दिल्ली: कभी भारतीय जनता पार्टी ने जिसे 'शीश महल' कहकर खूब सियासी शोर मचाया था, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का वो पुराना घर अब एक नए अवतार में सामने आने वाला है। दिल्ली के 6, फ्लैगस्टाफ रोड स्थित इस बंगले को लेकर दिल्ली सरकार ने एक बड़ा और दिलचस्प फैसला लिया है। अब ये बंगला किसी एक शख्स का ठिकाना नहीं, बल्कि दिल्ली का भव्य 'स्टेट गेस्ट हाउस' और एक शानदार 'कल्चरल सेंटर' बनेगा।
जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना। जिस बंगले की मरम्मत और सजावट पर उठे विवाद ने दिल्ली की राजनीति में खूब भूचाल ला दिया था, अब उसी को लेकर एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।
ये सिर्फ एक इमारत का कायापलट नहीं है, बल्कि दिल्ली की मेहमान नवाज़ी और सांस्कृतिक पहचान को नया आयाम देने की तैयारी है।
तो आखिर ये 'शीश महल' विवाद में क्यों आया था?
इस बंगले की कहानी थोड़ी पीछे से शुरू होती है। ये बंगला अक्टूबर 2024 से खाली पड़ा है, जब अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद अपने परिवार के साथ इसे खाली किया था।
लेकिन खाली होने से पहले, इसके रेनोवेशन और सजावट पर हुए खर्च को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने खूब हंगामा मचाया।
बीजेपी ने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने अपने सरकारी आवास पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए और इसे 'शीश महल' बना डाला। ये नाम इतना चला कि 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने अपनी रैलियों और जनसभाओं में इस बंगले के छोटे-छोटे मॉडल तक दिखाए थे, ताकि पब्लिक को बता सकें कि ये कितनी आलीशान और 'लग्जरी' इमारत है।
इन तीखे हमलों और आरोपों के बीच, दिल्ली की राजनीति में खूब तकरार देखने को मिली थी।
अब इस विवादित बंगले का क्या होगा?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब दिल्ली सरकार इस बंगले के भविष्य को लेकर एक ठोस योजना पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें इस बंगले को 'स्टेट गेस्ट हाउस' और 'कल्चरल सेंटर' में बदलने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इस बैठक में लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे भवन की मौजूदा स्थिति का विस्तृत आकलन करें और जल्द से जल्द एक डिटेल्ड रिपोर्ट सौंपें। इसका मतलब है कि इस बड़े प्रोजेक्ट पर काम जल्द ही शुरू हो सकता है।
यह फैसला राजनीतिक गलियारों में पुरानी चर्चाओं पर विराम लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।
इस नए परिसर में क्या-क्या सुविधाएं होंगी?
प्रस्ताव के अनुसार, इस परिसर को एक आधुनिक स्टेट गेस्ट हाउस और सांस्कृतिक केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा। अब सवाल उठता है कि इसमें क्या-क्या खास सुविधाएं होंगी जो इसे दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाएंगी? इसकी योजना कुछ इस तरह से बनाई जा रही है:
- सबसे पहले तो, VIP और सरकारी मेहमानों के लिए बेहतरीन गेस्ट रूम बनाए जाएंगे। यानी, देश-विदेश से आने वाले महत्वपूर्ण मेहमानों को अब दिल्ली में रुकने के लिए एक शानदार और सुविधाजनक जगह मिलेगी, जो दिल्ली की अपनी होगी।
- आधिकारिक बैठकों और महत्वपूर्ण चर्चाओं के लिए एक बड़ा और सुसज्जित कॉन्फ्रेंस हॉल भी तैयार किया जाएगा। यह हॉल सरकारी कामकाज और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए एक केंद्रीय स्थान बन सकता है।
- इसके अलावा, एक विशाल ऑडिटोरियम यानी सभागार का निर्माण किया जाएगा। यहां कलात्मक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां (Exhibitions) और बड़े सरकारी समारोह आयोजित किए जा सकेंगे। यह सभागार दिल्ली की कला और संस्कृति को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा।
दिल्ली को अपने स्टेट गेस्ट हाउस की जरूरत क्यों है?
यह बात शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि दिल्ली के पास अपना कोई डेडिकेटेड स्टेट गेस्ट हाउस नहीं है। देश के दूसरे राज्यों से या विदेश से आने वाले महत्वपूर्ण मेहमानों को अक्सर या तो प्राइवेट होटलों में ठहराया जाता है, या फिर केंद्र सरकार के गेस्ट हाउस पर निर्भर रहना पड़ता है।
ऐसे में, दिल्ली सरकार का अपना एक स्टेट गेस्ट हाउस होना एक बड़ी और पुरानी जरूरत थी। यह सिर्फ मेहमानों को ठहराने की जगह नहीं होगी, बल्कि यह दिल्ली की पहचान, स्वायत्तता और गरिमा को भी बढ़ाएगी।
यह दिल्ली को अपने मेहमानों को अपने तरीके से सत्कार करने का मौका देगा।
रेनोवेशन पर हुए खर्च और एरिया बढ़ने का क्या विवाद था?
यह भी बता दें कि जब यह बंगला मुख्यमंत्री आवास था, तब इसके रेनोवेशन पर खूब बवाल हो चुका था। उस दौरान, बंगले का बना हुआ एरिया (बिल्ट-अप एरिया) एक-तिहाई से भी ज्यादा बढ़ गया था।
यह 1,397 वर्ग मीटर से बढ़कर 1,905 वर्ग मीटर हो गया था।
पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) ने भी इस प्रोजेक्ट के दौरान रेनोवेशन की शुरुआती लागत के अनुमानों में चार बार बदलाव किए थे। इन सभी बातों को लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया था और पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे।
अब इस बंगले को एक नए सार्वजनिक उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है, और उम्मीद है कि यह दिल्ली की नई पहचान बनेगा।








































