पलामू: झारखंड के पलामू जिले में बुधवार की रात एक दुकान नहीं जली, बल्कि एक परिवार की उम्मीदें, सालों की मेहनत और भविष्य के सपने धू-धूकर खाक हो गए। सतबरवा थाना क्षेत्र के पोलपोल बाजार में बुधवार देर रात हुए इस अग्निकांड ने एक हार्डवेयर सह सैनिटरी दुकान को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भीषण थी कि देखते ही देखते लाखों रुपए का सामान जलकर राख हो गया और पूरा इलाका धुएं और अफरा-तफरी से भर उठा। जिसने भी यह मंजर देखा, उसके रोंगटे खड़े हो गए।
मामला रात करीब 9 बजे का है, जब दुकान के मालिक नागेंद्र विश्वकर्मा अपने घर पर थे। उन्हें अचानक खबर मिली कि उनकी दुकान में आग लग गई है।
सुनते ही नागेंद्र जी के पैरों तले जमीन खिसक गई और वह तुरंत मौके की ओर भागे। वहां पहुंचने पर जो दृश्य उन्होंने देखा, वह किसी दुःस्वप्न से कम नहीं था।
उनकी आंखों के सामने उनकी मेहनत की पूंजी आग की लपटों में घिरी हुई थी।
पोलपोल बाजार में आग का तांडव: बुझाने की नाकाम कोशिशें
नागेंद्र विश्वकर्मा जब दुकान पर पहुंचे, तब तक आग काफी फैल चुकी थी। आसपास के लोग भी इकट्ठा हो गए थे और अपनी तरफ से आग बुझाने की हर संभव कोशिश कर रहे थे।
बाल्टियों में पानी भरकर लाया जा रहा था, रेत फेंकी जा रही थी, लेकिन आग का रौद्र रूप शांत होने का नाम नहीं ले रहा था। दरअसल, दुकान में हार्डवेयर और सैनिटरी के सामान भरे थे, जिनमें प्लास्टिक, पेंट, थिनर और कई ज्वलनशील वस्तुएं थीं।
इन सामानों ने आग को और तेजी से भड़काने का काम किया। जैसे-जैसे लोग आग बुझाने की कोशिश करते, लपटें और ऊंची उठती जातीं।
बाजार में चारों तरफ आग की गर्माहट महसूस की जा सकती थी, और धुएं का गुबार आसमान में छा रहा था, जिसने रात के अंधेरे को और गहरा कर दिया था।
स्थानीय लोगों की सारी कोशिशें नाकाफी साबित हुईं। आग पर काबू पाना मुश्किल होता जा रहा था।
मजबूरन, दमकल विभाग को सूचना दी गई। फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन आग की भीषणता ऐसी थी कि घंटों तक उन्हें कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
दमकलकर्मियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। एक तरफ से पानी की बौछारें पड़ रही थीं, तो दूसरी तरफ आग नए सिरे से भड़क रही थी।
यह एक अंतहीन लड़ाई जैसी लग रही थी, जहां आग हर पल जीतती हुई दिख रही थी। अंततः, कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद, सुबह होने से पहले आग पर किसी तरह काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
लाखों का नुकसान और टूटी उम्मीदें
जब आग बुझ गई और धुआँ छटा, तो जो मंजर सामने आया, वह दिल दहला देने वाला था। नागेंद्र विश्वकर्मा की दुकान पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी।
लेंटर मकान में चल रही यह दुकान अब सिर्फ जले हुए मलबे का ढेर थी। नागेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि उनकी दुकान के अंडरग्राउंड में भी सीमेंट और अन्य महंगे सामान रखे हुए थे।
आग की लपटें इतनी भयानक थीं कि उन्होंने ऊपर के साथ-साथ नीचे रखे सामान को भी पूरी तरह नष्ट कर दिया। सीमेंट के बोरे, सैनिटरी फिटिंग्स, पाइप, पेंट और हार्डवेयर के तमाम औजार, सब कुछ जलकर कोयला बन चुका था।
नागेंद्र विश्वकर्मा ने शुरुआती अनुमान में बताया है कि इस अग्निकांड में उन्हें 25 लाख रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा सिर्फ एक अनुमान है और वास्तविक नुकसान इससे कहीं ज्यादा भी हो सकता है।
यह सिर्फ पैसों का नुकसान नहीं था, बल्कि एक कारोबारी और उसके परिवार के लिए यह एक बड़ा झटका था, जिसने उनकी कई सालों की मेहनत और भविष्य की योजनाओं पर पानी फेर दिया। रात भर बाजार में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
स्थानीय लोग देर रात तक घटनास्थल पर जुटे रहे, लेकिन कोई कुछ खास कर नहीं पाया, सिवाय नागेंद्र जी के दर्द को बांटने के।
पुलिस जांच और आग के कारणों की तलाश
घटना की सूचना मिलते ही सतबरवा थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और मामले की जांच में जुट गई है।
शुरुआती जांच में आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। हालांकि, नागेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि खराब मौसम के कारण उन्होंने शाम को ही दुकान बंद कर दी थी और घर चले गए थे, जिसके बाद रात में यह हादसा हुआ।
पुलिस अब आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है, ताकि आग लगने के संभावित कारणों का पता लगाया जा सके। क्या यह शॉर्ट सर्किट था? या फिर किसी शरारती तत्व की करतूत? या कोई और वजह? इन सभी सवालों के जवाब पुलिस की गहन जांच के बाद ही सामने आ पाएंगे।
फिलहाल, नागेंद्र विश्वकर्मा और उनके परिवार के लिए यह बेहद मुश्किल घड़ी है, जब उन्हें इस बड़ी क्षति से उबरने का रास्ता खोजना होगा। पूरे पोलपोल बाजार में इस घटना को लेकर चर्चा है और सभी नागेंद्र जी के साथ सहानुभूति व्यक्त कर रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि वे हर पहलू से जांच कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।


