HDFC Bank, ICICI Bank और कोटक बैंक नोमुरा की टॉप बैंकिंग पिक्स, जानिए कैसा रहेगा जून तिमाही में प्रदर्शन
सारांश


मुंबई: अगर आप शेयर बाजार में रुचि रखते हैं या फिर बैंकों के कामकाज पर आपकी पैनी नज़र रहती है, तो जून तिमाही के नतीजे आपके लिए किसी बड़ी खबर से कम नहीं हैं। खासकर देश के तीन दिग्गज प्राइवेट बैंक — एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक। इन तीनों के नतीजों का इंतजार 18 जुलाई को खत्म होने वाला है और हर कोई यह जानना चाहता है कि इस बार उनकी परफॉर्मेंस कैसी रही है?
बाजार के जानकार और एनालिस्ट भी इन नतीजों पर अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। इसी कड़ी में एक बड़ी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने अपनी एक खास रिपोर्ट पेश की है, जिसने इन तीनों बैंकों को अपनी 'टॉप बैंकिंग पिक्स' में शामिल किया है।
अब जब नोमुरा जैसी फर्म कुछ कहती है, तो बाजार में हलचल होना लाज़मी है। तो आइए, डीटेल में समझते हैं कि ये रिपोर्ट क्या कह रही है और निवेशकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए।
नोमुरा की रिपोर्ट के मुताबिक, जून तिमाही में बैंकों की लोन ग्रोथ यानी कर्ज देने की रफ्तार ज़बरदस्त रहने वाली है। यह एक अच्छी खबर है, क्योंकि इसका मतलब है कि लोग और कंपनियां बाजार से पैसा उठा रहे हैं, जो आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने का संकेत है।
लेकिन हर अच्छी खबर के साथ एक छोटी सी 'टेंशन' भी होती है, और यहां वो टेंशन है नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव। आप सोच रहे होंगे, ये एनआईएम क्या बला है? आसान भाषा में समझें तो, बैंक जो लोन देते हैं उस पर उन्हें ब्याज मिलता है, और जो डिपॉज़िट लेते हैं उस पर ब्याज देना पड़ता है।
इन दोनों के बीच के अंतर को एनआईएम कहते हैं। अगर ये कम होता है, तो बैंकों की कमाई पर थोड़ा असर पड़ता है।
रिपोर्ट बताती है कि जिन बैंकों को नोमुरा कवर करती है, उनका प्रोविजनिंग से पहले ऑपरेट प्रॉफिट (PPOP) साल दर साल आधार पर 12 फीसदी तक बढ़ सकता है। इसमें सबसे बड़ा हाथ होगा नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 9 फीसदी की ग्रोथ का।
यानी बैंकों ने लोगों को कर्ज देकर ठीक-ठाक कमाई की है। साथ ही, ऑपरेटिंग खर्चों पर भी बैंकों ने अच्छा कंट्रोल दिखाया है, जो उनके प्रॉफिट को बढ़ाने में मदद करेगा।
अब सवाल ये कि जब PPOP बढ़ रहा है, तो फिर टैक्स के बाद का प्रॉफिट (PAT) सिर्फ 6 फीसदी ही क्यों बढ़ने का अनुमान है? दरअसल, इसके पीछे एक सीधा सा कारण है— क्रेडिट कॉस्ट। आमतौर पर, वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में बैंकों को कुछ ज्यादा 'क्रेडिट कॉस्ट' उठानी पड़ती है।
ये क्रेडिट कॉस्ट उन पैसों को कहते हैं, जो बैंक अपने उन लोन्स के लिए अलग रखते हैं, जिनके डिफॉल्ट होने का डर होता है। तो क्रेडिट कॉस्ट बढ़ने से, बेशक कमाई अच्छी हुई हो, लेकिन प्रॉफिट पर थोड़ा ब्रेक लगता दिख रहा है।
हालांकि, यह कोई बहुत चिंताजनक बात नहीं है, क्योंकि यह एक सामान्य पैटर्न है।
नोमुरा की रिपोर्ट ने ये भी बताया है कि जून तिमाही में लोन ग्रोथ भले ही मजबूत रही, लेकिन ज्यादातर बैंकों के एनआईएम में हल्की गिरावट देखी गई। हालांकि, फेडरल बैंक इस मामले में अपवाद रहा और उसने अच्छा प्रदर्शन किया।
वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा और एक्सिस बैंक के एनआईएम पर कुछ ज्यादा ही दबाव दिखा है। तो साफ है, लोन देकर पैसा कमाने की रफ्तार तो तेज़ है, लेकिन उसमें मिलने वाला मार्जिन थोड़ा सिकुड़ रहा है।
एक अच्छी खबर भी है! रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी बॉन्ड्स की यील्ड (यानी उन पर मिलने वाला रिटर्न) में नरमी से बैंकों की ट्रेजरी इनकम बढ़ सकती है। पिछली तिमाही में इस मोर्चे पर बैंकों को थोड़ा झटका लगा था, लेकिन अब माहौल बदलता दिख रहा है।
आप कहेंगे, ये ट्रेजरी इनकम क्या है? बैंक अपनी पूंजी का एक हिस्सा सरकारी बॉन्ड्स या दूसरे सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं। जब इन बॉन्ड्स की यील्ड में नरमी आती है, तो बैंक को उन पर अच्छा रिटर्न मिलता है, जिसे ट्रेजरी इनकम कहते हैं।
नोमुरा का साफ कहना है कि सरकारी बैंकों को इस नरमी का ज्यादा फायदा मिलने वाला है। तो अगर आप सरकारी बैंकों के शेयरहोल्डर हैं, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकती है।
अब बात करते हैं बैंकों की एसेट क्वालिटी की, जो किसी भी बैंक की रीढ़ होती है। नोमुरा का मानना है कि बैंकों की एसेट क्वालिटी स्टेबल बनी रहेगी।
इसका मतलब है कि बैंकों के फंसे हुए कर्ज़ (NPA) बढ़ने की आशंका कम है। इसकी एक बड़ी वजह है अनसेक्योर्ड रिटेल लोन और माइक्रोफाइनेंस लोन पर दबाव का कम होना।
ये वो छोटे-छोटे लोन होते हैं, जो अक्सर डिफॉल्ट होने की आशंका में रहते हैं। अगर उन पर दबाव कम हो रहा है, तो यह बैंक के लिए अच्छी बात है।
लेकिन हर अच्छी तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी होता है। नोमुरा ने इस वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही के लिए एक बड़े खतरे की तरफ इशारा किया है— मानसून में कम या असामान्य बारिश।
अगर ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर रूरल (ग्रामीण), एमएसएमई (छोटे और मध्यम उद्योग) और कमर्शियल व्हीकल लोन्स पर दिख सकता है। कल्पना कीजिए, अगर फसल अच्छी नहीं हुई तो किसान कर्ज कैसे चुकाएंगे? छोटे व्यापारी और ट्रांसपोर्टर कैसे कमाई करेंगे? तो, आने वाला मानसून बैंकों की सेहत के लिए बहुत मायने रखेगा।
18 जुलाई को नतीजों से पहले 8 जुलाई को बैंकिंग शेयरों पर थोड़ा दबाव देखने को मिला। एचडीएफसी बैंक का शेयर दोपहर 12:20 बजे करीब 0.28 फीसदी गिरकर 827 रुपये पर ट्रेड कर रहा था।
वहीं, आईसीआईसीआई बैंक का शेयर 1.07 फीसदी की कमजोरी के साथ 1,399 रुपये पर था। कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर में भी 1.02 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और वह 377.80 रुपये पर कारोबार कर रहा था।
कुल मिलाकर, इन तीनों दिग्गज बैंकों के शेयरों में गिरावट की वजह से पूरा बैंक निफ्टी भी 0.70 फीसदी नीचे था। बाजार में अक्सर नतीजों से ठीक पहले थोड़ी घबराहट या प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिलती है।
अब देखना होगा कि 18 जुलाई को जब ये बड़े बैंक अपने नंबर पेश करेंगे, तो बाजार इन पर कैसी प्रतिक्रिया देता है। क्या नोमुरा की ये पिक्स खरा उतरेंगी, या फिर बाजार कुछ और ही कहानी सुनाएगा? यह तो वक्त ही बताएगा।
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