नई दिल्ली: तीन दिन से चले आ रहे उदासी के माहौल को चीरते हुए आखिरकार एशियाई शेयर बाजारों में गुरुवार को रौनक लौटी। मार्केट में ऐसी हरियाली आई कि निवेशकों के चेहरे खिल उठे। इस उछाल का सबसे बड़ा सहारा बने सेमीकंडक्टर स्टॉक्स, जिनकी वजह से साउथ कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई इंडेक्स तीन-तीन परसेंट तक ऊपर भागे। कहानी में ट्विस्ट ये है कि पिछले सेशन में कोस्पी भैया ‘बेयर मार्केट टेरिटरी’ में फिसलकर डगमगा गए थे, लेकिन आज उन्होंने ऐसा कमबैक किया कि सब देखते रह गए!
सुबह-सुबह जैसे ही ट्रेडिंग शुरू हुई, कोस्पी इंडेक्स ताबड़तोड़ 3% ऊपर उछला। इतना ही नहीं, छोटे-मोटे शेयर्स का इंडेक्स, कोसडैक भी 1.28% की तेजी के साथ भागा।
उधर जापान में भी माहौल कुछ ऐसा ही था। निक्केई 225 इंडेक्स 2.04% से भी ज्यादा की छलांग लगा गया, जबकि एक और बड़ा इंडेक्स टॉपिक्स 0.20% ऊपर चढ़ा।
हालांकि, ऑस्ट्रेलिया का बेंचमार्क S&P/ASX 200 भैया थोड़े सुस्त दिखे और शुरुआती कारोबार में 0.83% नीचे गिरे। तो सवाल है, आखिर इस तेजी के पीछे की कहानी क्या है?
तो आखिर क्यों दौड़े एशियाई बाजार, क्या है सेमीकंडक्टर का कनेक्शन?
बाजार में इस नई तेजी की सबसे बड़ी वजह सेमीकंडक्टर सेक्टर बना हुआ है। दरअसल, मार्केट में ऐसी खबरें गर्म हैं कि SK Hynix Inc.
नाम की एक तगड़ी सेमीकंडक्टर कंपनी की अमेरिकी लिस्टिंग को उम्मीद से सात गुना ज़्यादा ‘ओवरसब्सक्राइब’ किया गया है। इसका मतलब ये कि कंपनी के शेयर्स खरीदने वाले लोगों की भीड़ इतनी ज्यादा थी कि डिमांड ही डिमांड दिख रही थी।
ये खबर आते ही पूरे सेमीकंडक्टर सेक्टर में पॉजिटिविटी की लहर दौड़ गई, जिसका असर साफ-साफ एशियाई बाजारों पर दिखा।
इसके साथ ही, एक और खबर ने सेमीकंडक्टर सेक्टर को बूस्ट दिया। बेन कैपिटल नाम की इन्वेस्टमेंट कंपनी ने फ्लैश मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनी कियॉक्सिया होल्डिंग्स कॉर्प में अपना पूरा हिस्सा बेच दिया।
इन्वेस्टमेंट की दुनिया में ऐसे बड़े सौदे अक्सर निवेशकों का ध्यान खींचते हैं और ये सेक्टर के लिए एक तरह से सकारात्मक संकेत हो सकता है, खासकर जब बाजार में पहले से ही तेजी की उम्मीद हो।
कच्चे तेल की आग और महंगाई की नई टेंशन क्या है?
एक तरफ तो शेयर बाजार में तेजी दिख रही थी, दूसरी तरफ कच्चे तेल के भाव लगातार तीसरे सेशन में ऊपर चढ़ रहे थे। ब्रेंट क्रूड ऑयल $78.80 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था।
इस बढ़ती कीमत के पीछे बड़ी वजह ये है कि नई स्ट्राइक (हमलों) ने जियोपॉलिटिकल टेंशन को बढ़ा दिया है। अब चिंता ये है कि इन हमलों से होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली शिपिंग में रुकावट आ सकती है।
अगर ऐसा हुआ, तो तेल की सप्लाई प्रभावित होगी और कीमतें आसमान छू सकती हैं।
तेल की बढ़ती कीमतें सीधी-सीधी महंगाई की चिंताओं को फिर से बढ़ा देती हैं। जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो हर चीज महंगी हो जाती है – ट्रांसपोर्टेशन से लेकर रोजमर्रा की चीजें तक।
इस बढ़ती महंगाई की टेंशन ने मनी मार्केट को भी हिला दिया है। बुधवार को मनी मार्केट ने अगली फेड रेट हाइक (ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद) को दिसंबर से बदलकर अक्टूबर कर दिया है।
इसका मतलब है कि बाजार को लग रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई कंट्रोल करने के लिए अब पहले से भी जल्दी ब्याज दरें बढ़ा सकता है।
बॉन्ड मार्केट का क्या हाल है और अमेरिका में क्या चल रहा?
बॉन्ड मार्केट में भी हलचल तेज दिखी। यूएस ट्रेजरी यील्ड (सरकारी बॉन्ड्स पर मिलने वाला रिटर्न) में बढ़ोतरी देखने को मिली।
दो साल का यूएस ट्रेजरी यील्ड, जो फेडरल रिजर्व की पॉलिसी से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है, अमेरिकी ट्रेडिंग सेशन के दौरान पांच बेसिस पॉइंट तक बढ़कर 4.23% हो गया। ये आंकड़ा पिछले महीने के पीक से बस एक बेसिस पॉइंट कम है।
वहीं, बेंचमार्क 10-साल का ट्रेजरी यील्ड चार बेसिस पॉइंट तक बढ़कर 4.59% हो गया। ये मई के आखिर के बाद का इसका सबसे ऊंचा लेवल है।
इस बीच, सोने की कीमतें तीन दिनों की लगातार गिरावट के बाद स्थिर हो गईं, जो कहीं न कहीं निवेशकों को थोड़ा सुकून दे रहा था। बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन और तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के ‘सेंटिमेंट’ (मनोभाव) पर दबाव बनाया हुआ है।
मार्केट पहले से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रैली से चलने वाले ऊंचे इक्विटी वैल्यूएशन से जूझ रहे हैं, ऐसे में नई टेंशन और दबाव बढ़ा रही है।
जियोपॉलिटिकल टेंशन और फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर क्या अपडेट है?
यूएस सेंट्रल कमांड (USCENTCOM) ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि हाल के हमलों का मकसद होर्मुज स्ट्रेट से ‘नेविगेशन की आज़ादी’ को खतरे में डालने की क्षमता को कमज़ोर करना था। ये बताता है कि क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की हालिया पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स से पता चला है कि कुछ अधिकारियों को ब्याज दरें बढ़ाने का मामला मजबूत लगा था। हालांकि, आखिर में उन्होंने दरों को वैसा ही रखने के फैसले का समर्थन किया।
लेकिन इन मिनट्स में महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताओं पर भी जोर दिया गया था। अच्छी बात ये रही कि लेबर मार्केट को लेकर जो डर था, उसमें थोड़ी कमी आने के संकेत मिले हैं।
इसका मतलब है कि नौकरी बाजार थोड़ा संभल रहा है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक पॉजिटिव साइन है।
अमेरिकी स्टॉक मार्केट में क्या हुआ?
बुधवार को अमेरिकी स्टॉक मार्केट ‘वॉल स्ट्रीट’ में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। US प्रेसिडेंट के बयानों और बाजार में फैली अनिश्चितता के बीच, निवेशकों ने संभलकर ट्रेडिंग की।
कुछ सेक्टर में तेजी दिखी तो कुछ में गिरावट। कुल मिलाकर, वैश्विक स्तर पर बाजारों में अभी भी एक तरह की अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जहां एक तरफ तेजी के संकेत हैं, तो दूसरी तरफ जियोपॉलिटिकल टेंशन और महंगाई का डर भी कायम है।


































