मध्य पूर्व: समंदर की गहराई में जहां तेल के टैंकर फर्राटे भरते हैं, वहां अचानक बारूद की गंध घुल गई है। बात हो रही है होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ओमान के तट की, जहां एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ और इस घटना ने मध्य-पूर्व की नब्ज फिर से तेज कर दी है। एक तरफ ईरान कह रहा है कि 'बात नहीं मानी तो अंजाम भुगतना ही पड़ेगा', तो दूसरी तरफ अमेरिका इसे 'ईरान की गुंडागर्दी' बताकर आग-बबूला है। आखिर एक तेल टैंकर पर मिसाइलें क्यों दागी गईं, किसने दागीं और इस पूरे ड्रामे के पीछे ईरान की क्या कहानी है, आइए डिकोड करते हैं एक-एक धागा।
ये कोई मामूली रास्ता नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है – होर्मुज जलडमरूमध्य। यहां से दुनिया के कुल तेल निर्यात का पांचवां हिस्सा गुजरता है।
जाहिर है, इस रास्ते पर जरा सी भी हलचल ग्लोबल इकोनॉमी को हिलाने की ताकत रखती है। ऐसे में जब यहां एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमला होता है, तो सिर्फ टैंकर नहीं, बल्कि दुनिया की शांति भी डगमगा जाती है।
अब इस हमले पर ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB ने एक ऐसा दावा किया है, जो इस पूरी कहानी को नया मोड़ दे रहा है।
IRIB की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस तेल टैंकर पर हमला किया गया, उसने ईरानी अधिकारियों की बार-बार दी गई चेतावनियों को लगातार नजरअंदाज किया था। रिपोर्ट तो ये भी कहती है कि यह टैंकर अमेरिकी नौसेना के भरोसे ओमान के समुद्री रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा था, और बस यही 'बगावत' ईरान को नागवार गुजरी।
ईरान का दावा: 'चेतावनी नहीं मानी तो अंजाम भुगतो!'
ईरान के सरकारी सूत्रों के हवाले से आई खबरों के मुताबिक, तेहरान ने कुछ वक्त पहले ही एक सख्त फरमान जारी किया था। इस फरमान में कहा गया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी कमर्शियल जहाजों को ईरानी सेना के साथ तालमेल बिठाना होगा।
यानी, ईरानी सेना जो रास्ता तय करे, जो प्रोटोकॉल बताए, उसी के हिसाब से चलना होगा। सीधे शब्दों में कहें तो ईरान इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, और जहाजों की आवाजाही पर पूरा कंट्रोल।
IRIB की रिपोर्ट बताती है कि जिस टैंकर पर हमला हुआ, उसने ईरान के तय किए गए 'कॉरिडोर' यानी सुरक्षित मार्ग से जाने के बजाय, अमेरिकी नौसेना के भरोसे ओमान के तट के करीब वाले रास्ते से निकलने का फैसला किया। ईरान का कहना है कि यह उनकी चेतावनी को अनसुना करना था।
उनके मुताबिक, अगर जहाजों को इस रास्ते से सुरक्षित निकलना है, तो उन्हें ईरान की मर्जी से चलना होगा। लेकिन हां, यहां एक पेंच है।
ईरानी मीडिया के इस बड़े दावे पर अभी तक ईरान के किसी भी शीर्ष सरकारी अधिकारी ने सार्वजनिक तौर पर कोई पुष्टि या खंडन नहीं किया है। तो क्या ये सिर्फ एक मीडिया रिपोर्ट है या ईरान की तरफ से दिया गया एक संकेत – ये अभी साफ नहीं है।
अमेरिकी मीडिया ने क्या कहा? 'ईरान की गुंडागर्दी'
एक तरफ ईरान अपनी कहानी गढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका इस पूरी थ्योरी को सिरे से खारिज कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे सीधे-सीधे ईरान की 'गुंडागर्दी' बताया है।
अमेरिकी मीडिया आउटलेट 'एक्सियोस' ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सोमवार रात जानबूझकर दो कमर्शियल जहाजों पर मिसाइलें दागीं। यह हमला किसी गलती से नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया था, ताकि ईरान अपनी धौंस जमा सके।
एक्सियोस के मुताबिक, इन हमलों में दोनों जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने इस बात की पुष्टि की है कि हमले में कोई भी हताहत नहीं हुआ है और न ही समुद्र में कोई बड़ा तेल रिसाव हुआ है।
लेकिन नुकसान सिर्फ जहाजों का नहीं, बल्कि विश्वास का भी हुआ है। अमेरिका इस हमले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है और खबर है कि वह ईरान पर बड़े पलटवार की तैयारी कर रहा है।
इस टकराव से तनाव और बढ़ने की आशंका है।
ओमान के रास्ते क्यों भाग रहे हैं जहाज?
अब सवाल ये उठता है कि आखिर जहाज ईरान के तय किए गए कॉरिडोर को छोड़कर ओमान के तट के करीब वाले रास्ते से क्यों गुजरना चाहते हैं? मैरीन ट्रैफिक के सैटेलाइट डेटा ने एक दिलचस्प कहानी बयां की है। पिछले कुछ दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कुल 108 जहाजों में से लगभग 30 जहाजों ने जानबूझकर ओमान के तट के करीब वाले रास्ते को चुना।
इन जहाजों में कई कच्चे तेल और LPG के बड़े टैंकर भी शामिल थे, जिनकी आवाजाही पर दुनिया की नजर रहती है।
इसकी एक बड़ी वजह ईरान का हालिया ऐलान है। ईरान ने घोषणा की है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों से 'सर्विस फीस' वसूलेगा।
और सिर्फ इतना ही नहीं, उसने यह भी साफ कर दिया है कि जहाज केवल उसके तय किए गए कॉरिडोर से ही गुजर सकते हैं। जाहिर है, जहाजों के मालिक और ऑपरेटर्स इस नई 'फीस' और ईरान के बढ़ते नियंत्रण से बचना चाहते हैं।
वे एक ऐसा वैकल्पिक रास्ता खोज रहे हैं, जहां उन्हें ईरान की शर्तों को न मानना पड़े, और शायद इसी कोशिश में वे अमेरिकी नौसेना के कथित समर्थन वाले ओमान के रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे। ईरान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन है और यह सीधे-सीधे इस महत्वपूर्ण रास्ते पर अपना एकाधिकार जमाने की कोशिश है।
अगर ऐसा हुआ तो माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर ग्लोबल सप्लाई चेन और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। यह एक ऐसा पेचीदा मामला है, जो आने वाले दिनों में और भी गरमाएगा, और मध्य-पूर्व की आग को दुनिया के बाजारों तक पहुंचा सकता है।






































