माउंट प्लेज़ेंट, विस्कॉन्सिन: ज़रा सोचिए, आप अपने घर में आराम फरमा रहे हैं और अचानक किसी मालगाड़ी के इंजन की लगातार घरघराहट सुनाई देने लगे? वो भी दिन-रात, चौबीसों घंटे? और ये आवाज़ किसी रेलवे ट्रैक से नहीं, बल्कि आपके पड़ोस में बनी दुनिया की सबसे धांसू टेक कंपनी के एक बड़े प्रोजेक्ट से आ रही हो! ऐसा ही कुछ हो रहा है अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य में, जहां माइक्रोसॉफ्ट का 7.3 बिलियन डॉलर यानी करीब 60 हज़ार करोड़ रुपये का एक हाई-फाई AI डेटा सेंटर लोगों की रातों की नींद और दिन का सुकून छीन रहा है। बात इतनी बिगड़ गई है कि अब पड़ोसियों ने मिलकर कंपनी के खिलाफ क्लास-एक्शन मुकदमा ही ठोक दिया है।
ये मामला सिर्फ शोरगुल का नहीं, बल्कि टेकनोलॉजी के साइड-इफेक्ट्स का है, जो सीधे तौर पर इंसानों की ज़िंदगी पर असर डाल रहा है। जब बड़े-बड़े डेटा सेंटर बनते हैं, तो अक्सर उनके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों पर बात होती है, लेकिन माइक्रोसॉफ्ट के इस 'फेयरवॉटर 1' डेटा सेंटर ने तो एक नया ही चैलेंज खड़ा कर दिया है।
तो आखिर ये शोर-शराबा शुरू कैसे हुआ?
बता दें कि ये पूरा किस्सा विस्कॉन्सिन के मिल्वौकी शहर के पास स्टर्टिवैंट नाम की जगह का है। यहां से महज़ 2.4 किलोमीटर की दूरी पर माउंट प्लेज़ेंट इलाके में माइक्रोसॉफ्ट का ये विशालकाय AI डेटा सेंटर 'फेयरवॉटर 1' बना है।
ये डेटा सेंटर अप्रैल महीने में ऑपरेशनल हुआ, यानी काम करना शुरू किया। लेकिन इसके शुरू होते ही वहां के लोग परेशान हो गए।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब डेटा सेंटर बन रहा था, तब भी कुछ दिक्कतें थीं, जैसे धूल और कंस्ट्रक्शन का शोर। लेकिन जैसे ही ये चालू हुआ, तो मामला और बिगड़ गया।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, डेटा सेंटर से आने वाली आवाज़ "न सिर्फ बहुत ज़्यादा, बल्कि लगातार और हर जगह फैलने वाली" है। इसे यूं समझ लीजिए कि आप अपने घर में हों, और एक धीमी लेकिन लगातार चलने वाली मशीन की आवाज़ आपके कानों में बजती रहे।
इस मुकदमे में शिकायत करने वाले तीन नागरिक, माउंट प्लेज़ेंट इलाके के 1,000 से ज़्यादा घरों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सोचिए, एक नहीं, दो नहीं, बल्कि हज़ार से ज़्यादा घर इस परेशानी से जूझ रहे हैं।
यह वाकई में एक बड़ी संख्या है और दिखाता है कि समस्या कितनी व्यापक है।
रातभर मालगाड़ी के इंजन की आवाज़?
मुकदमे में शामिल एक निवासी ने अपनी परेशानी बयां करते हुए बताया कि उन्हें ऐसा लग रहा था, जैसे "पास में खड़ी किसी मालगाड़ी के इंजन की घरघराहट सुनाई दे रही हो।" उन्होंने आगे कहा कि "हमें यह आवाज़ 24 घंटे सुनाई देती थी, और आखिरकार हमें एहसास हुआ कि यह माइक्रोसॉफ्ट के कैंपस से आ रही है।
" यह शिकायत तब आई जब पिछले छह महीनों से धूल और शोर से जुड़ी पुरानी दिक्कतें कम हो चुकी थीं, और लोग चैन की सांस लेने लगे थे। लेकिन ये नया शोर लोगों के लिए नई आफत बनकर आया।
कोर्ट में दाखिल शिकायत में साफ-साफ कहा गया है कि, "अपने डेटा सेंटर के संचालन और रखरखाव के माध्यम से, प्रतिवादी ने वादियों की संपत्तियों पर अनुचित और अत्यधिक शोर उत्सर्जित किया है, और ऐसा करना जारी रखा है, जिससे निजी परेशानी और लापरवाही के कारण संपत्ति का नुकसान हुआ है।" यानी, कंपनी की लापरवाही से लोगों की प्रॉपर्टी को नुकसान हो रहा है, ऐसा याचिकाकर्ताओं का आरोप है।
शोर के साथ अंधेरा भी छीन लिया?
मज़े की बात ये है कि ये परेशानी सिर्फ शोर तक ही सीमित नहीं है। विस्कॉन्सिन पब्लिक रेडियो को एक और निवासी ने बताया कि डेटा सेंटर से निकलने वाला तेज़ प्रकाश भी एक बड़ी दिक्कत है, जिसे लाइट पॉल्यूशन कहते हैं।
उन्होंने कहा, "पहले बाहर इतना अंधेरा होता था कि आप सारे तारे देख सकते थे, और अब इतनी रोशनी के कारण तारे देखना मुश्किल हो गया है।"
कल्पना कीजिए, एक ऐसी जगह जहां रात में आप सितारों से भरा आसमान देख सकते थे, वो अब टेकनोलॉजी की चकाचौंध से फीका पड़ गया है। यह दिखाता है कि कैसे बड़े प्रोजेक्ट्स हमारी जीवनशैली और प्राकृतिक सुंदरता पर भी भारी पड़ सकते हैं।
माइक्रोसॉफ्ट का क्या कहना है?
जाहिर सी बात है, जब इतनी बड़ी टेक कंपनी पर ऐसे आरोप लगेंगे तो उन्हें कुछ तो कहना ही पड़ेगा। माइक्रोसॉफ्ट ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
कंपनी का कहना है कि उन्होंने "ध्वनि संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाए हैं।" अब ये 'तत्काल कदम' क्या हैं और उनका कितना असर हुआ है, ये तो वक्त ही बताएगा।
लेकिन फिलहाल तो मामला कोर्ट तक पहुंच गया है और आम जनता इस मुद्दे पर बहुत ज़्यादा निराश दिख रही है।
कुल मिलाकर, ये केस सिर्फ एक डेटा सेंटर के शोर और लाइट पॉल्यूशन का नहीं है। ये एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि कैसे आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस जैसी एडवांस्ड टेकनोलॉजी, जो हमारे लिए इतनी उपयोगी है, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर क्या असर डाल सकती है।
डेटा सेंटर्स का प्रभाव सिर्फ ऊर्जा की खपत या ज़मीन के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर उन लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को भी प्रभावित करता है जो इनके आस-पास रहते हैं। ऐसे में देखना होगा कि माइक्रोसॉफ्ट इस चैलेंज से कैसे निपटती है और वहां के निवासियों को कब तक सुकून मिल पाता है।



































