लंदन: क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि किसी सर्विस को बंद करवाना, उसे शुरू करवाने से भी बड़ा सिरदर्द बन जाए? आपको लग रहा होगा कि ये तो आम बात है, लेकिन जब कोई बड़ी कंपनी जानबूझकर ऐसा करे, तो मामला गंभीर हो जाता है. ब्रिटेन की नामी ब्रॉडबैंड, टीवी और फोन सर्विस प्रोवाइडर कंपनी वर्जिन मीडिया के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है. कंपनी पर कस्टमर्स को कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल करने से रोकने के आरोप में 28 मिलियन पाउंड, यानी भारतीय रुपयों में करीब 295 करोड़ रुपये का तगड़ा जुर्माना लगा है. ये जुर्माना ब्रिटिश टेलीकॉम रेगुलेटर ऑफकॉम (Ofcom) ने लगाया है, जिसने कंपनी की जमकर क्लास लगाई है.
मामला साल 2022 की शुरुआत से 2024 के अंत तक का है. इन लगभग दो सालों में वर्जिन मीडिया ने लाखों कस्टमर्स की नाक में दम कर दिया था.
वो अपनी सर्विस से पीछा छुड़ाना चाहते थे, लेकिन कंपनी थी कि उन्हें निकलने का रास्ता ही नहीं दे रही थी. सोचिए, जब कोई कंपनी करोड़ों रुपये का जुर्माना झेल रही हो, तो उसने ग्राहकों को कितना परेशान किया होगा! ऑफकॉम के उपभोक्ता संरक्षण नियमों के तहत लगाया गया ये अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना है.
ऑफकॉम की जांच में जो बातें सामने आईं, वो चौंकाने वाली हैं. पता चला कि वर्जिन मीडिया ने ग्राहकों को रोकने के लिए कई तिकड़में आजमाईं.
इससे लाखों कस्टमर या तो अपनी सर्विस बंद नहीं करा पाए या फिर उन्हें दूसरे प्रोवाइडर के पास स्विच करने में बेवजह की देरी हुई. ये तो सरासर ग्राहकों के हक का हनन है, नहीं?
ग्राहकों को क्या-क्या झेलना पड़ा?
जिन ग्राहकों ने अपनी वर्जिन मीडिया सर्विस को कैंसिल करने की कोशिश की, उन्हें एक के बाद एक कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. ऑफकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने जानबूझकर ग्राहकों के कॉल डिसकनेक्ट किए.
उन्हें एक डिपार्टमेंट से दूसरे डिपार्टमेंट में, फिर दूसरे से तीसरे में, ऐसे ही बेवजह ट्रांसफर किया जाता रहा. सोचिए, एक कस्टमर घंटों फोन पर अटका रहता था, सिर्फ ये जानने के लिए कि उसकी रिक्वेस्ट कब पूरी होगी.
कस्टमर्स को लंबी-लंबी होल्ड पर रखा जाता था और एक बार कहने पर भी उनकी कैंसिलेशन रिक्वेस्ट को प्रोसेस नहीं किया जाता था. कई बार तो ग्राहकों को अपनी सर्विस बंद करवाने के लिए एक से ज्यादा बार रिक्वेस्ट करनी पड़ती थी, तब जाकर कहीं बात आगे बढ़ती थी.
ये बिल्कुल वैसा ही था जैसे आप किसी भूलभुलैया में फंस जाएं और निकलने का कोई रास्ता ही न मिले.
आखिर कंपनी ऐसा क्यों कर रही थी?
सवाल ये उठता है कि कोई कंपनी अपने ही ग्राहकों को इतनी बुरी तरह क्यों परेशान करेगी? ऑफकॉम की जांच में इसका भी खुलासा हुआ. वर्जिन मीडिया के पास एक "टू-टियर रिटेंशन सिस्टम" था.
मतलब, फ्रंटलाइन पर बैठे कर्मचारी सीधे तौर पर कैंसिलेशन की रिक्वेस्ट को प्रोसेस नहीं कर सकते थे. इसके लिए कस्टमर को एक खास "स्पेशलिस्ट टीम" के पास ट्रांसफर करना पड़ता था.
लेकिन असल दिक्कत सिर्फ सिस्टम की नहीं थी. ऑफकॉम को ये भी पता चला कि वर्जिन मीडिया के कर्मचारियों के लिए एक कमीशन स्कीम चलती थी.
इस स्कीम में एजेंटों को ग्राहकों को रोके रखने के लिए इनाम दिया जाता था. साफ-साफ कहें तो, उन्हें ग्राहकों का कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल होने से रोकने पर पैसे मिलते थे.
अब जब कर्मचारियों को ग्राहकों को रोकने के लिए फाइनेंशियल इंसेंटिव मिलेगा, तो जाहिर है वे अपना पूरा जोर लगाएंगे कि ग्राहक उनका साथ छोड़कर न जाए, भले ही इसके लिए उन्हें गलत तरीकों का इस्तेमाल करना पड़े.
फिर ऑफकॉम ने क्या कहा?
ऑफकॉम ने इस पूरे मामले को बहुत गंभीरता से लिया है. इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी की ग्रुप डायरेक्टर नताली ब्लैक ने कहा, "आज हम यह साफ संदेश दे रहे हैं कि कोई भी प्रोवाइडर जो जानबूझकर अपने ग्राहकों के हितों के खिलाफ काम करेगा, उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.
" उन्होंने आगे बताया कि ऑफकॉम ने "वन टच स्विच प्रोसेस" नाम की एक नई व्यवस्था भी लागू की है. इसका मकसद ये सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी धांधली फिर कभी न हो सके.
ये 'वन टच स्विच प्रोसेस' ग्राहकों के लिए सर्विस प्रोवाइडर बदलना बहुत आसान बना देगा. उम्मीद की जा रही है कि इससे टेलीकॉम कंपनियां ग्राहकों को रोकने के लिए बेवजह की अड़चनें पैदा नहीं कर पाएंगी और ग्राहकों को अपने हिसाब से सर्विस चुनने की पूरी आजादी मिलेगी.
कुल मिलाकर, ऑफकॉम ने वर्जिन मीडिया पर कार्रवाई करके एक नजीर पेश की है कि ग्राहकों को परेशान करना अब किसी भी कंपनी को महंगा पड़ सकता है.




































