अंकारा: मिडिल ईस्ट में आग फिर से भड़कने वाली है, ऐसा लग रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इस कदर बढ़ गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ-साफ कह दिया है कि ईरान के साथ जो समझौता और सीजफायर अब तक चल रहा था, वो मेरे लिए अब 'खत्म' हो चुका है।
सोचिए, ये कोई छोटी बात नहीं है। जब दुनिया के सबसे ताकतवर देश का राष्ट्रपति खुलेआम ऐसी बात कहे, तो उसके मायने बहुत गहरे होते हैं।
ट्रंप ने अंकारा में चल रहे नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान नाटो महासचिव मार्क रुटे के साथ खड़े होकर ईरान पर जमकर भड़ास निकाली।
आखिर ट्रंप को इतना गुस्सा क्यों आया?
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव अब पूरी तरह से कूटनीतिक युद्ध में तब्दील हो चुका है। पिछले कुछ हफ्तों से दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें आ रही हैं, जिसने पूरे मिडिल ईस्ट की शांति भंग कर रखी है।
ट्रंप का यह बयान इस आग में घी डालने जैसा है, क्योंकि अब उन्होंने बातचीत के दरवाजे बंद कर दिए हैं।
ट्रंप ने बड़े ही आक्रामक अंदाज में ईरान के लीडरशिप को लताड़ा। उन्होंने उन्हें 'झूठा', 'नीच' और 'सनकी' तक कह डाला।
आप समझ सकते हैं कि किसी देश के सर्वोच्च नेता के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कितना गंभीर है। ये साफ दिखाता है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान को लेकर अब आर-पार के मूड में है।
ट्रंप ने साफ लफ्जों में कहा, "जहां तक मेरा सवाल है, ईरान के साथ हुआ समझौता और सीजफायर अब खत्म हो चुका है।" ये एक तरह से ईरान को सीधी चेतावनी है कि अब अमेरिका अपनी मर्जी से कोई भी कदम उठा सकता है, क्योंकि उसे किसी समझौते की परवाह नहीं है।
क्या बातचीत के सारे रास्ते बंद हो गए?
ट्रंप के इस तेवर से तो यही लगता है कि अब बातचीत का कोई स्कोप नहीं बचा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन लोगों (ईरानी नेताओं) के साथ डील करने का अब कोई मतलब नहीं रह गया है, यह सिर्फ वक्त जाया करना है।
यानी, अगर ईरान बातचीत की पहल करेगा भी, तो अमेरिका उसे भाव नहीं देगा।
यह बात अपने आप में बहुत चिंताजनक है, क्योंकि जब कूटनीतिक रास्ते बंद हो जाते हैं, तो सैन्य विकल्प ही बचते हैं। ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि अमेरिका अब ईरान के खिलाफ और ज्यादा सख्त और सीधी सैन्य कार्रवाई का रुख अपना सकता है।
इससे इलाके में बड़े पैमाने पर तबाही का खतरा बढ़ गया है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर जोरदार बमबारी की थी। माहौल पहले से ही गर्म था और ट्रंप के इस ऐलान ने उसे और गर्म कर दिया है।
क्यों अचानक इतना बढ़ गया तनाव?
हाल ही में ईरान ने दावा किया था कि उसने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य सुविधाओं से जुड़े करीब 85 ठिकानों पर जवाबी हमला किया है। ईरान का कहना था कि यह हमला अमेरिका द्वारा उसके भीतर घुसकर 80 से ज्यादा ठिकानों को तबाह करने के विरोध में किया गया था।
यानी, दोनों तरफ से ताबड़तोड़ हमले हो रहे थे।
ये एक तरह से "जैसे को तैसा" वाली सिचुएशन थी, लेकिन अब ट्रंप ने इससे भी आगे बढ़कर 'समझौता खत्म' का ऐलान कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि अब अमेरिका बिना किसी रोक-टोक के ईरान के खिलाफ एक्शन ले सकता है।
ये एक खतरनाक मोड़ है, जो पूरे मिडिल ईस्ट के लिए अशांति और अस्थिरता का संकेत है।
मिडिल ईस्ट में पहले से ही कई तरह के जियोपॉलिटिकल चैलेंज हैं। सीरिया, यमन, इजरायल-फिलिस्तीन जैसे मुद्दों पर पहले से ही तनाव बना हुआ है।
ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव पूरी स्थिति को और भी बदतर बना सकता है। तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, और आर्थिक मोर्चे पर भी पूरी दुनिया को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
इस पूरे मामले पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं। देखना होगा कि ईरान इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और अमेरिकी प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।
लेकिन एक बात साफ है, मिडिल ईस्ट में शांति फिलहाल दूर की कौड़ी नजर आ रही है। अगले कुछ दिन इस इलाके के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
ट्रंप ने जिस तरह से ईरान के नेताओं पर निजी हमले किए हैं, उससे उनके बीच किसी भी तरह के रिश्ते की संभावना लगभग खत्म हो गई है। जब दो देशों के नेता एक-दूसरे को 'सनकी' कहने लगें, तो समझ लीजिए कि भरोसे का पुल पूरी तरह से टूट चुका है।
कुल मिलाकर, मौजूदा हालात बहुत ही संवेदनशील हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस ऐलान ने मिडिल ईस्ट में एक नए संघर्ष का खतरा बढ़ा दिया है, जिससे दुनिया भर में चिंता का माहौल है।
अब सब इस बात पर निर्भर करता है कि ईरान इस पर क्या कदम उठाता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तनाव को कम करने के लिए क्या प्रयास करता है।




































