नई दिल्ली: अगर आप सोने के दाम गिरने का इंतजार कर रहे थे, तो आपके लिए एक खबर है। गुरुवार को मार्केट खुलते ही सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। लेकिन यह गिरावट किसी खुशी की खबर से ज्यादा ग्लोबल टेंशन का नतीजा है। दरअसल, वेस्ट एशिया यानी पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ गया है, जिसका सीधा असर आपकी जेब और इन्वेस्टमेंट पर पड़ रहा है।
मोटा-मोटी बात यह है कि दुनिया के इस हिस्से में मची हलचल ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दे दी है और कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अक्सर सोने जैसी कीमती धातुओं की चमक थोड़ी फीकी पड़ जाती है।
यही वजह है कि शुरुआती एशियाई कारोबार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.3% गिरकर 4,066 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया।
सिर्फ स्पॉट गोल्ड ही नहीं, बल्कि अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ्यूचर्स भी 0.1% की गिरावट के साथ 4,077 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखा। वहीं, चांदी के मामले में स्थिति थोड़ी अलग रही।
चांदी की कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं, हालांकि COMEX सिल्वर फ्यूचर्स में 0.1% की मामूली बढ़त देखी गई और यह 58.60 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था।
आखिर सोने के दाम क्यों गिरे?
अब आप सोच रहे होंगे कि जब दुनिया में तनाव बढ़ता है, तो आमतौर पर लोग सोने की तरफ भागते हैं, फिर इस बार दाम क्यों गिर गए? दरअसल, इस बार मामला अमेरिका और ईरान के बीच के संघर्ष का है। US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया कि संघर्ष खत्म करने के लिए किया गया अंतरिम समझौता अब लागू नहीं है।
इसके बाद अमेरिकी मिलिट्री ने ईरान पर नए हमले किए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने मार्केट में एक डर पैदा कर दिया है कि महंगाई और बढ़ सकती है। जब महंगाई बढ़ने की उम्मीद होती है, तो US फेडरल रिजर्व अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त कर देता है।
अब सिस्टम यह है कि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, जबकि ब्याज वाले एसेट्स (जैसे बॉन्ड्स) ज्यादा रिटर्न देते हैं। इसलिए जब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना होती है, तो इन्वेस्टर्स सोने से पैसा निकालकर दूसरी जगह लगाने लगते हैं।
मार्केट के एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?
इस पूरे खेल को समझते हुए रिद्धिसिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर पृथ्वीराज कोठारी बताते हैं कि ईरान पर हुए हमलों के बाद डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में तेजी आई, जिससे बुलियन मार्केट पर दबाव बढ़ा। उनके मुताबिक, पिछले हफ्ते सोने और चांदी दोनों में जबरदस्त उछाल आया था, इसलिए अब जो गिरावट दिख रही है, वह एक तरह का 'शॉर्ट-टर्म करेक्शन' है।
यानी बड़ी तेजी आने से पहले मार्केट थोड़ा संभल रहा है।
इतना ही नहीं, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने 2026 के लिए ग्लोबल ग्रोथ अनुमान को घटाकर 3% कर दिया है। वहीं, बैंक ऑफ अमेरिका ने भी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख को देखते हुए 2026 के लिए सोने की औसत कीमत के अनुमान में 14% की कटौती कर दी है।
आगे क्या होने वाला है?
फिलहाल मार्केट के सभी बड़े खिलाड़ी US फेडरल रिजर्व की जून पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स और अमेरिका के साप्ताहिक बेरोजगारी दावों के डेटा का इंतजार कर रहे हैं। इन रिपोर्ट्स से यह साफ होगा कि आने वाले समय में ब्याज दरों का क्या रुख रहने वाला है।
वहीं अगर भारत की बात करें, तो यहां चांदी की कीमतें काफी मजबूत बनी हुई हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि पिछले कुछ महीनों में इम्पोर्ट पर पाबंदियों के कारण घरेलू मार्केट में चांदी की उपलब्धता कम हुई है, जिससे प्रीमियम बढ़ गया है।


































