दिल्ली: मेडिकल के इम्तिहान यानी नीट यूजी (NEET UG) की तैयारी करने वाले लाखों छात्र इन दिनों बड़ी उलझन में हैं. पेपर लीक से लेकर परीक्षा रद्द होने और फिर से होने तक, पिछले कुछ वक्त में इस एग्जाम ने छात्रों और अभिभावकों की खूब नींद उड़ाई है. लेकिन अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने एक ऐसा बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर ली है, जिससे मेडिकल एंट्रेस एग्जाम का पूरा सिस्टम ही बदलने वाला है. खबर है कि 2027 से नीट यूजी का पूरा तरीका ही बदल जाएगा और यह एग्जाम अब कंप्यूटर पर होगा, साथ ही कई दिनों तक चलेगा. छात्रों के लिए ये खबर जितनी बड़ी है, उतनी ही जरूरी भी, क्योंकि अब उन्हें अपनी तैयारी का तरीका भी बदलना होगा.
आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है और इस बार क्या-क्या नए नियम आने वाले हैं? दरअसल, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, जो ये परीक्षा कराती है, वो इसरो के पूर्व चेयरमैन के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली एक हाई-लेवल कमिटी की सिफारिशों को लागू करने जा रही है.
ये कमिटी बनाई ही इसलिए गई थी कि परीक्षा सिस्टम में सुधार हो सके और पेपर लीक जैसे मामले फिर से न हों. तो चलिए, जानते हैं कि 2027 से आपको नीट यूजी में क्या-क्या नया देखने को मिलेगा.
आखिर क्या है नया प्लान?
सबसे बड़ा बदलाव तो यही है कि नीट यूजी की परीक्षा 2027 से कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में होगी. यानी, अब आपको पेन-पेपर वाले ओएमआर शीट भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि सीधे कंप्यूटर पर सवाल हल करने होंगे.
ये एक बड़ा शिफ्ट है, क्योंकि अभी तक नीट यूजी पेन-पेपर मोड में ही होता आया है. एजेंसी का प्लान है कि ये परीक्षा एक दिन में नहीं, बल्कि पांच से छह दिनों तक चलेगी.
अब आप सोचिए, इतने सारे छात्र हैं, तो परीक्षा कई दिनों में ही हो सकती है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट बताती है कि NTA इस परीक्षा को भारत और विदेशों के करीब 500 शहरों में लगभग 1,000 सेंटर्स पर कराने की तैयारी में है.
यानी, देशभर के लगभग हर बड़े शहर में एग्जाम सेंटर्स होंगे. भारत में, ये टेस्ट मुख्य रूप से केंद्रीय विद्यालयों समेत सरकारी संस्थानों में आयोजित होंगे.
अंदाजा है कि हर दिन करीब पांच लाख कैंडिडेट्स परीक्षा दे पाएंगे. कुल मिलाकर ये एक बहुत बड़ा लॉजिस्टिकल चैलेंज होगा, जिसे NTA मैनेज करने की कोशिश करेगा.
क्यों पड़ी इस बड़े बदलाव की जरूरत?
इस साल की शुरुआत में नीट यूजी के पेपर लीक को लेकर जो हंगामा हुआ था, वो सबको याद है. देश भर में छात्रों ने प्रदर्शन किए थे और सरकार पर सवाल उठे थे.
शिक्षा मंत्रालय ने तभी से परीक्षा सिस्टम में बड़े सुधारों की ठान ली थी. उसी कवायद का हिस्सा है, ये सीबीटी मोड में एग्जाम कराने का फैसला.
दरअसल, सीबीटी मोड में पेपर लीक की संभावना कम हो जाती है, क्योंकि इसमें फिजिकल पेपर की प्रिंटिंग और डिस्ट्रिब्यूशन की जरूरत नहीं पड़ती. सब कुछ डिजिटल होता है, जिससे सिक्योरिटी टाइट रहती है.
केवल परीक्षा के पैटर्न में ही बदलाव नहीं हो रहा, बल्कि केंद्र सरकार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के पुनर्गठन की भी तैयारी कर रही है. NTA ही नीट यूजी और कई दूसरी बड़ी राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाएं आयोजित कराता है.
इस पुनर्गठन का मकसद एजेंसी के संगठनात्मक ढांचे, उसके मूल स्वरूप, तकनीकी सिस्टम और परीक्षा प्रक्रिया को मजबूत करना है. इससे एग्जाम में निष्पक्षता और प्रभावशीलता लाने की उम्मीद है.
NTA को कानूनी दर्जा क्यों चाहिए?
एक और बड़ी बात जो सामने आ रही है, वो ये है कि संसद सदस्यों ने भी NTA को एक कानून के जरिए कानूनी दर्जा देने की सिफारिश की है. अभी NTA एक रजिस्टर्ड सोसाइटी के तौर पर काम करता है.
सांसदों का मानना है कि उसके पास वो कानूनी अधिकार, परमानेंट मैनपावर और इंस्टीट्यूशनल जवाबदेही नहीं है, जो एक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से उम्मीद की जाती है. हाल ही में संसद की स्थायी समिति की एक बैठक हुई, जिसमें इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई.
शिक्षा मंत्रालय और NTA के अधिकारियों ने सांसदों को 21 जून को हुई नीट यूजी की दोबारा परीक्षा के आयोजन और के. राधाकृष्णन कमिटी की सिफारिशों के बारे में जानकारी दी.
स्थायी समिति के सदस्यों का कहना है कि NTA को UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन) या AICTE (ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन) की तरह एक कानूनी संस्था में बदल देना चाहिए. अगर ऐसा होता है, तो NTA को ज्यादा अधिकार और जवाबदेही मिलेगी, जिससे परीक्षा कराने का काम और भी बेहतर तरीके से हो पाएगा.
2026 पेपर लीक का साया और आगे की राह
आपको याद होगा कि ये सारे प्रस्तावित सुधार 2026 के नीट यूजी पेपर लीक विवाद के बाद ही आए हैं. वो परीक्षा असल में 3 मई, 2026 को हुई थी, लेकिन क्वेश्चन पेपर लीक के आरोपों के बाद इसे कैंसिल करना पड़ा था.
बाद में 21 जून को करीब 22 लाख कैंडिडेट्स के लिए दोबारा परीक्षा हुई. इसी घटना ने सरकार और NTA को हिलाकर रख दिया था और मजबूर किया था कि वे परीक्षा सिस्टम को पूरी तरह से बदलें.
कुल मिलाकर, ये बड़े बदलाव मेडिकल एंट्रेस एग्जाम के लिए एक नए युग की शुरुआत कर सकते हैं. जहां एक तरफ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ेगा, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा और निष्पक्षता पर भी ज्यादा जोर रहेगा.
अब देखना होगा कि ये बदलाव जमीन पर कितने प्रभावी साबित होते हैं और क्या ये छात्रों के बीच विश्वास फिर से बहाल कर पाते हैं.



































