वैश्विक: दुनिया की अर्थव्यवस्था पहले ही कई मोर्चों पर चुनौतियों से जूझ रही है और ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने तो जैसे ग्लोबल मार्केट में भूचाल ही ला दिया। बुधवार का दिन था, जब ट्रंप ने अचानक ऐलान कर दिया कि ईरान के साथ जो ‘सीजफायर’ यानी अंतरिम शांति समझौता चल रहा था, वो अब खत्म हो चुका है। बस फिर क्या था, इस खबर के आते ही पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका तेज हो गई। इसका सीधा असर दिखा कमोडिटी मार्केट पर, जहां कच्चे तेल की कीमतों में तो जबरदस्त उछाल आ गया, वहीं सोना और चांदी अपनी चमक खो बैठे। यहां तक कि गोल्ड और सिल्वर ETF भी 3% तक टूट गए।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ट्रंप के एक बयान से इतना बड़ा मार्केट कैसे हिल गया और इन तीन अहम कमोडिटी, यानी कच्चा तेल, सोना और चांदी पर इसका क्या असर पड़ा? और सबसे बड़ा सवाल, क्या यह सिर्फ एक शुरुआती झटके वाली बात है या आने वाले दिनों में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं?
कच्चे तेल ने क्यों पकड़ी रफ्तार?
ट्रंप के बयान का सबसे पहला और जोरदार असर दिखा कच्चे तेल पर। ब्रेंट क्रूड देखते ही देखते 6% से ज्यादा उछलकर 78.56 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचा।
उधर, अमेरिकी WTI क्रूड में भी उतनी ही तेजी देखने को मिली। ट्रंप ने साफ-साफ कह दिया कि अब उन्हें ईरान के साथ किसी भी समझौते में कोई खास दिलचस्पी नहीं है।
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके प्रतिनिधि ईरान से बातचीत जारी रखेंगे, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि इस बातचीत से कोई ठोस नतीजा निकल पाएगा।
अब सवाल उठता है कि कच्चे तेल पर इस बयान का इतना गहरा असर क्यों हुआ? दरअसल, एनालिस्टों का मानना है कि पश्चिम एशिया में अगर तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा प्रभाव वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ सकता है। आप जानते ही हैं कि Hormuz Strait दुनिया के उन रास्तों में से एक है, जहां से दुनिया के बड़े तेल निर्यातक देशों का एक बड़ा हिस्सा अपना तेल सप्लाई करता है।
अगर इस इलाके में कोई गड़बड़ी होती है, तो तेल टैंकरों की आवाजाही पर संकट आ सकता है, जिससे दुनियाभर में तेल की कमी हो सकती है और कीमतें आसमान छू सकती हैं।
सोना और चांदी की चमक क्यों फीकी पड़ी?
आमतौर पर जब भी भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो सोने को एक ‘सेफ हेवन’ यानी सुरक्षित निवेश माना जाता है। निवेशक घबराहट में शेयर बाजार या बाकी एसेट्स से पैसा निकालकर सोने में लगाते हैं।
लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग ही नजर आई। तेल की कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी हुई, जिससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हो गई।
अगर महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिका का केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व, ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंची बनाए रख सकता है। और तो और, जरूरत पड़ने पर वे ब्याज दरों को बढ़ा भी सकते हैं।
अब आप सोचिए, जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो गोल्ड जैसे एसेट में निवेशकों की दिलचस्पी कम हो जाती है, क्योंकि सोने पर कोई ब्याज तो मिलता नहीं। लोग ऐसे निवेश की ओर देखते हैं, जहां उन्हें ऊंचा रिटर्न मिले।
बस यही वजह रही कि स्पॉट गोल्ड में 1.4% और अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में 2.3% तक की गिरावट दर्ज की गई। चांदी भी अकेली नहीं थी; स्पॉट सिल्वर 2.6%, प्लैटिनम 4.1% और पैलेडियम तो 4.9% तक लुढ़क गया।
भारतीय बाजार में भी, यानी MCX पर भी, ग्लोबल मार्केट जैसा ही ट्रेंड देखने को मिला। गोल्ड में 1.40% और सिल्वर में करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई।
यह दिखाता है कि इस बार मार्केट ने ‘सेफ हेवन’ वाली सोच से हटकर महंगाई के जोखिम को ज्यादा गंभीरता से लिया है।
एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?
इस पूरे घटनाक्रम पर मार्केट एक्सपर्ट्स की भी नजर है। Esquire Capital Investment Advisors के CEO सम्राट दासगुप्ता ने इस स्थिति पर अपनी राय दी।
उनका कहना है कि बाजार में फिलहाल जो कुछ भी दिख रहा है, वह घबराहट में हुई बिकवाली का नतीजा है। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, जाहिर तौर पर भारत, यूरोप और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों पर दबाव बना रहा है।
हालांकि, दासगुप्ता का यह भी मानना है कि यह सिर्फ शुरुआती प्रतिक्रिया है। उनका अनुमान है कि आने वाले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार फिर से स्थिर हो सकता है।
फिलहाल, निवेशकों की नजर ईरान से जुड़े घटनाक्रमों, विभिन्न कंपनियों के तिमाही नतीजों और उनके मैनेजमेंट की टिप्पणियों पर बनी रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मार्केट इस शुरुआती झटके से जल्दी उबर पाएगा या नहीं।
गोल्ड, सिल्वर और क्रूड पर आगे क्या रुख दिख सकता है?
अब बात करते हैं भविष्य की। Choice Broking के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर मकदा का कहना है कि सोने में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली है।
यह संकेत दे रहा है कि बाजार में फिलहाल बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
उनका यह भी मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति स्थिर नहीं हो जाती और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो जाती, तब तक सोना और चांदी दबाव में रह सकते हैं। वहीं, कच्चे तेल में शॉर्ट टर्म में तेजी बनी रह सकती है, खासकर अगर सप्लाई से जुड़ी चिंताएं बनी रहती हैं।
यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ अपने रुख पर क्या स्टैंड लेता है और ग्लोबल इकोनॉमी इन बदलावों को कैसे एडजस्ट करती है।




































