जालंधर: आज के समय में जब रिश्ते बस एक कॉल की दूरी पर सिमट गए हैं, कोई अपना ही आवाज का जाल बिछाकर ठगी कर ले तो इंसान किस पर भरोसा करेगा? पंजाब के जालंधर से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां जैतेवाली इलाके में रहने वाली एक बुजुर्ग महिला पूनम को उनके दामाद की हूबहू आवाज में बात करके शातिर ठगों ने पूरे 8.25 लाख रुपये का चूना लगा दिया। आवाज इतनी असली थी कि पूनम को एक पल के लिए भी शक नहीं हुआ कि फोन पर उनका दामाद नहीं, बल्कि मौत के सौदागर बैठे हैं। यह सिर्फ पैसों का मामला नहीं, बल्कि भरोसे और रिश्तों पर एक चोट है, जिसे साइबर अपराधी नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लगातार गहरा कर रहे हैं।
मामला जालंधर के जैतेवाली क्षेत्र का है। पीड़ित पूनम ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि उनके पति का कुछ समय पहले देहांत हो चुका है।
उनकी बेटी की शादी हो चुकी है और वो अब अपने घर पर अकेली रहती हैं। अकेलापन, थोड़ी उम्र और टेक्नोलॉजी से कम वाकिफ होना, शायद यही सब बातें थीं, जिन्होंने पूनम को साइबर ठगों के लिए एक 'सॉफ्ट टारगेट' बना दिया।
ठगों ने उनकी इसी कमजोरी का फायदा उठाया और एक ऐसी साजिश बुनी, जिसकी शुरुआत दामाद की मीठी बातों से हुई और अंत बैंक खाते के खाली होने पर।
दामाद की आवाज में आया फोन: “मां जी, मैं ही बोल रहा हूँ...”
इस पूरे खेल की शुरुआत हुई बीती 8 मई को। दोपहर का वक्त रहा होगा, जब पूनम के मोबाइल फोन पर एक अनजान नंबर से घंटी बजी।
अमूमन ऐसे नंबर देखकर लोग थोड़ा हिचकिचाते हैं, लेकिन शायद पूनम ने सोचा होगा कि हो सकता है किसी दोस्त या रिश्तेदार का नंबर बदल गया हो। उन्होंने फोन उठाया और उधर से आई आवाज सुनकर एक पल के लिए वो निश्चिंत हो गईं।
फोन पर बात करने वाले शख्स ने बिल्कुल उनके दामाद की आवाज में बात करना शुरू किया। उस शख्स ने बड़े विश्वास और अपनेपन से कहा, “मां जी, मैं आपका दामाद ही बोल रहा हूँ।
”
आप कल्पना कीजिए, जब एक अकेली महिला को अपने दामाद की आवाज में फोन आता है, तो उनके मन में कितनी खुशी और राहत महसूस हुई होगी। आवाज इतनी मिलती-जुलती थी, इतनी स्वाभाविक थी कि पूनम को जरा भी संदेह नहीं हुआ।
यह संभवतः AI वॉयस क्लोनिंग तकनीक का कमाल था, जिसके जरिए ठग ने उनके दामाद की आवाज की नकल तैयार की थी। यह तकनीक इतनी खतरनाक है कि कुछ सेकंड की आवाज सुनकर अपराधी किसी की भी आवाज हूबहू बना सकते हैं, और फिर उसका इस्तेमाल लोगों को ठगने के लिए करते हैं।
पूनम के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जहां तकनीक ने भरोसे का गला घोंट दिया।
लंबी बातचीत और धीरे-धीरे साफ हुआ बैंक अकाउंट
एक बार जब पूनम को यकीन हो गया कि फोन पर उनका दामाद ही है, तो ठग ने अपनी शातिर चालें चलना शुरू कर दिया। शिकायत के मुताबिक, ठग ने पूनम को अपनी बातों में उलझाए रखा और काफी लंबी बातचीत की।
यह लंबी बातचीत ही उसकी रणनीति का हिस्सा थी। अक्सर साइबर ठग जल्दी काम निपटाने की कोशिश करते हैं, लेकिन इस बार ठग ने वक्त लिया।
वह धीरे-धीरे पूनम से बातचीत करता रहा, शायद उनकी व्यक्तिगत जानकारी और विश्वास को और मजबूत करने के लिए।
इसी लंबी बातचीत के दौरान, ठग ने बेहद शातिर तरीके से पूनम के बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारियां निकलवा लीं या फिर उसने किसी ऐसे ट्रांजैक्शन लिंक का इस्तेमाल किया, जिसके जरिए उसके बैंक खाते तक पहुंच बन सके। ठग ने एक बार में सारा पैसा नहीं उड़ाया।
बल्कि धीरे-धीरे, टुकड़ों में पूनम के बैंक अकाउंट से कुल 8.25 लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए।
यह तरीका इसलिए अपनाया जाता है ताकि पीड़ित को तुरंत ठगी का एहसास न हो और अपराधी के पास पैसे निकालने का पर्याप्त समय मिल जाए। हर ट्रांजैक्शन के साथ पूनम का विश्वास और बैंक बैलेंस, दोनों कम होते जा रहे थे, लेकिन उन्हें इसकी भनक तक नहीं थी।
जब हकीकत सामने आई: पैरों तले खिसकी जमीन
ठग ने अपना काम पूरा किया और फोन काट दिया। पूनम, जो अपने दामाद से लंबी बातचीत के बाद शायद कुछ देर के लिए अच्छा महसूस कर रही होंगी, उन्होंने जैसे ही अपने मोबाइल स्क्रीन को देखा, तो उनके होश उड़ गए।
बैंक से पैसे कटने के लगातार कई मैसेजेस आए हुए थे। एक मैसेज, फिर दूसरा, फिर तीसरा.
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देखते ही देखते कुल 8.25 लाख रुपये कटने का मैसेज उनके सामने था।
उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस दामाद की आवाज पर उन्होंने भरोसा किया था, वह असल में एक ठग था जिसने उनके जीवन भर की कमाई को पल भर में साफ कर दिया था।
ठगी का एहसास होते ही पूनम ने तुरंत साइबर क्राइम पुलिस थाने का रुख किया। उन्होंने अपनी पूरी आपबीती पुलिस को सुनाई और शिकायत दर्ज करवाई।
पुलिस ने पीड़िता के बयान दर्ज कर लिए हैं और इस पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और ठगों की तलाश शुरू कर दी है।
साइबर पुलिस की कार्रवाई और बढ़ती चुनौती
यह मामला एक बार फिर साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को उजागर करता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वॉयस क्लोनिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल अब ठग लोगों को फंसाने के लिए कर रहे हैं, जिससे उन्हें पहचानना और भी मुश्किल हो गया है।
पुलिस के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर दूर बैठे होते हैं और डिजिटल फुटप्रिंट को छिपाने में माहिर होते हैं। जालंधर साइबर क्राइम पुलिस अब इस नेटवर्क को तोड़ने और पूनम के पैसे वापस दिलवाने की कोशिश में लगी है।
उन्हें उम्मीद है कि जांच में कुछ अहम सुराग मिलेंगे जो ठगों तक पहुंचने में मदद करेंगे। लेकिन, यह घटना हम सभी के लिए एक बड़ी सीख है कि डिजिटल दुनिया में अपनों की आवाज पर भी आंख मूंदकर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।


