मुंबई: शेयर बाजार में आज जो हुआ, उसने निवेशकों की रातों की नींद उड़ा दी है। कल्पना कीजिए कि आप सुबह उठें और पता चले कि बाजार की एक बड़ी गिरावट ने निवेशकों की जेब से करीब 8 लाख करोड़ रुपये उड़ा दिए हैं। जी हां, आपने सही पढ़ा, ₹8 लाख करोड़ का भारी-भरकम लॉस।
मार्केट में आज ऐसा कोहराम मचा कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही पासा पलटते नजर आए। जब तक लोग अपनी पोजीशन सेट कर रहे थे, तब तक बाजार धड़ाम से नीचे गिर गया।
हालत यह थी कि सेंसेक्स का एक भी शेयर 'ग्रीन' यानी बढ़त में नहीं था। सब कुछ लाल निशान में था।
सबसे ज्यादा टेंशन की बात यह है कि यह गिरावट सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी से ठीक एक दिन पहले आई है। ऐसे समय में जब ट्रेडर्स को उम्मीद होती है कि मार्केट संभलेगा, तब इस तरह का क्रैश किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
आखिर बाजार में यह कोहराम क्यों मचा?
अब सवाल यह उठता है कि अचानक ऐसा क्या हो गया कि पूरा मार्केट लाल हो गया? दरअसल, इस बार वजह भारत के अंदर नहीं, बल्कि सात समंदर पार है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है।
ग्लोबल मार्केट में जब भी इन दो देशों के बीच खींचतान बढ़ती है, तो उसका सीधा असर इंडियन मार्केट पर पड़ता है। निवेशक घबरा जाते हैं और अपनी होल्डिंग्स बेचने लगते हैं।
इसी पैनिक सेल की वजह से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 2% से ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
अगर सेक्टर की बात करें, तो कोई भी सेक्टर सुरक्षित नहीं रहा। निफ्टी के लगभग सभी सेक्टर इंडेक्स लाल निशान में ट्रेड कर रहे थे।
मतलब, चाहे आईटी हो, बैंकिंग हो या फार्मा, हर तरफ सिर्फ गिरावट का ही शोर था।
निवेशकों पर क्या असर पड़ा?
जब बाजार 2% से ज्यादा टूटता है, तो वह सिर्फ कुछ अंकों की गिरावट नहीं होती, बल्कि करोड़ों रुपयों का नुकसान होता है। इस बार निवेशकों की दौलत में ₹8 लाख करोड़ से ज्यादा की कमी आई है।
यह रकम इतनी बड़ी है कि किसी को भी पसीने ला दे।
मार्केट के जानकारों का कहना है कि ग्लोबल क्यूज (Global Cues) की वजह से यह प्रेशर बढ़ा है। जब तक अमेरिका और ईरान के बीच का मामला शांत नहीं होता, तब तक मार्केट में इस तरह की अस्थिरता बनी रह सकती है।
हालांकि, कुछ लोग अब इस गिरावट को खरीदारी के मौके के तौर पर भी देख रहे हैं। खासकर आईटी शेयरों में जो तेजी की उम्मीद की जा रही है, उसे लेकर ट्रेडर्स के बीच चर्चा है कि क्या अब सही समय है दोबारा एंट्री लेने का।
फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में ग्लोबल हालात कैसे सुधरते हैं।






































