नई दिल्ली: नौकरीपेशा लोगों के लिए पेंशन का फंडा हमेशा से थोड़ा कन्फ्यूज़िंग रहा है। लोग समझते हैं कि बस 10 साल काम कर लिया, तो पेंशन की मौज हो जाएगी, लेकिन भैया, इसमें कुछ छोटे-छोटे पेंच हैं, जिन्हें समझना बहुत जरूरी है। अब तो श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 29 जून को ‘एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) 2026’ को नोटिफाई कर दिया है। इसके साथ ही, सालों से चली आ रहीं EPS-1995 और 1971 फैमिली पेंशन स्कीम की जगह अब नई EPS-2026 ने ले ली है। ऐसे में देश के करीब 6 करोड़ EPFO सदस्यों के मन में सवालों का एक सैलाब उमड़ पड़ा है कि क्या अब पेंशन के नियम बदल गए हैं? क्या अब ज्यादा पेंशन मिलेगी? या फिर रिटायरमेंट की जो प्लानिंग की थी, उसमें कुछ बदलाव करना पड़ेगा?
आपकी इन सभी टेंशन का जवाब आज हम आपको बिल्कुल आसान भाषा में देंगे। पहले तो राहत की एक बड़ी खबर जान लीजिए।
मंथली पेंशन निकालने का फॉर्मूला और 10 साल की न्यूनतम सर्विस वाला नियम, ये दोनों ही पहले जैसे ही रखे गए हैं। इनमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
लेकिन फिर भी, बहुत से लोग नौकरी बदलते समय या कुछ और वजहों से ऐसी गलतियां कर जाते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें बुढ़ापे में कम पेंशन या पेंशन न मिलने के रूप में भुगतना पड़ता है। इसलिए, आज हम समझेंगे कि इस पूरी स्कीम का गणित क्या है और आपको क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
तो, क्या पेंशन के सारे नियम बदल गए हैं?
अगर आपके मन में ये सवाल है कि नई EPS-2026 आने से क्या पूरा सिस्टम ही बदल गया है, तो इसका सीधा जवाब है – नहीं, पूरी तरह नहीं। अच्छी बात ये है कि EPFO ने अपने कोर रूल्स में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है।
यानी, पेंशन की गणना का तरीका और कम से कम 10 साल की नौकरी का नियम पहले की तरह ही है। ये उन लाखों कर्मचारियों के लिए राहत की बात है, जो अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर थोड़ा चिंतित थे।
EPS-2026 दरअसल पुराने नियमों को ही एक नए ढांचे में फिट करता है, खासकर उन सदस्यों के लिए जो पहली बार स्कीम में शामिल हो रहे हैं या जिनकी सर्विस अभी शुरू हुई है।
EPS का मुख्य उद्देश्य है, रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को एक नियमित आय देना, ताकि उन्हें बुढ़ापे में किसी पर निर्भर न रहना पड़े। यह एक तरह की सामाजिक सुरक्षा स्कीम है, जो कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करती है।
पेंशन के लिए कितने साल की सर्विस जरूरी है?
ये एक बड़ा सवाल है जिसका सीधा और स्पष्ट जवाब होना बहुत जरूरी है। अगर आप EPS के तहत हर महीने पेंशन पाना चाहते हैं, तो सबसे पहली और सबसे अहम शर्त है कि आपको कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य नौकरी (Pensionable Service) पूरी करनी होगी।
इसके बाद, जब आपकी उम्र 58 साल पूरी हो जाएगी, तब आपको हर महीने पेंशन मिलनी शुरू हो जाएगी।
लेकिन मान लीजिए कि आप 58 साल का इंतजार नहीं करना चाहते और आपको थोड़ी जल्दी पेंशन की जरूरत है, तो क्या कोई विकल्प है? बिल्कुल है! आप 50 साल की उम्र पूरी होने के बाद भी पेंशन ले सकते हैं, लेकिन उस सूरत में आपको थोड़ी कम पेंशन मिलेगी, जिसे 'अर्ली पेंशन' कहते हैं। यह एक फ्लेक्सिबिलिटी है जो EPFO अपने सदस्यों को देता है।
अब बात करते हैं उस स्थिति की, जब आपने 10 साल की नौकरी पूरी नहीं की। अगर आप किसी कारण से 10 साल की सर्विस पूरी नहीं कर पाते हैं, तो आपको हर महीने पेंशन नहीं मिलेगी।
ऐसे में आपके पास दो विकल्प होते हैं: पहला, आप EPS में जमा अपना पैसा निकाल लें। दूसरा, अगर आप भविष्य में फिर से नौकरी करते हैं, तो आप ‘स्कीम सर्टिफिकेट’ लेकर आगे की नौकरी में अपनी पुरानी सर्विस को जोड़ सकते हैं।
यह सर्टिफिकेट आपकी पुरानी सर्विस का प्रूफ होता है और इसे संभाल कर रखना बेहद जरूरी है।
अपनी मासिक पेंशन कैसे कैलकुलेट करें?
अब आते हैं सबसे अहम पॉइंट पर – आखिर आपकी पेंशन बनेगी कितनी? EPFO एक खास फॉर्मूले के आधार पर आपकी मासिक पेंशन तय करता है। ये फॉर्मूला कुछ ऐसा है:
मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70
अब इस फॉर्मूले को थोड़ा और समझते हैं। यहां 'पेंशन योग्य वेतन' का मतलब है, आपके आखिरी 60 महीनों (यानी पिछले पांच साल) के औसत मूल वेतन (Basic Salary) और महंगाई भत्ते (DA) से।
अब इसमें एक ट्विस्ट है – ज्यादातर कर्मचारियों के लिए इसकी अधिकतम सीमा 15,000 रुपये प्रति माह मानी जाती है। इसका मतलब है कि भले ही आपकी सैलरी 50,000 रुपये या 1 लाख रुपये हो, पेंशन की गणना के लिए अधिकतम 15,000 रुपये ही माने जाएंगे।
यह नियम बहुत से लोगों को शायद पसंद न आए, लेकिन ये फिलहाल का सिस्टम है।
वहीं, 'पेंशन योग्य सेवा' का मतलब है कि आपने कितने साल तक EPFO में योगदान किया है। याद रखिए, इसमें आपकी सर्विस के वे साल ही गिने जाएंगे, जिनमें आपने EPF में नियमित रूप से योगदान किया है।
15,000 रुपये सैलरी पर कितनी पेंशन मिलेगी?
चलिए, इस फॉर्मूले को एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपकी पेंशन योग्य सैलरी की अधिकतम सीमा यानी 15,000 रुपये है।
अब इस पर अलग-अलग सर्विस पीरियड के हिसाब से पेंशन का हिसाब लगाते हैं:
- 10 साल की नौकरी पर: (15,000 रुपये × 10 साल) ÷ 70 = 2,142.85 रुपये, जो लगभग 2,143 रुपये महीने की पेंशन बनती है।
- 20 साल की नौकरी पर: (15,000 रुपये × 20 साल) ÷ 70 = 4,285.71 रुपये, जो लगभग 4,286 रुपये महीने की पेंशन होगी।
- 35 साल की अधिकतम पेंशन योग्य सेवा पर: (15,000 रुपये × 35 साल) ÷ 70 = 7,500 रुपये प्रति माह पेंशन मिलेगी।
आप देख सकते हैं कि यह रकम भले ही बहुत ज्यादा न लगे, लेकिन यह एक जीवनभर मिलने वाली गारंटीड पेंशन होती है। जितनी लंबी आपकी सेवा होगी, उतनी ही ज्यादा पेंशन आपको मिलेगी।
यह एक फिक्स्ड इनकम है जो महंगाई की मार से थोड़ी राहत दे सकती है, भले ही इसकी वैल्यू समय के साथ कम होती रहे।
न्यूनतम पेंशन का क्या हिसाब है और क्या ये बढ़ रही है?
फिलहाल, EPS के तहत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये प्रति माह ही तय की गई है। इसका मतलब क्या है? इसका मतलब ये है कि अगर 10 साल की नौकरी के बाद आपके फॉर्मूले के हिसाब से पेंशन 1,000 रुपये से कम बनती है, जैसे कि मान लीजिए 500 रुपये बनती है, तो बाकी के 500 रुपये की भरपाई सरकार करेगी।
यानी आपको हर हाल में कम से कम 1,000 रुपये तो मिलेंगे ही।
लेकिन क्या 1,000 रुपये आज के समय में पर्याप्त हैं? ये एक ऐसा सवाल है जो बरसों से उठ रहा है। पेंशनधारकों का कहना है कि महंगाई जिस तेजी से बढ़ी है, उसमें 1,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन किसी भी सूरत में पर्याप्त नहीं है।
कई संगठनों ने लंबे समय से न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 5,000 रुपये से 7,500 रुपये करने की मांग की है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है।
यह मांग अभी भी विचाराधीन है और देखना होगा कि भविष्य में इस पर क्या निर्णय लिया जाता है।
कुल मिलाकर, जब भी आप नौकरी बदलें, तो एक बात गांठ बांध लें कि EPF और EPS को नई नौकरी में ट्रांसफर कराना बेहद जरूरी है। यही एक गलती है, जो आपकी पेंशन पर भारी पड़ सकती है।
अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपकी पुरानी सर्विस का लाभ आपको नहीं मिल पाएगा और पेंशन का सपना अधूरा रह सकता है। अपनी सर्विस को जोड़ने से ही आप लंबे समय में ज्यादा पेंशन के हकदार बन पाएंगे।



































