मुंबई: पिछले बुधवार का दिन शेयर बाजार के निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। पूरे बाजार में हाहाकार मचा हुआ था, सेंसेक्स 1600 से ज़्यादा अंक धड़ाम हुआ तो निफ्टी भी 500 से ऊपर लुढ़क गया। आलम ये था कि स्क्रीन पर लाल निशान के अलावा कुछ दिख ही नहीं रहा था। चारों ओर बस यही बात हो रही थी कि निवेशकों के पैसे पानी में बह गए। लेकिन इस भारी गिरावट के बीच एक ऐसा चौंकाने वाला डेटा सामने आया है, जिसने सबको हैरान कर दिया है।
आप सोच रहे होंगे कि इतनी बड़ी गिरावट आई, तो भैया बिकवाली तो खूब हुई होगी। और जब बिकवाली हुई है, तो बड़े-बड़े खिलाड़ियों, यानी संस्थागत निवेशकों (FIIs और DIIs) ने ही अपने शेयर बेचे होंगे।
लेकिन जनाब, हकीकत तो कुछ और ही है! विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने मिलकर उस दिन शेयर खरीदे हैं, वो भी छोटे-मोटे नहीं, पूरे 2,753 करोड़ रुपये के शेयर! अब सवाल ये है कि जब ये बड़े खिलाड़ी खरीद रहे थे, तो इतनी भारी बिकवाली किसने की?
मोटा-मोटी हिसाब-किताब देखें, तो इस बात की पूरी संभावना है कि छोटे निवेशक, यानी हम और आप जैसे रिटेल इन्वेस्टर ही घबराहट में अपने शेयर बेचकर निकल गए होंगे। यही कारण है कि बाजार में इतनी तगड़ी गिरावट देखने को मिली।
आइए, जरा आंकड़ों की ज़ुबानी समझते हैं कि उस दिन बाजार में आखिर हुआ क्या था।
तो कौन थे वो खिलाड़ी जो खरीदारी पर डटे रहे?
एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि 9 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में खरीदारी जारी रखी। इन्होंने कुल 1,962.80 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
सिर्फ FIIs ही नहीं, बल्कि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भी खरीददारी के मूड में दिखे और उन्होंने 790.16 करोड़ रुपये के शेयर अपनी झोली में डाले। यानी दोनों ने मिलकर कुल 2,753 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, वो भी तब जब बाजार पूरी तरह से क्रैश हो रहा था।
कितनी हुई खरीदारी और कितनी बिकवाली?
बुधवार के कारोबारी सत्र में FIIs ने कुल 17,463.95 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 15,501.15 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। अगर नेट-नेट देखें तो उन्होंने 1,962.80 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।
वहीं, DIIs की बात करें, तो उन्होंने 19,165.13 करोड़ रुपये की खरीदारी की और 18,374.97 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे उनकी शुद्ध खरीदारी 790.16 करोड़ रुपये रही। साफ दिख रहा है कि बड़े निवेशक बाजार में आए मौके को भुना रहे थे।
क्या ये सिर्फ एक दिन की बात थी?
ऐसा नहीं है कि यह खरीदारी सिर्फ बुधवार के दिन ही हुई हो। अगर एक दिन पहले, यानी 8 जुलाई के आंकड़ों को देखें, तो उस दिन भी FIIs ने 393.19 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।
हालांकि, 8 जुलाई को DIIs ने थोड़ा मुनाफावसूली की और 383.43 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर नेट सेलर रहे थे। लेकिन अगर पूरे हफ्ते का रुख देखें, तो तस्वीर और साफ हो जाती है।
इस हफ्ते क्या रहा बड़े खिलाड़ियों का हाल?
इस सप्ताह अब तक FIIs लगातार चारों कारोबारी सत्र में खरीददार रहे हैं। यानी गिरावट आने के बावजूद उन्हें भारतीय बाजार पर भरोसा बना हुआ है।
वहीं, DIIs ने भी चार में से तीन सत्रों में खरीदारी की है। ये आंकड़े सीधे-सीधे इशारा करते हैं कि बाजार में चाहे कितनी भी उथल-पुथल क्यों न हो, संस्थागत निवेशकों का विश्वास अभी भी भारतीय इक्विटी मार्केट पर टिका हुआ है।
उनकी नज़र में ये गिरावट शायद एक 'मौका' थी, न कि 'खतरा'।
- तारीख: 9 जुलाई 2026 - FII नेट फ्लो: ₹1,962.80 करोड़, DII नेट फ्लो: ₹790.16 करोड़
- तारीख: 8 जुलाई 2026 - FII नेट फ्लो: ₹393.19 करोड़, DII नेट फ्लो: -₹383.43 करोड़
- तारीख: 7 जुलाई 2026 - FII नेट फ्लो: ₹243.03 करोड़, DII नेट फ्लो: ₹3,791.42 करोड़
- तारीख: 6 जुलाई 2026 - FII नेट फ्लो: ₹1,355.33 करोड़, DII नेट फ्लो: -₹1,953.89 करोड़
तो आखिर बाजार क्यों गिरा, जब बड़े खिलाड़ी खरीद रहे थे?
अब आप सोच रहे होंगे कि जब FII और DII खरीदारी कर रहे थे, तो बाजार में इतनी जोरदार बिकवाली कैसे हो गई? इस भारी गिरावट के पीछे की बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान था। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हुआ शांति समझौता अब खत्म हो चुका है।
इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव फिर से बढ़ गया, जिसका सीधा असर दुनियाभर के बाजारों पर दिखा और भारतीय बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा।
कितना नीचे लुढ़का शेयर बाजार?
तनाव भरी इस खबर ने निवेशकों के सेंटीमेंट को बुरी तरह चोट पहुंचाई। इसका नतीजा ये हुआ कि BSE Sensex 1,677 अंक टूटकर 76,504 पर बंद हुआ।
वहीं, Nifty 50 भी 517 अंक गिरकर 23,882 पर आ गया। यह निफ्टी के लिए एक बड़ा झटका था, क्योंकि वह 23,900 के अहम स्तर से भी नीचे फिसल गया।
बाजार में लगभग हर सेक्टर में भयंकर बिकवाली देखने को मिली। Nifty 50 के 50 में से 46 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।
खासकर Nifty PSU Bank और Nifty Chemicals सबसे ज़्यादा टूटने वाले सेक्टर रहे। Nifty Bank भी 1,458 अंक गिरकर 56,743 पर बंद हुआ, और Nifty Midcap में तो 963 अंकों की तगड़ी गिरावट दिखी, जो 61,323 पर आकर ठहरा।
रुपये पर भी बढ़ी टेंशन
सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, रुपये पर भी इस भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा दबाव पड़ा। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ, जिससे आयात महंगा होने की आशंका भी बढ़ गई।
कुल मिलाकर, वह दिन निवेशकों के लिए भारी रहा, जिसने साफ दिखा दिया कि वैश्विक घटनाएं कैसे पल भर में घरेलू बाजारों को हिला सकती हैं। लेकिन संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने यह भी संकेत दिया कि वे इस गिरावट को एक अस्थायी झटका मान रहे हैं और लॉन्ग टर्म में भारतीय बाजार पर उनका भरोसा बरकरार है।




































