राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली: बाजार में जब कोई खबर आती है तो उसका सीधा असर शेयरों पर दिखता है, और इस बार तो सरकार ने कुछ ऐसा कमाल कर दिया है कि इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के शेयर आज रॉकेट बन गए! सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को एक ऐसी बड़ी राहत दी है, जिसका असर सीधा कंपनियों की जेब पर और उनके निवेशकों के चेहरों पर दिख रहा है।
कई अहम कच्चे माल पर इंपोर्ट ड्यूटी को हटा दिया गया है, और इस फैसले के बाद डिक्सन टेक्नोलॉजी (Dixon Technologies), केन्स टेक्नोलॉजी (Kaynes Technology), सिरमा एसजीएस (Syrma SGS) और पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट (PG Electroplast) जैसे शेयर 4 से 5 फीसदी तक उछल गए। निवेशक तो जैसे खुशी से झूम उठे।
बता दें कि वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में एक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। ये खबर सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सोलर इक्विपमेंट और ईपीसी (EPC) कंपनियों के लिए भी बड़ी खबर लेकर आई है।
तो आखिर सरकार ने ऐसा क्या किया है, जिससे इतनी हलचल मची है?
इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग को कैसे मिली बड़ी राहत?
केंद्र सरकार ने मोबाइल फोन और उनके कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों को खास तौर पर फायदा पहुंचाने का फैसला किया है। अब चार्जिंग मॉड्यूल और डिस्प्ले जैसे कुल 6 अहम कंपोनेंट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी हटा दी गई है।
इसका सीधा मतलब ये है कि मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को अब इन पुर्जों को बाहर से मंगाने में कम पैसा खर्च करना पड़ेगा, जिससे उनकी लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा।
इसके साथ ही, सिर्फ मोबाइल ही नहीं, बल्कि कार, मेडिकल डिवाइस और इंडस्ट्रियल मशीनों में लगने वाले डिस्प्ले बनाने के लिए जरूरी कंपोनेंट्स पर भी ड्यूटी पूरी तरह से ज़ीरो कर दी गई है। सोचिए, इससे न केवल मोबाइल सस्ते हो सकते हैं, बल्कि इन दूसरे सेक्टर्स को भी बड़ा फायदा होगा।
सबसे बड़ी बात ये है कि इंपोर्ट ड्यूटी में ये छूट 31 मार्च 2029 तक लागू रहेगी। ये कोई छोटी-मोटी राहत नहीं, बल्कि लंबी अवधि का सहारा है, जो कंपनियों को भविष्य की प्लानिंग करने में मदद करेगा।
लिथियम-आयन बैटरी वालों के लिए क्या नया है?
अगर आप इलेक्ट्रिक वाहनों या पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक्स में दिलचस्पी रखते हैं, तो आपको पता होगा कि लिथियम-आयन बैटरी कितनी महत्वपूर्ण है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) ने एक और बड़ा ऐलान किया है।
उन्होंने लिथियम-आयन बैटरी बनाने के लिए रियायती कस्टम ड्यूटी पाने वाली मशीनों की लिस्ट को काफी बढ़ा दिया है।
नई लिस्ट में अब मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस के सभी चरणों में इस्तेमाल होने वाले 85 तरह के इक्विपमेंट शामिल किए गए हैं। पहले कुछ ही मशीनें इस लिस्ट में थीं, लेकिन अब सरकार ने बैटरी प्रोडक्शन के हर स्टेप को कवर किया है।
इसमें मटीरियल मिक्सिंग, कोटिंग, प्रेसिंग, स्लिटिंग, वाइंडिंग, स्टैकिंग, इलेक्ट्रोलाइट भरने, वेल्डिंग, टेस्टिंग, एजिंग, इंस्पेक्शन और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले इक्विपमेंट शामिल हैं। साफ है कि सरकार देश में लिथियम-आयन बैटरी के उत्पादन को हर तरह से बढ़ावा देना चाहती है।
सोलर सेक्टर को मिली क्या राहत?
पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज़ से सोलर एनर्जी आज की सबसे बड़ी जरूरत है। सरकार ने इस सेक्टर में भी बड़ी राहत दी है।
सोलर इक्विपमेंट और ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) कंपनियों के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन (Self-Certification) की समय सीमा को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है।
ये छूट खास तौर पर 200 किलोवाट (kW) से ज्यादा क्षमता वाले सोलर पीवी इनवर्टर पर लागू होगी। लेकिन ऐसा क्यों? दरअसल, देश में टेस्टिंग लैब्स की कमी के चलते कंपनियों को अपने उत्पादों का सर्टिफिकेशन कराने में दिक्कतें आ रही थीं।
सरकार ने इस समस्या को समझा और कंपनियों को थोड़ा और वक्त दे दिया है, ताकि वे आसानी से अपनी प्रक्रियाओं को पूरा कर सकें।
वायरलेस चार्जिंग के पुर्जों को भी मिली छूट, क्या हैं वो?
आजकल वायरलेस चार्जिंग की डिमांड खूब बढ़ रही है, और सरकार ने इस टेक्नोलॉजी को भी सपोर्ट करने का फैसला किया है। मोबाइल फोन के लिए वायरलेस चार्जिंग इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल बनाने में इस्तेमाल होने वाले छह कंपोनेंट्स पर भी रियायती कस्टम ड्यूटी दी गई है।
इनमें नैनो-क्रिस्टलाइन असेंबली, ई-शील्ड, पीईटी लाइनर (PET liner), पीसी शिम (PC shim), कॉइल और नियोडिमियम मैग्नेट जैसे खास पुर्जे शामिल हैं। इन पर ड्यूटी कम होने से वायरलेस चार्जिंग टेक्नोलॉजी वाले मोबाइल फोन का उत्पादन देश में और आसान और सस्ता हो सकेगा।
कुल मिलाकर, सरकार के इन फैसलों से इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग, लिथियम-आयन बैटरी उत्पादन और सोलर एनर्जी जैसे अहम सेक्टर्स को एक बड़ा बूस्ट मिलने वाला है। शेयर बाजार में आज की तेजी इस बात का साफ संकेत है कि इन फैसलों को उद्योग जगत ने हाथों-हाथ लिया है।
यह न सिर्फ कंपनियों के लिए अच्छी खबर है, बल्कि लंबी अवधि में उपभोक्ताओं को भी सस्ते और बेहतर प्रोडक्ट्स मिलने की उम्मीद है।



































