अमेरिका: इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार इन दिनों बूम पर है, एक से बढ़कर एक धांसू गाड़ियां आ रही हैं। लेकिन अब जो खबर आई है, वो थोड़ी हटके है और यकीन मानिए, ये आपके चेहरे पर मुस्कान ले आएगी। सोचिए, एक ऐसी नन्हीं-मुन्नी इलेक्ट्रिक गाड़ी, जो महज 14 हजार डॉलर (भारतीय रुपये में करीब 11.6 लाख रुपये) में मिल रही है और जिसे अमेरिका में लॉन्च करने की तैयारी है। नाम है इसका फिएट टोपोलिनो (Fiat Topolino)। ये नाम सुनते ही दिमाग में शायद पुरानी गाड़ियां आ रही होंगी, लेकिन ये 'टोपोलिनो' बिल्कुल नया अवतार है।
अब आप कहेंगे, इतनी सस्ती इलेक्ट्रिक कार? मज़ाक चल रहा है क्या? जी नहीं, बिल्कुल सच है! लेकिन जनाब, इस गाड़ी की एक खासियत ऐसी भी है, जो आपको हैरान कर देगी – ये इतनी धीमी है कि एक आम ई-बाइक से भी मुश्किल से तेज चल पाती है! तो क्या है ये फिएट टोपोलिनो? क्या ये वाकई एक गाड़ी है या सिर्फ एक महंगा खिलौना? आइए, इसकी पूरी कहानी बताते हैं।
तो क्या है ये फिएट टोपोलिनो और क्यों है इतनी सस्ती?
देखिए, फिएट टोपोलिनो को बनाने वाली कंपनी है स्टेलेंटिस ग्रुप। ये वही ग्रुप है जो फिएट, सिट्रोएन जैसी बड़ी कंपनियों का मालिक है।
टोपोलिनो दरअसल सिट्रोएन एमी (Citroën Ami) पर आधारित है, जिसे यूरोप के भीड़भाड़ वाले शहरों के लिए डिजाइन किया गया था। इसका मकसद था लोगों को आने-जाने का एक आसान और सस्ता समाधान देना।
यूरोप में इसे 'लाइट क्वाड्रिसाइकिल' (light quadricycle) या कैटेगरी L6e में रखा गया है। इसका मतलब ये है कि कानूनी तौर पर इसे पारंपरिक पैसेंजर कार की बजाय एक चार पहियों वाली स्कूटर या मोपेड की तरह माना जाता है।
अब आप पूछेंगे, इससे क्या फर्क पड़ता है? फर्क पड़ता है जनाब! क्योंकि इसे कार नहीं माना जाता, इसलिए इसे बनाने के नियम कायदे थोड़े ढीले होते हैं। सेफ्टी फीचर्स, स्पीड लिमिट्स और बाकी तामझाम एक फुल-फ्लेज्ड कार वाले नहीं होते।
यही वजह है कि ये इतनी सस्ती बन पाती है। इसकी कीमत 13,995 डॉलर से शुरू होती है, जिसमें 990 डॉलर की डेस्टिनेशन फीस अलग से लगेगी।
कुल मिलाकर मोटा-मोटी ये आपको 15 हजार डॉलर के आसपास पड़ेगी।
46 मील की रेंज और एसी की अनोखी व्यवस्था – क्या है इसमें खास?
टोपोलिनो की बैटरी भी उतनी ही छोटी है, जितनी ये गाड़ी खुद। इसमें सिर्फ 5.4kWh का बैटरी पैक लगा है, जो फुल चार्ज पर आपको मात्र 46 मील (लगभग 74 किलोमीटर) की रेंज देगा।
यानी, अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं, तो गुड़गांव से नोएडा आना-जाना मुश्किल हो जाएगा। ये गाड़ी साफ तौर पर सिर्फ छोटे-मोटे लोकल कामों के लिए बनी है, जैसे आस-पड़ोस में घूमना, ग्रॉसरी लाने जाना या बच्चों को स्कूल छोड़ना।
अब बात करते हैं 'फीचर्स' की। टोपोलिनो में आपको लग्जरी ढूंढने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसमें 'क्रीचर कंफर्ट्स' यानी सुख-सुविधाओं की भारी कमी है।
आप सोचिए, इसमें तो ट्रेडिशनल एसी भी नहीं है! अगर आपको गर्मी लग रही है और हवा खानी है, तो इसका एक ही तरीका है – गाड़ी के दरवाजे हटा दो! जी हां, आपने सही पढ़ा। ये इतनी बेसिक गाड़ी है कि दरवाजों को हटाकर ही एसी का काम चलाया जा सकता है।
इसमें आमतौर पर कोई फैंसी इंफोटेनमेंट सिस्टम, पावर विंडो या एडजस्टेबल सीट जैसी चीजें नहीं मिलतीं। यह सब इसे और भी हल्का और किफायती बनाता है।
क्या ये अमेरिका की सड़कों पर चल पाएगी?
अमेरिका की सड़कें बड़ी हैं, गाड़ियां बड़ी हैं और रफ्तार भी ज्यादा होती है। ऐसे में टोपोलिनो जैसी नन्हीं गाड़ी के लिए वहां सरवाइव करना एक बड़ा चैलेंज है।
यूरोप में जहां इसे 'लाइट क्वाड्रिसाइकिल' माना जाता है, वहीं अमेरिका में इसे सड़क पर चलाने के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च करके कानूनी रूप से 'रोड लीगल' बनाना होगा। यानी, 13,995 डॉलर तो सिर्फ शुरुआती कीमत है, असली खर्च तो इसे रोड पर चलाने लायक बनाने में आएगा।
इसकी टॉप स्पीड भी बहुत कम है, एक आम ई-बाइक से थोड़ी ही ज्यादा। ऐसे में, जब आप हाइवे पर या तेज रफ्तार वाली सड़कों पर निकलेंगे, तो ये गाड़ी दूसरी बड़ी गाड़ियों के बीच शायद उतनी सुरक्षित महसूस न हो।
ये गाड़ी उन लोगों के लिए ज्यादा मुफीद हो सकती है जिन्हें किसी बड़े शहर के छोटे दायरे में घूमना हो, जहां पार्किंग की समस्या हो और ट्रैफिक धीमा चलता हो। इसे एक 'पड़ोस की सबसे अच्छी दोस्त' (neighborhood's best friend) के रूप में देखा जा रहा है, जो सिर्फ लोकल ट्रिप्स के लिए है।
कौन खरीदेगा ऐसी गाड़ी और स्टेलेंटिस का क्या प्लान है?
तो सवाल ये है कि आखिर अमेरिका में ऐसी गाड़ी कौन खरीदेगा, जिसकी रेंज कम है, स्पीड कम है, फीचर्स कम हैं और जिसे रोड लीगल बनाने के लिए अलग से पैसे खर्च करने पड़ें? एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्टेलेंटिस ग्रुप शायद एक बिल्कुल नए मार्केट सेगमेंट में हाथ आजमा रहा है। ये उन लोगों को टारगेट कर रहा है जिन्हें एक बहुत सस्ती, इको-फ्रेंडली और सुपर-कॉम्पैक्ट मोबिलिटी सॉल्यूशन चाहिए।
शायद कॉलेज के स्टूडेंट्स, बुजुर्ग, या सिर्फ वो लोग जो अपनी दूसरी कार के पूरक के तौर पर एक छोटी लोकल रनअराउंड चाहते हैं।
ये एक तरह का प्रयोग भी हो सकता है, जहां स्टेलेंटिस देख रहा है कि अल्ट्रा-कॉम्पैक्ट ईवी (Ultra-Compact EV) के लिए अमेरिकन बाजार में कितनी जगह है। यूरोप में ये कॉन्सेप्ट काफी सफल रहा है, खासकर वहां की तंग गलियों और महंगे पार्किंग वाले शहरों में।
अब देखना ये होगा कि 'अमेरिकी सपने' वाली बड़ी कारों के देश में ये नन्हीं टोपोलिनो कितना जलवा बिखेर पाती है। कुल मिलाकर, फिएट टोपोलिनो एक रोमांचक एंट्री तो है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी ग्राहक इसे किस नजरिए से देखते हैं और उनकी जरूरतें इस छोटी सी गाड़ी से कितनी पूरी हो पाती हैं।






































