मुंबई: बैंकिंग सेक्टर में आजकल खूब उठा-पटक देखने को मिल रही है। कभी कोई बैंक किसी और बैंक के धुरंधर को अपने पाले में खींच रहा है, तो कभी टॉप लेवल पर ऐसे इस्तीफे हो रहे हैं जो पूरे मार्केट में खलबली मचा देते हैं। कुछ ऐसी ही बड़ी खबर अब देश के तीसरे सबसे बड़े प्राइवेट बैंक, एक्सिस बैंक से आ रही है, जिसने पूरे फाइनेंशियल गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
दरअसल, एक्सिस बैंक के तीन बड़े और सीनियर एग्जीक्यूटिव्स ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ये ऐसे नाम हैं जिनकी बैंक में एक मजबूत पकड़ थी और जिनका काम सीधे बैंक के बड़े-बड़े डील्स और मार्केट में पोजीशन से जुड़ा था।
अब सवाल ये है कि आखिर एक साथ इतने बड़े अधिकारी क्यों बैंक छोड़ रहे हैं, और इसका बैंक के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा?
बता दें कि ये सिर्फ एक इस्तीफा नहीं है, बल्कि एक बड़ा फेरबदल है, जो ऐसे समय में हो रहा है जब पूरे प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में बड़े पैमाने पर मैनेजमेंट लेवल पर चेंज देखने को मिल रहा है। हाल ही में, एचडीएफसी बैंक ने एक्सिस बैंक से पुनीत शर्मा को अपना चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) बनाया था।
इसके अलावा बंधन बैंक के CFO राजीव मंत्री ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में एक्सिस बैंक के इन इस्तीफों ने माहौल को और गरमा दिया है।
किन तीन बड़े चेहरों ने एक्सिस बैंक को अलविदा कहा है?
न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन तीन सीनियर एग्जीक्यूटिव्स ने एक्सिस बैंक से इस्तीफा दिया है, उनके नाम हैं:
- अनिल अग्रवाल: ये प्रेसिडेंट और ग्रुप हेड (इंस्टीट्यूशनल क्लाइंट्स कवरेज) थे। आसान भाषा में समझें तो, सरकारी एंटिटीज, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स और बड़े वित्तीय संस्थानों के साथ बैंक के रणनीतिक संबंधों को संभालने की जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर थी।
- विकास शिंदे: इन्होंने बैंक की डेट कैपिटल मार्केट टीम को लीड किया था। यानी, कंपनियों और संस्थाओं को कर्ज बाजार से पैसे जुटाने में मदद करने वाले अहम काम में इनकी महारत थी।
- जिमी तावड़िया: ये ग्रुप हेड (ट्रेडिंग) थे। इन्हें रेट्स और फॉरेक्स ट्रेडिंग यानी विदेशी मुद्रा और ब्याज दरों से जुड़े सौदों में खास एक्सपर्टीज हासिल थी।
ये तीनों ही दिग्गज ऐसे समय में बैंक छोड़ रहे हैं जब एक्सिस बैंक अपने कॉरपोरेट बैंकिंग और दूसरी टीमों में अहम पदों को फिर से ऑर्गेनाइज कर रहा है। यानी, बैंक के अंदर कुछ बड़ा रीस्ट्रक्चरिंग चल रहा है, जिसका नतीजा इन इस्तीफों के रूप में सामने आया है।
इन अधिकारियों का एक्सिस बैंक में क्या रोल था और कितने समय से जुड़े थे?
इन तीनों अधिकारियों का एक्सिस बैंक में लंबा और प्रभावशाली करियर रहा है। अगर इनके लिंक्डइन प्रोफाइल को देखें, तो कहानी कुछ और साफ होती है:
अनिल अग्रवाल: इनकी बैंक के साथ यात्रा दो दशक से भी ज्यादा पुरानी है। सोचिए, दो दशक! इन्होंने सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और बड़ी वित्तीय संस्थाओं के साथ बैंक के संबंधों को बहुत मजबूती से संभाला। उनकी भूमिका सिर्फ क्लाइंट कवरेज तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे बैंक के लिए बड़े और अहम बिज़नेस डील्स लाने में भी महत्वपूर्ण थे। ऐसे में उनका जाना बैंक के इंस्टीट्यूशनल क्लाइंट्स के साथ रिश्तों पर असर डाल सकता है, ये बात तो तय है।
विकास शिंदे: ये भी लगभग दो दशकों से एक्सिस बैंक के साथ थे। इनकी मुख्य जिम्मेदारी डेट कैपिटल मार्केट टीम में थी, जहां वे कंपनियों और सरकार को बॉन्ड और अन्य डेट इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए फंड जुटाने में मदद करते थे। ब्लूमबर्ग की लीग टेबल के मुताबिक, एक्सिस बैंक पिछले करीब बीस सालों से भारत का टॉप रुपया बॉन्ड अरेंजर रहा है। इस सफलता में विकास शिंदे जैसे दिग्गजों का बड़ा हाथ रहा होगा। उनका जाना बैंक की इस मजबूत स्थिति के लिए एक चैलेंज बन सकता है।
जिमी तावड़िया: जिमी साल 2019 में एक्सिस बैंक से जुड़े थे। ये अपेक्षाकृत नए थे लेकिन इन्होंने तेजी से अपनी जगह बनाई। रेट्स और फॉरेक्स ट्रेडिंग में इनकी महारत थी, जो बैंक के ट्रेजरी ऑपरेशंस के लिए बहुत क्रिटिकल होती है। इनकी देखरेख में बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार और ब्याज दरों से जुड़े जोखिमों को मैनेज करने और उनसे मुनाफा कमाने में अच्छा प्रदर्शन किया होगा। उनका इस्तीफा भी बैंक की ट्रेडिंग क्षमताओं पर थोड़ा असर डाल सकता है।
क्या ये सिर्फ एक संयोग है या प्राइवेट बैंकों में बड़े बदलाव की लहर?
ये एक बड़ा सवाल है। क्या इन तीनों का इस्तीफा महज एक संयोग है, या फिर यह प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में चल रही बड़े स्तर की मैनेजमेंट रीस्ट्रक्चरिंग का हिस्सा है? जैसा कि हमने ऊपर देखा, एचडीएफसी बैंक ने हाल ही में एक्सिस बैंक के ही पुनीत शर्मा को अपना सीएफओ बनाया था, और बंधन बैंक के सीएफओ ने भी इस्तीफा दिया है।
यह दिखाता है कि टॉप लेवल पर प्रतिभाओं का आवागमन तेजी से हो रहा है। बैंक अक्सर अपनी रणनीतियों को बदलते रहते हैं, और इन बदलावों के साथ कई बार सीनियर लीडरशिप में भी चेंज देखने को मिलते हैं।
एक्सिस बैंक ने पिछले कई सालों में भारतीय डेट मार्केट में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। ब्लूमबर्ग की लीग टेबल बताती है कि बैंक लगभग दो दशकों से भारत का टॉप रुपया बॉन्ड अरेंजर रहा है, यानी सबसे ज्यादा कंपनियों और संस्थाओं को रुपया बॉन्ड के जरिए पैसा जुटाने में मदद की है।
इतना ही नहीं, इस साल अब तक रुपया लोन की लीग टेबल में भी बैंक पहले पायदान पर खड़ा है। ये आंकड़े बैंक की मार्केट में मजबूत पकड़ को दिखाते हैं।
ऐसे में जब बैंक इतने मजबूत पोजीशन में है, तब इन तीन सीनियर एग्जीक्यूटिव्स का इस्तीफा देना अपने आप में एक बड़ी बात है। बैंक के कॉर्पोरेट बैंकिंग और अन्य टीमों के पुनर्गठन की बात कही गई है, जो शायद इन इस्तीफों की वजह हो सकती है।
इसका मतलब है कि बैंक अपनी कार्यप्रणाली और रणनीतियों में कुछ बड़े बदलाव लाने की तैयारी में है, जिसका असर आगे चलकर बैंक की परफॉरमेंस और मार्केट पोजीशन पर देखने को मिल सकता है। आने वाले समय में ये देखना दिलचस्प होगा कि एक्सिस बैंक इन खाली हुई जगहों को कैसे भरता है और अपनी नई रणनीति के साथ मार्केट में किस तरह से आगे बढ़ता है।



































