नई दिल्ली: घर की रसोई अब सिर्फ स्वादिष्ट पकवान ही नहीं, बल्कि जेब पर भारी पड़ने वाला एक बड़ा खर्च भी बनती जा रही है। अगर आप भी बीते कुछ महीनों से महसूस कर रहे हैं कि दाल-रोटी का हिसाब बिगड़ रहा है, तो आप अकेले नहीं हैं। जून का महीना आते-आते शाकाहारी और नॉन-वेज, दोनों ही तरह की थालियां पिछले पांच महीनों के सबसे ऊंचे दामों पर जा पहुंची हैं। सोचिए, एक आम घर का बजट कैसे संभाला जाए, जब रोजमर्रा का खाना ही इतना महंगा हो जाए?
ये कोई सिर्फ आपका अनुभव नहीं है, बल्कि Crisil Intelligence की 'रोटी राइस रेट' नाम की एक मासिक रिपोर्ट ने इस बात पर मुहर लगा दी है। इस रिपोर्ट ने साफ-साफ बता दिया है कि जून में आपके किचन का बजट क्यों हिल गया।
इसकी सबसे बड़ी वजहें बनीं टमाटर, प्याज, खाने का तेल, रसोई गैस (LPG) और ब्रॉयलर चिकन की बढ़ती कीमतें।
चलिए, आंकड़ों पर भी थोड़ी नज़र डाल लेते हैं। जून में एक शाकाहारी थाली की औसत कीमत 28.4 रुपये रही, जबकि मई में यही थाली 27.4 रुपये की थी।
यानी, महीने-भर में करीब 4% का इजाफा! और अगर जून 2025 से तुलना करें, तो यह आंकड़ा 5% ज्यादा है। नॉन-वेज थाली की बात करें, तो इसकी कीमत 58.2 रुपये तक पहुंच गई, जबकि मई में यह 56.5 रुपये थी।
यहां भी मासिक आधार पर 3% और सालाना आधार पर 6% की बढ़ोतरी देखने को मिली है। साफ है कि थाली का हिसाब गड़बड़ा गया है।
आखिर क्यों महंगी हुई घर की थाली?
सवाल उठता है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ जो आपकी थाली इतनी महंगी हो गई? Crisil की रिपोर्ट एक-एक चीज़ का हिसाब देती है। महंगाई की इस रेस में अगर किसी ने सबसे आगे बढ़कर झंडा गाड़ा है, तो वो है टमाटर!
टमाटर की कीमतें बीते एक साल में 31% उछलकर 42 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं। सोचिए, पिछले साल जून 2025 में जो टमाटर 32 रुपये किलो था, वह अब सीधा 42 रुपये पर पहुंच गया है।
इसकी सीधी-सी वजह है मौसम की मार। फरवरी और मार्च में भयंकर गर्मी पड़ी, जिसकी वजह से गर्मियों की फसल की बुवाई देर से हुई और नतीजतन, इसका उत्पादन भी कम रहा।
जब बाजार में चीज़ कम आएगी, तो दाम तो बढ़ेंगे ही ना?
टमाटर के बाद नंबर आता है प्याज का। प्याज की कीमतें भी सालाना आधार पर 2% बढ़ी हैं।
ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बाजार में जो रबी की फसल वाला महंगा स्टॉक आया, उसने दाम बढ़ा दिए। यानी, किसान की फसल तैयार होने में देरी और फिर ऊंचे दाम पर बिकना, इसका सीधा असर आपकी रसोई पर पड़ा।
पेट्रोल-डीजल की तरह क्यों बढ़ी खाद्य तेल और LPG की कीमतें?
सिर्फ सब्जियां ही नहीं, आपके खाने का तेल और रसोई गैस (LPG) सिलेंडर भी पीछे नहीं रहे। इन दोनों की कीमतों में सालाना 10-10% की बढ़ोतरी देखी गई है।
अब आप कहेंगे कि ये तो सरकार के हाथ में होता है! बता दें कि इसकी एक बड़ी वजह पश्चिमी एशिया में चल रहे तनाव भी बताया जा रहा है। वहां की अस्थिरता के चलते सप्लाई चेन पर असर पड़ता है, जिसका नतीजा ये होता है कि भारत जैसे देशों में तेल और गैस महंगे हो जाते हैं।
मई के मुकाबले जून में देखें तो, टमाटर 17% महंगा हुआ, आलू 5% और प्याज 8% महंगे हो गए। इन तीनों ने मिलकर शाकाहारी थाली की लागत को और बढ़ा दिया।
हालांकि, आलू की कीमतों में 14% की गिरावट देखने को भी मिली है, क्योंकि बाजार में नई रबी फसल आ गई थी। इसने कुछ हद तक थाली की लागत में बढ़ोतरी को काबू में रखा, वरना स्थिति और भी बिगड़ सकती थी।
नॉन-वेज खाने वालों की जेब पर क्या असर पड़ा?
अगर आप नॉन-वेज खाने के शौकीन हैं, तो आपकी थाली पर महंगाई का अटैक और भी जोरदार रहा है। नॉन-वेज थाली की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह रहा ब्रॉयलर चिकन।
Crisil की रिपोर्ट कहती है कि ब्रॉयलर चिकन की कीमत सालाना आधार पर करीब 7% बढ़ी, वहीं महीनेभर में भी इसमें करीब 2% की तेजी आई।
Crisil के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नॉन-वेज थाली की कुल लागत का लगभग आधा हिस्सा सिर्फ ब्रॉयलर चिकन पर निर्भर करता है। यानी, अगर चिकन महंगा होता है, तो सीधी-सी बात है कि पूरी थाली का बजट ही बिगड़ जाता है।
चिकन महंगा क्यों हुआ? फिर वही मौसम का खेल! भीषण गर्मी की वजह से चिकन की सप्लाई कम रही, जिसका नतीजा ये हुआ कि कीमतें आसमान छूने लगीं। जब सप्लाई कम होगी और डिमांड ज्यादा, तो दाम तो बढ़ने ही हैं।
कुल मिलाकर, जून का महीना घर के बजट के लिए एक चुनौती भरा रहा है। आम आदमी की जेब पर सब्जियों से लेकर तेल, गैस और चिकन तक, हर चीज़ ने बोझ डाला है।
महंगाई का ये दौर कब थमेगा, ये देखने वाली बात होगी, लेकिन फिलहाल तो हर घर में रसोई के खर्चों को मैनेज करना एक बड़ा टास्क बन गया है।



































