुआ है जून 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के दम पर।
बाजार में खबर गर्म है कि इस नए पैटर्न से विदेशी निवेश (FIIs) के लिए कंपनी में घुसने का रास्ता खुल गया है। नतीजतन, शेयर ऐसे उछले कि इंट्रा-डे में 4% से ज़्यादा की बढ़त के साथ ₹300.20 तक जा पहुंचे।
फिलहाल, बीएसई पर ये 2.39% की बढ़त के साथ ₹293.40 पर कारोबार कर रहे थे, लेकिन वो ₹300 का लेवल छूना ही अपने आप में एक बड़ी बात है। आख़िरी बार कंपनी ने 13 फ़रवरी 2026 को इंट्रा-डे में ₹300 का स्तर देखा था।
तो, आख़िर इस शेयरहोल्डिंग पैटर्न में ऐसा क्या है जो मार्केट को इतना भा गया?
दरअसल, कहानी शुरू होती है मोतीलाल अल्टरनेट रिसर्च की एक ताज़ा रिपोर्ट से। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि एटर्नल में विदेशी निवेश के लिए उपलब्ध हिस्सेदारी, जिसे अंग्रेज़ी में 'फॉरेन ओनरशिप हेडरूम' (Foreign Ownership Headroom) कहते हैं, उसमें ज़बरदस्त इजाफा हुआ है।
इसका सीधा मतलब ये है कि अब विदेशी निवेशक पहले से कहीं ज़्यादा आसानी से इस कंपनी में पैसा लगा सकते हैं।
ये 'हेडरूम' बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि अगस्त में होने वाली MSCI (मॉर्गन स्टैनली कैपिटल इंटरनेशनल) रिव्यू में एटर्नल को फिर से 'फुल वेटेज' मिल सकता है। 'फुल वेटेज' मिलना किसी भी शेयर के लिए बहुत बड़ी बात होती है, क्योंकि इससे ग्लोबल इंडेक्स को ट्रैक करने वाले बड़े-बड़े फंड इसमें निवेश करते हैं।
अब विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए 25% से ज़्यादा का 'हेडरूम' उपलब्ध है, और ये आंकड़ा उनके निवेश की राह में आने वाली बड़ी रुकावटों को ख़त्म कर देता है।
'फुल वेटेज' मिलने से क्या बदल जाएगा?
मोतीलाल की रिपोर्ट के हिसाब से, अगर एटर्नल को MSCI में 'फुल वेटेज' मिलता है, तो इसमें क़रीब 52 करोड़ डॉलर (लगभग ₹4,300 करोड़) का पैसिव इनफ़्लो आ सकता है। अब आप पूछेंगे ये 'पैसिव इनफ़्लो' क्या बला है? दरअसल, दुनिया भर में बहुत सारे फंड ऐसे होते हैं जो किसी ख़ास इंडेक्स (जैसे MSCI इंडेक्स) को ही ट्रैक करते हैं।
यानी, इंडेक्स में जो शेयर होता है, वो उसमें पैसा लगाते हैं। जब एटर्नल को 'फुल वेटेज' मिलेगा, तो ऐसे फंड बिना ज़्यादा सोचे-समझे इसमें अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएंगे।
इससे पहले, विदेशी निवेशकों के लिए सीमित हिस्सेदारी उपलब्ध होने की वजह से MSCI ने एटर्नल का वेटेज 1.33% से घटाकर आधा कर दिया था। उस समय कंपनी को तगड़ा झटका लगा था, और निवेशकों में भी निराशा छा गई थी।
लेकिन अब जून तिमाही के लेटेस्ट शेयरहोल्डिंग आंकड़ों ने पासा पलट दिया है। इन आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी में विदेशी निवेशकों की होल्डिंग 9.33% से बढ़कर 25% से ज़्यादा हो सकती है।
यह बदलाव एक तरह से विदेशी निवेश के लिए 'ग्रीन सिग्नल' जैसा है।
शेयर की चाल क्या कहती है?
अगर पिछले एक साल के सफ़र पर नज़र डालें, तो एटर्नल के शेयरों ने अपने निवेशकों को झटके भी कम नहीं दिए हैं। कंपनी ने एक दौर ऐसा भी देखा है जब निवेशकों की साँसें अटकी हुई थीं।
पिछले साल, 16 अक्टूबर 2025 को ये शेयर ₹368.40 के भाव पर था, जो इसका रिकॉर्ड हाई लेवल है। उस समय लग रहा था कि कंपनी बुलंदी छू रही है।
लेकिन, इसके बाद जो हुआ वो किसी डरावने सपने से कम नहीं था। महज़ पांच महीनों में, ये शेयर रिकॉर्ड हाई से 42.30% टूट गया।
16 मार्च 2026 को ये गिरकर ₹212.55 के भाव पर आ गया, जो एक साल का इसका रिकॉर्ड निचला स्तर था। जिन निवेशकों ने ऊपरी स्तर पर दांव लगाया था, उन्हें बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।
लेकिन अब, ₹300 का लेवल फिर से छूना, उन निवेशकों के लिए एक उम्मीद की किरण लेकर आया है जो कंपनी के भविष्य को लेकर आशान्वित हैं।
कुल मिलाकर, एटर्नल के शेयर में आई ये तेज़ी सिर्फ एक दिन की उछाल नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक ठोस वजह है जो कंपनी में आने वाले बड़े विदेशी निवेश की संभावनाओं को मज़बूत करती है। अब सबकी निगाहें अगस्त में होने वाली MSCI रिव्यू पर टिकी हैं, जो इस शेयर की अगली चाल तय कर सकती है।



































